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स्वार्थ के इस मेले में अब, रिश्ते कैसे परखे जाएँ,
साथ निभाने वाले ही अब, राहों में भटकाएँ।

मीठी मुस्कान के पीछे यहाँ, बरसों पुराने बैर छुपे,
कौन है अपना, कौन है पराया, हर चेहरे में ज़हर भरे।

नहीं है जानता कोई यहाँ, कौन किसका साया है,
अपनी ही राह चलना बेहतर, उम्मीद रखना माया है।

नहीं जानता कोई यहाँ, किसका कौन सा रिश्ता है,
अपनी ही मंज़िल खुद बनानी, बाकी सब माया है।
DHAMAK

heenagopiyani.493689

ज्ञान ही असली शक्ति हैकहानी: ज्ञान ही असली शक्ति है
एक गाँव में दो भाई रहते थे – अर्जुन और भीम। दोनों मेहनती थे, लेकिन सोच में फर्क था।
अर्जुन हमेशा सीखने और जानने में समय बिताता, किताबें पढ़ता और नए कौशल सीखता।
भीम सिर्फ काम करता, मेहनत करता, लेकिन सीखने की कोई आदत नहीं थी।
एक साल बाद गाँव में सूखा पड़ गया। फसल बर्बाद हो गई और लोग परेशान हो गए।
भीम के पास सिर्फ ताकत थी, लेकिन अर्जुन ने नए तरीके सीख रखे थे – पानी बचाने, फसल सुरक्षित रखने और खेती के नए तरीके।
अर्जुन ने गाँव वालों की मदद से फसल को बचाया और सभी का पेट भरा।
भीम ने मेहनत तो की, लेकिन कुछ मदद नहीं कर पाया।
अर्जुन ने कहा:
“ताकत से काम होता है, लेकिन ज्ञान से जीवन बचता है। ज्ञान ही सच्चा भगवान है।”
सभी गाँव वाले समझ गए कि जो ज्ञान रखता है, वही असली शक्ति रखता है।
💡 संदेश:
शक्ति, पैसा या स्थिति स्थायी नहीं, लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। ज्ञान से आप खुद भी मजबूत बनते हैं और दूसरों की मदद भी कर सकते हैं।

rajukumarchaudhary502010

ज्ञान ही असली शक्ति हैकहानी: ज्ञान ही असली शक्ति है
एक गाँव में दो भाई रहते थे – अर्जुन और भीम। दोनों मेहनती थे, लेकिन सोच में फर्क था।
अर्जुन हमेशा सीखने और जानने में समय बिताता, किताबें पढ़ता और नए कौशल सीखता।
भीम सिर्फ काम करता, मेहनत करता, लेकिन सीखने की कोई आदत नहीं थी।
एक साल बाद गाँव में सूखा पड़ गया। फसल बर्बाद हो गई और लोग परेशान हो गए।
भीम के पास सिर्फ ताकत थी, लेकिन अर्जुन ने नए तरीके सीख रखे थे – पानी बचाने, फसल सुरक्षित रखने और खेती के नए तरीके।
अर्जुन ने गाँव वालों की मदद से फसल को बचाया और सभी का पेट भरा।
भीम ने मेहनत तो की, लेकिन कुछ मदद नहीं कर पाया।
अर्जुन ने कहा:
“ताकत से काम होता है, लेकिन ज्ञान से जीवन बचता है। ज्ञान ही सच्चा भगवान है।”
सभी गाँव वाले समझ गए कि जो ज्ञान रखता है, वही असली शक्ति रखता है।
💡 संदेश:
शक्ति, पैसा या स्थिति स्थायी नहीं, लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। ज्ञान से आप खुद भी मजबूत बनते हैं और दूसरों की मदद भी कर सकते हैं।

