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New bites

कोई भी लड़की यहां अकेली नजर नहीं आती
यहां हर एक खजाने पे साफ़ बैठा है

anisroshan324329

ज़िक्र होगा जब मुहब्बत का
, प्यार की जब भी बात निकलेगी,
चर्चा होगा अगर इनायत का,
और हिफ़ाज़त की बात निकलेगी,
बात निकलेगी जब ज़माने में,
किसकी बेलौस मुहब्बत है यहाँ,
हर दफ़ा लफ़्ज़ 'माँ' ही गूंजेगा,

हर दफ़ा 'माँ की बात निकलेगी......

anisroshan324329

अरज करु छू
अबे जल्दी बोल सुबह पनवेल निकलना है

ha Ha ha ha

तुम चले गये और मेरी कविताएँ... बिन ब्याही विधवा हो गईं

ये क्या था
ये क्या हुई

anisroshan324329

मुस्कुराना तो लडकियों की अदा है
और उसको जो मोहब्बत समझे वही तो गधा है


बोलो कैसी रही

anisroshan324329

समझने की जगह जब “साइको” कहा गया,
दर्द ने भी आज मुझसे रिश्ता बना लिया।
2.
हमने तो बस दिल की बात रखी थी,
उन्होंने हमें ही बीमारी बता दिया।

