Bayaan - Part 6 in Hindi Love Stories by Radha rani Jha books and stories PDF | Bayaan - Part 6

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Bayaan - Part 6

Part 6 

डायरी के अगले पन्ने पर राधा ने लिखा था—

"शायद हर कहानी में एक ऐसा किरदार होता है जो खुद कहानी का हिस्सा नहीं होता..."

"लेकिन फिर भी कहानी को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ उसी का होता है।"

"मेरी कहानी में वह किरदार कुंदन था।" वह मेरा अपना भाई नहीं था लेकिन अपने भाई से ज्यादा मानता था मुझे l

वह धीरे-धीरे मेरी मदद करने लगा क्यूंकि उसकी अच्छी खासी बात होती थी अभिनव से इसी लिए उसको पता होता था अभिनव कब निकलेगा और वो चीज वो मुझे बता देता था ll

"वह मेरा दोस्त था... या यूँ कहूँ, भाई जैसा दोस्त।"

"सबसे पहला इंसान जिसे मैंने अपने मन की यह बात बताई थी।"

जब मैंने उसे बताया कि मुझे एक ऐसा लड़का पसंद आने लगा है जो शायद मुझे ठीक से जानता भी नहीं, तो मुझे डर था कि वह मेरा मज़ाक उड़ाएगा।

लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया।

उसने बस मेरी पूरी बात सुनी।

फिर हल्का सा मुस्कुराकर कहा—

"कभी-कभी दिल भी बिना वजह किसी को चुन लेता है।"

उस दिन के बाद धीरे-धीरे वह मेरी मदद करने लगा।

मैं उससे अक्सर अभिन्नव की बातें करती।

और वह मेरी हर बात बड़े ध्यान से सुनता।

शायद वह समझ चुका था कि यह कोई साधारण पसंद नहीं थी।

समय बीतता गया और मेरी आदतें भी बदलने लगीं।

मैं खुद से कहती कि अब उसे कम देखा करूँगी।

लेकिन हर बार कोई नया बहाना मिल जाता।

कभी घर से बाहर निकलने का।

कभी उस रास्ते से जाने का जहाँ उसके मिलने की थोड़ी सी भी उम्मीद हो।

कभी छत पर जाने का।

और कभी बिना किसी वजह के बस बाहर खड़े रहने का।

सच कहूँ तो...

अब मुझे उसे देखने की आदत सी हो गई थी।

उसकी एक झलक पूरे दिन को अच्छा बना देती थी।

और अगर किसी दिन वह दिखाई नहीं देता, तो पता नहीं क्यों पूरा दिन अधूरा सा लगता था।

फिर हमारे गाँव में जानकी पूजा हुई।

पूरा गाँव रोशनी से सजा हुआ था।

हर तरफ़ भीड़, गाने और खुशियों का माहौल था।

लेकिन उस शाम भी मेरी नज़रें सिर्फ़ एक चेहरे को ढूँढ़ रही थीं।

कुछ देर बाद मैंने अभिन्नव को देखा।

वह अपने दोस्तों के साथ खड़ा था।

मेरा दिल एक बार फिर तेज़ धड़कने लगा।

मैं दूर से ही उसे देख रही थी।

तभी मैंने देखा कि उसने अचानक कुंदन को अपने पास बुलाया।

दोनों कुछ देर तक बातें करते रहे।

मैं इतनी दूर थी कि उनकी आवाज़ सुन नहीं सकती थी।

लेकिन फिर एक पल ऐसा आया जब अभिन्नव ने मेरी तरफ़ देखा।

और उसके बाद उसने कुंदन से कुछ कहा।

कुंदन ने भी तुरंत मेरी तरफ़ देखा।

उस एक पल में जैसे हजारों सवाल मेरे मन में आ गए।

क्या उसने मेरा नाम लिया था?

क्या उसे मेरे बारे में कुछ पता चल गया था?

या फिर मैं बेवजह इतना सोच रही थी?

उस रात मैंने कई बार कुंदन से पूछने की कोशिश की।

लेकिन वह हर बार मुस्कुरा कर बात बदल देता।

जैसे कोई राज़ हो जिसे वह अभी बताना नहीं चाहता था।

डायरी के सबसे नीचे राधा ने उस दिन सिर्फ़ एक आखिरी लाइन लिखी—

"जानकी पूजा की उस रात अभिन्नव ने कुंदन से क्या कहा था..."

"शायद उसी एक बात में मेरी कहानी का अगला मोड़ छिपा था।"

उस लाइन के नीचे सिर्फ़ दो शब्द लिखे थे—

"जारी रहेगा..." 📖✨