rajukumarchaudhary502010

ज्ञान बड़ा है पैसा ?कहानी: खाली जेब और भरा दिमाग
एक गाँव में दो दोस्त रहते थे—
मोहन और सुरेश।
मोहन के पिता बहुत अमीर थे। घर में धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी।
मोहन को लगता था—
“पैसा है तो सब कुछ है, पढ़ाई-लिखाई किस काम की?”
दूसरी ओर सुरेश गरीब परिवार से था।
उसके पास पैसा नहीं था, लेकिन सीखने की भूख थी।
वह किताबें पढ़ता, लोगों से सवाल पूछता और हर अनुभव से कुछ न कुछ सीख लेता।
समय बीतता गया…
एक दिन गाँव में बाढ़ आ गई।
मोहन का सारा पैसा, खेत और सामान बह गया।
वह टूट गया—
“अब मैं क्या करूँगा?”
उसी समय सुरेश ने हालात को समझा।
उसने अपने ज्ञान से लोगों को सुरक्षित जगह पहुँचाया,
खेती के नए तरीके अपनाए
और छोटा-सा काम शुरू किया।
कुछ ही सालों में सुरेश सफल हो गया।
लोग उसकी सलाह लेने आने लगे।
वहीं मोहन सुरेश के पास मदद माँगने पहुँचा।
मोहन ने पूछा—
“तुम्हारे पास तो पहले कुछ भी नहीं था, फिर तुम इतना आगे कैसे निकल गए?”
सुरेश मुस्कुराया और बोला—
“पैसा खो जाए तो कुछ नहीं,
लेकिन अगर ज्ञान हो तो सब कुछ फिर से बनाया जा सकता है।”
मोहन की आँखें खुल गईं।
उसे समझ आ गया कि
पैसा साथ छोड़ सकता है,
पर ज्ञान जीवन भर साथ चलता है।
सीख:
👉 पैसा साधन है,
👉 ज्ञान शक्ति है,
👉 और शक्ति से साधन पैदा होते हैं।🔥 एक लाइन में बात:
पैसा जेब में रहता है,
ज्ञान दिमाग में —
और दिमाग जेब को भर देता है।

rajukumarchaudhary502010

પાનખરના રૂતબા પર
ઓવાર્યો
ઋતુરાજ વસંત રૂમઝૂમતો
પધાર્યો…
-કામિની

kamini6601

ठंडी हवाएं, और चाय का गर्म एहसास है।
हर घूँट में घुली है एक सुकून मिठास है,
ये सभी वार भी तेरे नाम है, ये ज़िंदगी भी तेरे होने में ही स्वाद है।