archanalekhikha

कहानी का नाम: "वो लौट आएँगे"
शहर की भीड़ और तेज़ रफ्तार ज़िंदगी से थककर, आकाश ने कुछ महीने के लिए अपने गाँव लौटने का फैसला किया। उसका दिल शहर की चमक-दमक से परेशान था, और उसे लगता था कि सिर्फ़ गाँव की सादगी में वह फिर से अपने विचार और सपनों को समझ पाएगा।
गाँव में उसकी मुलाकात हुई प्रियंका से, जो गाँव की ही रहने वाली थी। प्रियंका अपने माता-पिता के साथ रहती थी और अपने छोटे से पुस्तकालय को सँभालती थी। उसकी आँखों में हमेशा चमक थी, और उसके चेहरे पर मासूम मुस्कान।
पहली मुलाकात झील के किनारे हुई, जब आकाश की किताबें हवा में उड़ गईं और प्रियंका ने उसे संभाल कर लौटाई। आकाश ने धन्यवाद कहा और कहा, "शायद मेरी जिंदगी में तुम्हारी मदद ही मेरी नई शुरुआत हो।"
प्रियंका मुस्कुराई, "शायद! लेकिन तुम्हें भी तो अपनी किताबों से प्यार करना होगा, ना कि सिर्फ़ शहर की भागदौड़ से।"
धीरे-धीरे, उनकी मुलाकातें रोज़मर्रा का हिस्सा बन गईं। वे सुबह की चाय पर बातें करते, झील के किनारे बैठकर सपनों की दुनिया में खो जाते, और कभी-कभी सिर्फ़ चुपचाप बैठकर एक-दूसरे की Company का आनंद लेते।
लेकिन जैसे ही प्यार गहरा हुआ, आकाश के परिवार ने उसे शहर बुला लिया। वे चाहते थे कि वह अपने करियर पर ध्यान दे और गाँव में समय न गंवाए। वहीं प्रियंका के माता-पिता को लगा कि आकाश उनके परिवार के लिए सही नहीं है।
एक दिन, गाँव की गलियों में एक बड़ी बहस हुई। आकाश और प्रियंका की नज़दीकियों के बारे में अफवाहें फैल गईं। प्रियंका के माता-पिता ने उसे चेतावनी दी: "तुम्हारे लिए यह रिश्ता ठीक नहीं है।"
प्रियंका दुखी हुई, लेकिन उसने अपने दिल की सुनी। उसने आकाश को मिलने बुलाया।
आकाश ने कहा, "प्रियंका, मैं नहीं चाहता कि तुम्हें परेशानी हो। शायद हमें अलग होना ही ठीक है।"
प्रियंका ने आँसू पिए, लेकिन ज़िद्दी मुस्कान के साथ कहा, "अगर हमारा प्यार सच में मजबूत है, तो कोई भी ताकत इसे तोड़ नहीं सकती।"
आकाश शहर लौट गया, लेकिन उसके दिल में सिर्फ़ प्रियंका की यादें ही बसी रही। उसने अपने जीवन में कई सफलताएँ पाई, लेकिन हर कहानी में प्रियंका का नाम लिखा।
सालों बाद, आकाश की किताबें गाँव में पुस्तक मेले में आईं। प्रियंका वहाँ पहुँची। जैसे ही उनकी आँखें मिलीं, सारी पुरानी यादें, झगड़े, और जुदाई एक पल में गायब हो गईं।
इस बार, आकाश ने प्रियंका के सामने घुटने टेक दिए और कहा, "मैंने हर सफलता तुम्हारे बिना नहीं जी पाई। क्या तुम मेरे साथ अपना जीवन बिताओगी?"
प्रियंका ने आँसू पोंछते हुए कहा, "हाँ! अब हम कभी अलग नहीं होंगे।"
आकाश और प्रियंका ने अपनी जुदाई और संघर्ष की कहानी को पीछे छोड़ दिया। गाँव की झील, जहाँ उनकी कहानी शुरू हुई थी, अब उनके प्यार की गवाही थी—सपनों, संघर्ष और सच्चे प्यार की।
कहानी का संदेश:
सच्चा प्यार वो नहीं जो सिर्फ़ पास होने में है, बल्कि वो जो हर मुश्किल और जुदाई में भी मज़बूत बना रहे।कहानी का नाम: "सपनों की राह में"
शहर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, जहाँ हर कोई अपनी दुनिया में खोया रहता था, वहीं नीली झील के किनारे छोटे से गाँव में, आकाश और प्रियंका की कहानी शुरू हुई।
आकाश, एक युवा लेखक था, जो अपने शहर की भीड़-भाड़ और काम की उलझनों से थककर यहाँ गाँव आया था। उसने सोचा कि थोड़े दिन गाँव की सादगी में बिताए जाएँ, ताकि अपने विचारों को साफ़ कर सके। वहीं, प्रियंका, गाँव की ही रहने वाली, एक खुशमिज़ाज और साहसी लड़की थी, जो अपनी माँ के छोटे से पुस्तकालय में काम करती थी।
पहली मुलाकात झील के किनारे हुई। आकाश सुबह-सुबह वहाँ बैठकर अपने नोट्स में कुछ लिख रहा था, और प्रियंका वहाँ पानी भरने आई थी। एक छोटी सी बात—आकाश का नोटबुक गिर जाना और प्रियंका का उसे उठाकर देना—ने उनकी बातचीत की शुरुआत की।
धीरे-धीरे उनकी मुलाकातें रोज़मर्रा का हिस्सा बन गईं। वे बातें करते, सपने बाँटते, और कभी-कभी सिर्फ़ चुपचाप झील के किनारे बैठकर पानी की लहरों को निहारते। आकाश ने प्रियंका को अपनी कहानियों की झलक दिखाई, और प्रियंका ने अपने बचपन की यादें।
लेकिन जैसे ही प्यार का एहसास गहरा हुआ, ज़िंदगी ने अपनी परीक्षा ली। आकाश के शहर में लौटने का समय आ गया। उसे वहाँ अपनी नौकरी और किताब की पब्लिशिंग के काम में व्यस्त होना था। प्रियंका को लगा कि वह खो देगी वह इंसान जिसे उसने अपने दिल में सबसे खास जगह दी थी।
जुदाई का दिन आया। आकाश ने कहा, "प्रियंका, मैं नहीं चाहता कि मेरी ज़िंदगी की भागदौड़ तुम्हारे सपनों पर असर डाले।"
प्रियंका ने चुपचाप आँसू पिए और मुस्कुराते हुए कहा, "अगर तुम्हारा सपना तुम्हें बुला रहा है, तो मैं तुम्हें रोक नहीं सकती। लेकिन याद रखना, मेरे दिल में हमेशा तुम्हारी जगह रहेगी।"
शहर लौटकर आकाश ने अपनी किताब प्रकाशित की। किताब में उसका सबसे प्यारा किरदार प्रियंका से प्रेरित था। हर पेज में उसकी यादें बसी थीं। और वहीं प्रियंका, गाँव में अपने पुस्तकालय में बच्चों को पढ़ाती रही, लेकिन हर कहानी में आकाश की बातें दोहराती रही।
सालों बाद, एक दिन आकाश की किताब गाँव में एक पुस्तक मेला में आई। प्रियंका वहाँ पहुँची, और जैसे ही उनकी नजरें मिलीं, वक्त जैसे थम गया। दोनों के बीच कुछ शब्द नहीं हुए, बस आँखों की भाषा ही उनके दिलों की कहानी कह गई।
इस बार जुदाई नहीं थी। आकाश ने कहा, "मैं अब और दूर नहीं रह सकता। क्या तुम मेरे साथ अपना जीवन बिताओगी?"
प्रियंका ने मुस्कुराते हुए हाथ बढ़ाया। "हाँ, इस बार हम कभी नहीं अलग होंगे।"
और इस तरह, दो आत्माएँ, जो सपनों और जुदाई की कसौटी पर खरी उतरी थीं, आखिरकार अपने प्यार के सही घर पहुँच गईं। गाँव की झील, जहाँ उनकी कहानी शुरू हुई थी, अब उनके प्यार की गवाही थी—शांति, सुकून और हमेशा के लिए साथ।
कहानी का संदेश:
सच्चा प्यार वो नहीं जो सिर्फ़ साथ रहने में है, बल्कि वो जो दूर रहकर भी दिलों में बसा रहे और जब मौका मिले, फिर पूरी तरह साथ हो

