Gujarati Quote in Thought by Vora Anandbabu

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વ્યર્થની વ્યથા ને વેદનાઓ ને વાગોળ્યા કરે છે માનવી,
કાલ્પનિક ગમ ને નિરાશા ની છાશ,ઘોલ્યા કરે છે માનવી...

શીદ ને લક્ષ્યહીન,દિશાહીન આમ તેમ ભટક્યા કરે છે માનવી,
અંદરના અવાજ ની અનુમતિ છતાં,સદકાર્યએ અટક્યા કરે છે માનવી...

મેળવવા ઝાંઝવાના જળને સતત દોડ્યા કરે છે માનવી,
સંતોષની સીમાના પ્રણ ને સતત તોડયા કરે છે માનવી...

કશાય ની પ્રાપ્તિ,છે પ્રારબધે કે પુરુષાર્થે,એ સમજવા મથ્યા કરે છે માનવી,
ઈશ્વર તરફ ના માર્ગે,ક્યારેક ખુદ ને જ નડ્યા કરે છે માનવી...

મનની આ મૂંઝવણનો ઉકેલ મેળવવા,થોથા વાંચ્યા કરે છે માનવી,
પણ સાર જિંદગીનો,મસ્ત ઓલિયા ફકીર પાસે સાંભળી,નાચ્યાં કરે છે માનવી....

કશુંય શાશ્વત નથી આ દુનિયામાં,છતાંય વિષયમાં આસક્ત થયા કરે  છે માનવી,
પદ, પૈસો,પ્રતિષ્ઠા આવે નહીં હારે, તોય એનો ભકત થયા કરે છે માનવી......

વોરા આનંદબાબુ...."અશાંત"".....લખ્યા તારીખ...23/10/2017...1.10....A.M....

Gujarati Thought by Vora Anandbabu : 111082608
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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