hsc

सफलता के दिग्गजों से सीख📘 पुस्तक समीक्षा: सफलता के दिग्गजों से सीख
यह पुस्तक रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे विश्व-प्रसिद्ध सफल व्यक्तित्वों के प्रेरक विचारों का सार है, जो पाठकों को न केवल प्रेरित करती है बल्कि जीवन और करियर में आगे बढ़ने के लिए स्पष्ट दिशा भी देती है। यह किताब उन लोगों के लिए खास है जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने का रास्ता खोज रहे हैं।
पुस्तक का सबसे मजबूत पक्ष इसका व्यावहारिक दृष्टिकोण है। इसमें बताया गया है कि सफलता केवल भाग्य से नहीं, बल्कि सही सोच, साहसिक निर्णय और लगातार सीखने की आदत से मिलती है। रतन टाटा के विचार हमें सिखाते हैं कि ईमानदारी, दीर्घकालिक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। वहीं बिल गेट्स के विचार नवाचार, तकनीक के सही उपयोग और निरंतर सीखते रहने के महत्व को उजागर करते हैं।
लेखक ने जोखिम (Risk) को नकारात्मक नहीं, बल्कि विकास का आवश्यक हिस्सा बताया है। पुस्तक समझाती है कि बिना जोखिम लिए बड़ी उपलब्धियाँ संभव नहीं हैं, लेकिन यह जोखिम सोच-समझकर और सीखने की मानसिकता के साथ लिया जाना चाहिए। असफलता को अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानने की प्रेरणा इस पुस्तक की खास पहचान है।
इसके अलावा, पुस्तक बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें छोटे-छोटे चरणों में बाँटकर हासिल करने की रणनीति भी बताती है। यह पाठक को आत्मविश्वास देती है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है, बशर्ते उसकी सोच सही दिशा में हो।
भाषा सरल, स्पष्ट और प्रेरणादायक है, जिससे हर उम्र और वर्ग का पाठक आसानी से जुड़ सकता है। उदाहरणों और विचारों का चयन ऐसा है कि पढ़ते समय पाठक खुद को इन महान व्यक्तित्वों के अनुभवों से जुड़ा हुआ महसूस करता है।
⭐ निष्कर्ष
यह पुस्तक केवल प्रेरणादायक कथनों का संग्रह नहीं, बल्कि सफल जीवन का व्यावहारिक मार्गदर्शक है। जो पाठक अपने करियर, व्यवसाय या व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह किताब अवश्य पढ़ने योग्य है।📘 पुस्तक समीक्षा
सफलता के दिग्गजों के विचार
यह पुस्तक रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे विश्वविख्यात सफल व्यक्तित्वों के प्रेरणादायक विचारों का उत्कृष्ट संग्रह है। यह किताब उन पाठकों के लिए लिखी गई है जो जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन सही दिशा और सोच की तलाश में हैं।
पुस्तक का मुख्य संदेश है — सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि यह निरंतर सीखने, सही जोखिम उठाने और बड़े लक्ष्य तय करने से प्राप्त होती है। रतन टाटा के विचार हमें सिखाते हैं कि ईमानदारी, धैर्य और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ भी बड़ी ऊँचाइयों को छुआ जा सकता है। वहीं बिल गेट्स के अनुभव बताते हैं कि तकनीक, नवाचार और सीखने की भूख इंसान को असाधारण बना सकती है।
इस पुस्तक में जोखिम को डर के रूप में नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखने की सीख दी गई है। लेखक स्पष्ट करता है कि बिना जोखिम लिए कोई भी बड़ी सफलता संभव नहीं है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक आवश्यक पड़ाव होती है।
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह केवल प्रेरणा नहीं देती, बल्कि व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। लक्ष्य कैसे तय करें, उन्हें छोटे चरणों में कैसे बाँटें और लगातार खुद को कैसे बेहतर बनाएं — इन सभी विषयों को सरल शब्दों में समझाया गया है।
भाषा सहज, सरल और प्रेरक है, जिससे नए पाठक भी आसानी से जुड़ जाते हैं। यह किताब पढ़ते समय ऐसा महसूस होता है जैसे कोई अनुभवी मार्गदर्शक हमें जीवन के महत्वपूर्ण सबक समझा रहा हो।
✨ निष्कर्ष
यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है जो अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे दिग्गजों के विचार इसे पढ़ने योग्य ही नहीं, बल्कि बार-बार पढ़ने योग्य बनाते हैंयह पुस्तक रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे सफल दिग्गजों के प्रेरक विचारों का संग्रह है। यह जोखिम उठाने, निरंतर सीखने और बड़े लक्ष्य निर्धारित कर सफलता पाने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है।

किताब का लिंक कमेंट बॉक्स में..https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu

rajukumarchaudhary502010

খোকা ও কাঠবিড়ালি।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)

কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি!
তুমি কি বাগানের মালি?
সকাল থেকে সন্ধ্যে,
ছুটে বেড়াও বাগানে।

পড়াশুনা না করে,
বেড়াও ঘুরে ঘুরে।
বকে না কেউ তোমায়—
বাবা-মা কিংবা কাকাই।
কি হলো, মুখ ঘুরিয়ে!
যাচ্ছো কোথায় পালিয়ে?

আরে, আরে, কাঠবিড়ালি!
গায়ে মেখে ধুলি,
চললে কোথায় শুনি!
ওরে দুষ্টু কাঠবিড়ালি!
আমায় দেখে পালাচ্ছো বুঝি?

আমার বন্ধু টিয়ে–
বাগানে যখন আসে,
তখন তুমি না পালিয়ে–
খেলা করো তার সাথে।
আমার পোষা ময়না,
তাকে দেখেও যাও না।
তবে, আমি কেন এলে
তুমি সব কাজ ফেলে,
ছুটে গিয়ে গাছে চড়ে
আমায় দেখো বারে বারে?

কি করছো? বসে গাছে।
এসো আমার কাছে।
খেলা করব দুজনে
ফুলে-ফলে ভরা বাগানে।

করো না আর চালাকি!
নিচে নেমে এসো এক্ষুনি!
শুনতে কি পাও নি?
তুমি কানে কালা নাকি?