rajukumarchaudhary502010

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
​{{तुम जो कागज़ पर उतरती हो}}

जब कभी ख़याल तुम्हारा आता है मैं
कोरा काग़ज़ उठाता हूँ, और अपनी
कलम की स्याही में तुम्हारी आँखों
की चमक घोल देता हूँ,

अजब करिश्मा है तुम्हारी शख्सियत
का, कि मैं जब भी तुम्हें लिखता हूँ
मेरे अल्फाज़ अपनी हदों को भूल
जाते हैं,

जो लफ्ज़ कल तक बोझिल थे, आज
वो किसी साज़ की तरह बजने लगते हैं,

मैं लिखता हूँ तुम्हारी हँसी, तो पन्ने से
खनक की आवाज़ आती है, मैं लिखता
हूँ तुम्हारा ज़िक्र तो महफ़िल में गुलाबों
की खुशबू छा जाती है,

सच तो ये है, कि तुम सिर्फ एक चेहरा
नहीं, तुम एक मुकम्मल इबादत हो,

मेरी कलम की हर हरकत तुम्हारे नाम
की एक नई आयत है,

तभी तो, मैं जब भी लिखता हूँ तुझको
इन काग़ज़ों पर, तो मेरे लफ़्ज़ों का हर
एक टुकड़ा, बिना किसी साज के एक
मधुर गीत बन जाता है,,🥀❤️
╭─❀💔༻ 
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
 #LoVeAaShiQ_SinGh
╨──────────━❥

loveguruaashiq.661810

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 न ┤_★__
ए लड़की...तुम्हारे आने से जैसे
 मुकम्मल होने लगे हैं किस्से मेरे,

बिखरे हुए थे जो कल तक अब
   जुड़ने लगे हैं वो हिस्से मेरे,

भटक रहा था मैं बरसों से तन्हाई
             के वीरानों में,

तुम्हारी आहट से आबाद हुए हैं
   अब दिल के ये ह़िस्से मेरे,

खामोश महफ़िल में जैसे कोई
         सदा गूँज उठी हो,

तुम्हें पाकर  रोशन हुए हैं, मेरी
      ज़िंदगी के अँधेरे सारे,

जो लफ्ज़ दबे थे सीने में बरसों
        से खामोशी बनकर,

तुम्हें देखा तो बन गए वो गज़लों
   के हसीं लफ्ज़-ओ-नग़मे मेरे,

सुकून की तलाश में न जाने कहाँ
         कहाँ भटका था मैं,

तुम्हारी आँखों में आके ठहरे हैं
     अब ये अरमाँ सारे…❤️
╭─❀💔༻ 
╨─────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh
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loveguruaashiq.661810

નદી કાંઠે રંગ જામિયો, તાલે પગલા ચાલે,
હે જીવન, થોડી વાર થંભીજા
આજે ખુશી બોલે.