ভালো কথা যায় না কানে,
যতই মরি চেচিয়ে।
বিচুতি পাতা তুলে এনে,
গায়ে দেব লাগিয়ে।
নিজেকে মালি ভেবে,
খুব তো করছো বড়াই
দেখবে এক্ষুনি, লাগিয়ে দেব,
কাকার সাথে লড়াই।
মাথা ভরা গোবর তোমার
ঘুঁটে হচ্ছে শুকিয়ে;
দেখবে এক্ষুনি, গায়ে তোমার
পেনের কালি দেবো ছিটিয়ে।

কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি,
বাগানের হয়েছ মালি?
বল দেখি কোন মাসে
কাশ ফুল ফোটে?
বল দেখি কোন মাসে
‌‌ আউশ ধান উঠে?
বল দেখি কোন ফুল
পাকে জন্মায়?
পত্র কেন সবুজ হয়?
জবা কেন লাল?
বল দেখি ভেবে আমায়
এসব কেন হয়?

ভাব দেখাও ষোলো আনা!
এসব কি আছে জানা?
ওরে দুষ্টু কাঠবিড়ালি!
না জেনেই হয়েছ মালি।
বাগানের করে ফল চুরি
পেট করেছো ভারি।

উত্তর না দিয়ে,
যাচ্ছ কোথায় সরে?
নিয়ে যাবো দাদুর কাছে,
লেজটি তোমার ধরে।

jeeeneet812690

চললো খোকা।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)

খোকা যাবে মামার বাড়ি,
হাতে নিয়ে মিষ্টির হাঁড়ি।
মুখে তার মিষ্টি হাসি —
যাবে খোকা মামার বাড়ি!

মামার বাড়ি যাবে খোকা,
সঙ্গে যাবে কুকুর ছানা।
পথ দেখাবে পোষা ময়না,
মামাবাড়িতে প্রচুর মজা।

jeeeneet812690

স্বপ্নময় সমাজ ২।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)

আমাদের দেশে
কবে আসবে সে আসার সমাজ,
যেখানে মানুষ মানুষকে দেবে হৃদয়ের সাজ?
বিপদকালে থাকবে না কেউ একা,
সহমর্মিতায় গড়া হবে নতুন এক রেখা।
ভয় নয়, মায়াই হবে মানুষের মূল,
মন হবে স্বচ্ছ—থাকবে না কোনো ভুল।
না থাকবে হিংসা, না কোনো ঝগড়া,
বদলার পরিবর্তে আসবে ভালোবাসার ধারা।
দোষ করলে শাস্তি নয়—আগে আসবে শিক্ষা,
ভালোবাসার পাঠই হবে মানবতার দীক্ষা।
কথা নয়, মানুষকে চিনবে তার কাজে,
পরিচয় মিলবে কর্মেরই সাজে।
সেই সমাজে সব কাজই পাবে সমান মান,
ছোট-বড় ভেদ ভুলে দেবে হৃদয় দান।
যোগ্য হলে কেউ পাবে না সমালোচনার ভাষা—
প্রশংসাই হবে নিয়ম, ভালোবাসাই ভরসা।
মনুষ্যত্বের গড়া সেই সমাজ হবে এই আমার আশা।

jeeeneet812690

মা, আমি হব।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)

মা, আমি হব —
আদর্শ ছেলে।
সকালে ঘুম থেকে উঠব
আমি সবার আগে,
নিজের সব কাজ, করব নিজে —
হাসিমুখে, শান্তভাবে।
তুমি যা বলবে,
পালন করব অক্ষরে অক্ষরে।

করব না বায়না,
করব না দুষ্টামি,
গুরুজনদের দেব
শ্রদ্ধা, সম্মান আমি।
অপমান হয় তোমার —
এমন কাজ নাহি করব।

পড়ব আমি মন দিয়ে
সারাটি দিন,
বড়ো হয়ে গড়ব ঘর
তোমার জন্য একদিন।
আর কিনব একখানি গাড়ি —
মাগো, গাড়ি চেপে
দেব আমরা দিগন্তে পাড়ি।

jeeeneet812690

মা, আমি হব।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)