નદી કાંઠે રંગ જામિયો, તાલે પગલા ચાલે,
પંખી બોલે ધીમેથી,
મુક્ત થઈને જીવતા શીખી લે.

હે રંગ, હે તાલ,
હે રાત રમઝટ ભરી,
હૈયાં ખૂલે આજ તો,
વાત નવી કરી.

પિંજરું જૂનું છે,
પણ પાંખ હજુ જાગે છે,
એક પગ સંસાર માં,
બીજો સપનામાં ભાગે છે.

નદી કાંઠે રંગ જામિયો, તાલે પગલા ચાલે,
પંખી બોલે ધીમેથી, જીવતા શીખી લે.

ઢમક.

heenagopiyani.493689

ખટમીઠાં સ્મરણોનાં
ઊબડખાબડ રસ્તા
વસંતથી પાનખરમાં
ધીમે ધીમે સરકતા…
-કામિની

kamini6601

हम साथ नहीं हैं तो क्या है ग़म,
कभी-कभी मिलते हैं, वो भी क्या है कम।
जी लेंगे वही पुरानी यादों के संग,
आज तन्हा सी ख़ामोशी में भी हम रहें बेफ़िक्र रंग।
दूरी में भी एक अपनापन रहता है,
ख़ामोश रहकर भी दिल सब कहता है।
और जब मिलेंगे, बनाएँगे नई यादें,
बिना किसी शिकायत के, बिना किसी फ़रियादें।
जितना मिलना हुआ, वही तो काफ़ी है,
हर एक लम्हा आज भी क़ीमती है।
हम साथ नहीं हैं तो क्या है ग़म,
कभी-कभी मिलते हैं, वो भी क्या है कम।

heenagopiyani.493689

जहाँ प्रेम घर में नहीं उतर सका,
वह किसी संस्था, आश्रम या तंत्र में कैसे उतरेगा?
स्त्री का घर ही उसका धर्म है—
लेकिन “घर” दीवार नहीं है,
घर वह केंद्र है जहाँ से प्रेम फैलता है।

1. घर छोड़ना धर्म नहीं, पलायन है
जो स्त्री कहती है—
“घर-परिवार छोड़कर मैं धर्म में जा रही हूँ”
वह धर्म नहीं, ज़िम्मेदारी से भाग रही है।

यदि
बच्चे असंस्कृत रह जाएँ
परिवार प्रेमविहीन हो
पड़ोस दुख में हो
तो फिर
किस मुँह से कहा जाए कि मैं सेवा कर रही हूँ?
धर्म कहीं बाहर नहीं है।

धर्म वहीं है जहाँ तुम्हारा स्पर्श किसी का बोझ हल्का करे।

2. प्रेम संस्था से नहीं, संबंध से जन्म लेता है
प्रेम के लिए
वर्दी नहीं चाहिए
मंत्र नहीं चाहिए
आश्रम नहीं चाहिए
प्रेम तो संबंधों में तपता है।

जो कहता है—
“घर में संभव नहीं, इसलिए मैं बाहर गया”
वह झूठ बोल रहा है।

घर सबसे कठिन प्रयोगशाला है।

और जो वहाँ सफल नहीं हुआ,
वह कहीं सफल नहीं होगा।

3. स्त्री का धर्म: नींव बनना
स्त्री का धर्म कोई लक्ष्य नहीं है,
वह प्रक्रिया है।
बच्चे में संस्कार
परिवार में संतुलन
पड़ोस में करुणा
समाज में सहजता
यही उसका धर्म है।

यदि हर स्त्री
अपने आस-पास के दुख को छू ले—
तो किसी “धार्मिक संस्था” की ज़रूरत ही न पड़े।