মা, আমি হব —
আদর্শ ছেলে।
সকালে ঘুম থেকে উঠব
আমি সবার আগে,
নিজের সব কাজ, করব নিজে —
হাসিমুখে, শান্তভাবে।
তুমি যা বলবে,
পালন করব অক্ষরে অক্ষরে।

করব না বায়না,
করব না দুষ্টামি,
গুরুজনদের দেব
শ্রদ্ধা, সম্মান আমি।
অপমান হয় তোমার —
এমন কাজ নাহি করব।

পড়ব আমি মন দিয়ে
সারাটি দিন,
বড়ো হয়ে গড়ব ঘর
তোমার জন্য একদিন।
আর কিনব একখানি গাড়ি —
মাগো, গাড়ি চেপে
দেব আমরা দিগন্তে পাড়ি।

jeeeneet812690

হাবু ও ডাক্তারবাবু।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)

বিকেল থেকে হাবু,
পেটের যন্ত্রনায় বেজায় কাবু!
তাই গেলেন ডাক্তারখানা –
বললেন, “ডাক্তার বাবু,
কিছু করে সারান পেটের যন্ত্রণা!
বাঁচান আমায়, ডাক্তার বাবু”

“আজ-কাল কি খেয়েছিলে,
তা বলো দেখি, হাবু?”
“নেমন্তন্ন করেছিল কালকে –
আমাদের পাড়ার ভজা দাদু!
খেয়েছিলাম সেখানে –
ভাত-ডাল, দই-মিষ্টি-গজা!
খেতে লাগছিল কালকে ভীষণ মজা!”

“আজ সকালে বৃষ্টি হচ্ছিল রিমঝিম,
তাই খেয়েছিলাম খিচুড়ি আর
কালকের ভাজা ডিম।”

শুনে ডাক্তার বললেন ভেবে,
“তোমার চোখ দেখি আগে,
তারপর হবে পেটে!”

শুনে হাবু বেজায় কাবু,
বলল করুন সুরে,
“যন্ত্রণা হচ্ছে আমার পেটে –
তাহলে ডাক্তার, চোখ দেখো কেমনে?”

বললেন ডাক্তার রেগে,
“কালকের ভাজা ডিম দেখেও
কেমন করে তুমি খেলে –
সেটা বলো দেখি আগে!”

“যদি চাও সুস্থ থাকতে,
খাবার খাও বিবেচনা করে।
ভাত-ডাল, দই-মিষ্টি-গজা –
যতই খেতে লাগুক মজা!
খাওয়া যাবে না বেশি বেশি,
খেলে হবে শরীরের ক্ষতি।”

jeeeneet812690

বাগানের মালি কাঠবিড়ালি।
লেখক:– সোহন ঘোষ।

কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি,
তুমি কি বাগানের মালি?
সারা বাগান ঘুরে বেড়াও,
ইঁদুর এলে তেড়ে যাও।
আমি এলে কেন পালাও?
তুমি কি আমাকে ভয় পাও?
কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি।
তুমি কি বাগানের মালি?

jeeeneet812690

হাবুর শ্যালক।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)

চোখ খুলে, দেখো হাবু,
আমি তোমার শালাবাবু।
এলাম কি করে—
তা বলবো পরে।

পেয়েছে ভীষণ খিদে,
খেতে দাও আগে।
ঘরে আছে যত খাবার—
তাই দিয়েই করি আহার।

তুমি বাপু যাও বাজারে,
দই–গজা, মুড়কি–চিঁড়ে,
মাছ–মাংসও থলি ভরে।
ঝটপট আসবে নিয়ে‌,
খাব আজ পেট পুরে—
হাতের কব্জি ডুবিয়ে।

সঙ্গে যদি না থাকে মাছ ভাজা,
খেতে লাগে না মজা।
তাই পটল, বেগুন আর শিম ভাজা,
না পেলে দেবো তোমায় ভীষণ সাজা।

তারপর এসো নিয়ে গোবিন্দভোগ চাল,
সঙ্গে যেন থাকে মাংস আর মুগের ডাল।
আর চাই ঝিঙে–আলু–পোস্ত,
যেটা বাবা খেতে ভালোবাসতো।