4. विधवापन, त्याग और दिखावटी पवित्रता

:
“ये विधवा बनना, प्रेम छोड़ना,
सब छल है।”
जो प्रेम से डरता है,
वह त्याग की भाषा बोलता है।

जो जीवन से डरता है,
वह मोक्ष की बातें करता है।

जहाँ प्रेम मरा, वहीं धर्म की दुकान खुली।

5. तंत्र, व्यवस्था और भोग
सच यह है—
जो व्यवस्था माँगे → वह संसार है
जो तंत्र माँगे → वह नियंत्रण है
जो सहज हो → वही प्रेम है
ध्यान, शांति, आनंद
किसी यंत्र से नहीं आते।

वे तो तब आते हैं
जब तुम अपने ही घर को स्वर्ग बना लेते हो।

अंतिम बात (बहुत सीधी)
यदि कोई कहता है—
“घर-परिवार में धर्म संभव नहीं”
तो समझ लेना
वह असफलता को सिद्धांत बना रहा है।

स्त्री का प्रेम पाप नहीं।
अपने संबंध जीना पाप नहीं।
अपने वृक्ष, पशु, पड़ोसी की सेवा पाप नहीं।

यही धर्म है।
बाक़ी सब धार्मिकता का व्यापार।

bhutaji

બાર્બરિક વિશ્વનો શ્રેષ્ઠ ધનુર્ધારી હતો. બાર્બરિક માટે કૌરવો અને પાંડવો બંનેની આખી સેનાનો નાશ કરવા માટે ત્રણ તીર પૂરતા હતા. યુદ્ધના મેદાનમાં, ભીમના પૌત્ર, બાર્બરિક, બંને છાવણીઓ વચ્ચેના રસ્તા પર એક પીપળાના ઝાડ નીચે ઊભા રહ્યા અને જાહેર કર્યું કે તે હારનાર પક્ષ તરફથી લડશે. બાર્બરિકની ઘોષણાથી કૃષ્ણ ગભરાઈ ગયા.
જ્યારે અર્જુન અને ભગવાન કૃષ્ણ ભીમના પૌત્ર બાર્બરિક સમક્ષ તેમના બહાદુરીના પરાક્રમને જોવા માટે હાજર થયા, ત્યારે બાર્બરિકે પોતાની બહાદુરીનું માત્ર એક નાનું પ્રદર્શન કર્યું. કૃષ્ણે કહ્યું, "જો તમે એક જ તીરથી આ વૃક્ષના બધા પાંદડા વીંધી નાખો, તો હું સ્વીકારીશ." બાર્બરિકે પરવાનગી મેળવ્યા પછી, બાર્બરિકે ઝાડ તરફ તીર છોડ્યું.
તીર એક પછી એક દરેક પાંદડાને વીંધતું ગયું, એક પાંદડું તૂટી ગયું અને પડી ગયું. કૃષ્ણે પોતાનો પગ પાંદડા પર મૂક્યો અને તેને છુપાવી દીધો, વિચારીને કે તે વીંધાઈ જશે. જોકે, બધા પાંદડાઓને વીંધતું તીર કૃષ્ણના પગ પાસે અટકી ગયું. પછી બાર્બરિકે કહ્યું, "પ્રભુ, તમારા પગ નીચે એક પાંદડું છે. કૃપા કરીને તમારા પગને ખસેડો, કારણ કે મેં તીરને ફક્ત પાંદડાઓને વીંધવાનો આદેશ આપ્યો છે, તમારા પગને નહીં."
આ ચમત્કાર જોઈને કૃષ્ણ ચિંતિત થઈ ગયા. ભગવાન કૃષ્ણ જાણતા હતા કે બાર્બરિક, તેમના વ્રતથી, હારનારનો પક્ષ લેશે. જો કૌરવો હારતા દેખાય, તો તે પાંડવો માટે મુશ્કેલી ઊભી કરશે. પરંતુ જો પાંડવો બાર્બરિક સામે હારતા દેખાય, તો તે તેમનો પક્ષ લેશે. આ રીતે, તે એક જ તીરથી બંને પક્ષોની સેનાઓનો નાશ કરશે.
પછી, ભગવાન કૃષ્ણ, બ્રાહ્મણનો વેશ ધારણ કરીને, સવારે બાર્બરિકના છાવણીમાં પહોંચ્યા અને ભિક્ષા માંગી. બાર્બરિકે કહ્યું, "માગો, બ્રાહ્મણ! તમારે શું જોઈએ છે?" બ્રાહ્મણનો વેશ ધારણ કરીને કૃષ્ણે કહ્યું, "તમે તે આપી શકતા નથી." પરંતુ બાર્બરિક કૃષ્ણના ફાંદામાં ફસાઈ ગયા, અને કૃષ્ણે તેનું માથું માંગ્યું.
બાર્બરિકે પોતાના દાદા પાંડવોના વિજય માટે સ્વેચ્છાએ પોતાનું માથું બલિદાન આપ્યું. બાર્બરિકના બલિદાનને જોઈને, ભગવાન કૃષ્ણએ તેમને કલિયુગમાં પોતાના નામે પૂજાવાનું વરદાન આપ્યું. આજે બાર્બરિકને ખાટુશ્યામ તરીકે પૂજવામાં આવે છે. કૃષ્ણે પોતાનું માથું જ્યાં મૂક્યું હતું તે સ્થાન ખાટુ તરીકે ઓળખાય છે.
અજાણ્યા રહસ્યો:
૧. ખાટુ શ્યામ એટલે માતા શૈવ્યમ પરાજતા. જેનો અર્થ થાય છે, જે પરાજિત અને નિરાશ લોકોને શક્તિ પ્રદાન કરે છે.
૨. ખાટુ શ્યામ બાબા દુનિયાના શ્રેષ્ઠ ધનુર્ધારી છે, ફક્ત શ્રી રામ જ તેમનાથી મહાન માનવામાં આવે છે.
3. ખાટુશ્યામ જીની જન્મજયંતિ દર વર્ષે કારતક શુક્લ પક્ષની દેવુથની એકાદશીના રોજ ખૂબ જ ધામધૂમથી ઉજવવામાં આવે છે.
૪. ખાટુમાં આવેલું શ્યામ મંદિર ખૂબ જ પ્રાચીન છે, પરંતુ વર્તમાન મંદિરનો પાયો ૧૭૨૦માં નાખવામાં આવ્યો હતો. ઇતિહાસકાર પંડિત ઝાબરમલ્લ શર્માના મતે, ઔરંગઝેબની સેનાએ ૧૬૭૯માં મંદિરનો નાશ કર્યો હતો. મંદિરની રક્ષા માટે ઘણા રાજપૂતોએ પોતાના જીવનું બલિદાન આપ્યું હતું.
પ્રખ્યાત બાબા ખાટુ શ્યામ મેળો ખાટુ શ્યામ મંદિર સંકુલમાં ભરાય છે. આ મેળો હિન્દુ મહિનાના ફાગણ મહિનાના શુક્લ પક્ષના છઠ્ઠા દિવસથી બારમા દિવસ સુધી ચાલે છે. એકાદશીનો તહેવાર એક ખાસ પ્રસંગ છે.
૬. બાર્બરિકા દેવીનો ભક્ત હતો. દેવી તરફથી વરદાન રૂપે, તેને ત્રણ દિવ્ય તીર આપવામાં આવ્યા હતા જે તેમના લક્ષ્યોને વીંધી નાખતા અને તેની પાસે પાછા ફરતા. આનાથી બાર્બરિકા અજેય બની ગયો.
૭. બાર્બરિકા તેના પિતા ઘટોત્કચ કરતાં વધુ શક્તિશાળી અને માયાવી હતો.
૮. એવું કહેવાય છે કે જ્યારે ભગવાન કૃષ્ણએ બાર્બરિકનું માથું માંગ્યું, ત્યારે બાર્બરિકે આખી રાત ભજન કર્યું અને ફાલ્ગુન શુક્લ દ્વાદશીના દિવસે, તેમણે સ્નાન કરીને પૂજા કરી અને પોતાના હાથે પોતાનું માથું કાપીને ભગવાન કૃષ્ણને દાન કરી દીધું.
૯. પોતાનું માથું દાન કરતા પહેલા, બાર્બરીકે મહાભારત યુદ્ધ જોવાની ઇચ્છા વ્યક્ત કરી, પછી શ્રી કૃષ્ણએ તેનું માથું એક ઊંચા સ્થાન પર મૂક્યું અને તેને જોવા માટે દ્રષ્ટિ આપી.
૧૦. યુદ્ધ પછી, જ્યારે પાંડવો વિજયનો શ્રેય કોને આપવો તે અંગે ચર્ચા કરી રહ્યા હતા, ત્યારે ભગવાન કૃષ્ણએ જાહેર કર્યું કે ફક્ત બાર્બરિકનું માથું જ આ બાબતનો નિર્ણય કરી શકે છે. બાર્બરિકે જવાબ આપ્યો કે ભગવાન કૃષ્ણનું સુદર્શન યુદ્ધમાં બંને પક્ષોનું સંચાલન કરી રહ્યું હતું, જ્યારે દ્રૌપદી, જે મહાકાળીમાં પરિવર્તિત થઈ હતી, તે લોહી પી રહી હતી.
૧૧. અંતે, શ્રી કૃષ્ણએ વરદાન આપ્યું કે કળિયુગમાં તમારી પૂજા મારા નામે થશે અને ફક્ત તમને યાદ કરવાથી ભક્તો આશીર્વાદ પામશે.
એક ફેસબુક પોસ્ટ

sunilanjaria081256

अनपेक्षित मजकडून त्याक्षणी
एक अपराध घडला होता
निरपराध तुझिया डोळ्यांतुन
जेव्हा थेंब अश्रुचा गळला होता

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

આપણો સાચો સાથી આપણે ખુદ છીએ...
બાકી સ્વાર્થ નાં સગાં સંબંધીઓ સૌ છે... અનુભવી ચુકી છું...

bhavnabhatt154654

कभी कुछ माफ़ी आसान नहीं होती,
कई बार कुछ गुनाह नादान नहीं होते.

desaipragati1108gmail.com102305

जब दृष्टि सीधी हो जाए तब खुद के ही दोष दिखते हैं, और अगर दृष्टि उल्टी हो तब सामनेवाले के दोष दिखते हैं। - दादा भगवान

अधिक जानकारी के लिए: https://dbf.adalaj.org/Se2pvY2B

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dadabhagwan1150

मुझे इतने रंग क्यों दिए जा रहे हैं?
क्या कोई मुझे बताएगा।
क्या कमी रह गई थी, जो तुम सबने मिलकर मुझे मेरे अपने रंगों से परे कर, तुम्हारे रंग में रंगने की कोशिश की।
क्या तुम्हें एक पल के लिए भी मेरा ख़याल नहीं आता, जब तुम सब केवल अपने-अपने शौक़ पूरे करने के लिए मुझे अपने-अपने तरीक़े से रंगने की कोशिश करते हो।
हाँ, तुम्हारे शौक़ हैं, तुम खुश होते हो, और तुम्हारी खुशी मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत है।
पर इस तरीक़े से मुझे ऊर्जा मिलेगी—ऐसा तो मैंने कभी नहीं सोचा था।
मुझे उस कायनात ने इतने रंगों से रंगा है कि तुम्हारे दिए हुए एक रंगीन दिन से मुझे हानि ही होगी।
क्योंकि दिन में तुम मुझे रंग-बिरंगे काग़ज़ों से सजा देते हो,
और रात होते ही चमचमाते जहरीले धुएँ से मेरे रंगों को मटमैला करने की कोशिश करते हो।
लेकिन मैं तुम्हारे जैसा नहीं कि तुम्हारी खुशी भूल जाऊँ।
मैं तुम्हें रोज़ खिलती हुई रोशनी देता हूँ,
और रात में सुकून बनी चाँदनी की चमक,
और कभी-कभी बारिश के समय तुम्हें इतने रंगों से रंग देता हूँ।
ऐसा क्यों?
मैं ही बता देता हूँ—
क्योंकि तुम एक इंसान हो,
और मैं आसमान,
जो कुदरत का एक नूर हूँ।

preetidadhich838700

“सिर्फ तुम्हारे लिए” — राधा की ओर से कृष्ण को पत्र
सिर्फ तुम्हारे लिए, श्याम,
मैंने अपनी पहचान भुला दी है,
अब लोग मुझे राधा नहीं कहते,
कहते हैं — कृष्ण की दीवानी।
सिर्फ तुम्हारे लिए, मुरलीधर,
मैंने लोक-लाज को आँचल में बाँधा है,
क्योंकि प्रेम जब तुम्हारा हो जाए,
तो संसार छोटा पड़ जाता है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, नंदलाल,
मैंने हर श्वास को रास बना लिया है,
तुम पास न भी हो,
तो भी तुम्हारी उपस्थिति में जीना सीख लिया है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, श्यामसुंदर,
मैंने विरह को भी वरदान माना है,
क्योंकि तुम्हारी यादों में जलकर
ही तो प्रेम कुंदन बनता है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, मोहन,
मैंने आँसुओं से भी श्रृंगार किया है,
क्योंकि तुमने सिखाया —
सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, अर्पण होता है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, केशव,
मैंने हर शिकायत को मुस्कान में ढाला है,
तुम जहाँ हो, वही मेरा धाम है,
वृंदावन अब हृदय में बसा लिया है।
सिर्फ तुम्हारे लिए, कान्हा,
मैंने खुद को ही तुम्हारा नाम कर दिया है,
अब राधा अलग नहीं रही,
तुम में मिलकर ही तो पूरी हुई है।
लोग कहते हैं — प्रेम में दूरी होती है,
पर उन्हें क्या पता श्याम,
तुम मुझसे दूर होकर भी
मेरी हर धड़कन में बसते हो।
और अगर जन्मों का फेर फिर आए,
तो मैं फिर राधा बन जाऊँगी,
किसी वरदान की इच्छा नहीं,
बस तुम्हें फिर से चाहूँगी। 💙🦚
क्योंकि संसार में सब कुछ बदला जा सकता है,
पर मेरा प्रेम नहीं —
वो तो हर जन्म में वही रहेगा,
सिर्फ तुम्हारे लिए, कृष्ण। 🌸

premsingh190204

प्यार तब महसूस हुआ, जब शब्द मौन हो गए,
और कोई चुपचाप मेरे पास आकर बैठ गया।

ना सवाल थे, ना सलाहों की भीड़,
बस मेरी ख़ामोशी को किसी ने समझ लिया।

वो साथ, जो बिना माँगे मिल गया,
वो हाथ, जो मुश्किल में थाम लिया।

तभी जाना मैंने—प्यार दिखावा नहीं,
किसी के दर्द को अपना मान लेना ही प्यार है।

#आर्यमौलिक

deepakbundela7179

अगर मैं एक नाज़ुक फूल होती, जो छूने से बिखर जाती, क्या तुम मुझे अपनाते?

pushpanaik032851

apnã khaka lagta huuñ
ek tamãshã lagtã huuñ

ab mai koi shakhs nahiñ
us kā saayã lagtã huuñ

shekhjavedashraf.468407

कुछ रिश्ते
शोर नहीं करते,
बस निभाते रहते हैं।

और हम उन्हें
इतनी ख़ामोशी से खो देते हैं
कि बाद में रोने के लिए भी
कोई आवाज़ नहीं बचती।

तुम मेरे न थे,
फिर भी दिल ने तुम्हें अपनाया,
इस दिल के एक कोने में
तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा सजाया।

फ़िर भी तुम न पहचान सकी,
क्यों मैने तुमको अपनाया,
पढ़ने वाला लड़का था,
किताबें छोड़, तुमसे दिल लगाया,

पल पल ऐसे टूट गया,
क्यू तुमने न समझाया,
प्यार मेरा तो सच्चा था,
इक तुमको ही न दिख पाया।

फिर लौट रहे उन अंधेरों में
जिनसे मैं था आया,
प्यार मेरा तो अमर रहेगा,
चाहे एक तरफ ही निभाया।

akshaytiwari128491

✨ रात की ख़ामोश रोशनी 🌠
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jiwatma