সবার শেষে দেবে
দই, মিষ্টি, চাটুনি।
খেয়ে বলব, ভেবে—
তুমি কেমন রাঁধুনি?

jeeeneet812690

कब तक लेती रहोगी ज़िंदगी
यूँ ही मेरा तुम इम्तेहान
बख्श भी दो मुझको अब तो
क्यों करती हो मुझको परेशान

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

Sunday quotes..

kattupayas.101947

🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

sonishakya18273gmail.com308865

✤┈SuNo ┤_★_🦋
ज़ख्मी, हकीकत लिखने बैठे तो
कागज़ जलने लगते हैं,

मेरे लहजे की शिद्दत से, मुकद्दर
            ढलने लगते हैं,

तुम्हें आता है हुनर, सिर्फ दिलों
        पर नाम लिखने का,?

मगर जब मैं तंज़  करता हूँ, तो
    पत्थर पिघलने लगते हैं,

मेरे  लफ़्ज़ों में वो ज़हर है, जो
        रूह को भी काट दे,

सुनें जब चीख मेरी कलम की
   तो मंज़र बदलने लगते हैं,

गया वो वक़्त, जब शायर सिर्फ
          ख़्वाब बुनते थे,

ज़ख्मी के महफ़िल में तो, अब
मुर्दा जमीर भी चलने लगते हैं,

संभल  कर तू  भी  रहना, ऐ
मोहब्बत पर लिखने वाले,

वरना मैं वो हूँ, जिसके ज़िक्र से
अफ़साने जलने लगते हैं…🔥
╭─❀🥺⊰╯ 
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
#LoVeAaShiQ_SinGh 😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪   
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥

loveguruaashiq.661810

कभी रिश्ते सिर्फ़ नाम के होते हैं,
लेकिन कुछ लोग… नाम के पीछे छिपी एक पूरी दुनिया को भी पहचान लेते हैं।
रागिनी अब सिर्फ आरव की बीवी नहीं थी —
वो अब खुद की पहचान की लड़ाई में उतर चुकी थी।"



रागिनी अपने पुराने दोस्तों से मिलती है

दोस्त:
रागिनी! तू तो एकदम बदल गई है।

रागिनी (मुस्कुराकर):
हाँ… अब मैं सिर्फ किसी की पत्नी नहीं,
खुद की कहानी भी हूँ।

दोस्त:
अब क्या करने का सोच रही है?

रागिनी:
एक NGO शुरू करूँगी — उन औरतों के लिए,
जिन्होंने अपनी आवाज खो दी है, जैसे मैंने खोई थी।



बॉस:
तुम्हारी वाइफ का NGO मीडिया में काफी वायरल हो रहा है।

आरव (हैरान):
क्या? उसने मुझे बताया भी नहीं…

(खुद से बड़बड़ाता है):
रागिनी… तुम मुझसे इतनी दूर कब हो गई?


आरव:
तुमने इतना बड़ा कदम अकेले क्यों उठाया?

रागिनी (शांत लेकिन दृढ़):
क्योंकि जब मैंने तुम्हारे साथ चलना चाहा,
तुमने मुझे पीछे छोड़ दिया था।

आरव:
मैं… शायद तुम्हें समझ नहीं पाया।

रागिनी:
अब समझना नहीं, साथ चलना सीखो।

"जब औरत अपने डर से बाहर निकलती है,
तब वो सिर्फ एक साथी नहीं रहती —
वो खुद की दुनिया बन जाती है।"

rajukumarchaudhary502010

कभी रिश्ते सिर्फ़ नाम के होते हैं,
लेकिन कुछ लोग… नाम के पीछे छिपी एक पूरी दुनिया को भी पहचान लेते हैं।
रागिनी अब सिर्फ आरव की बीवी नहीं थी —
वो अब खुद की पहचान की लड़ाई में उतर चुकी थी।"



रागिनी अपने पुराने दोस्तों से मिलती है

दोस्त:
रागिनी! तू तो एकदम बदल गई है।

रागिनी (मुस्कुराकर):
हाँ… अब मैं सिर्फ किसी की पत्नी नहीं,
खुद की कहानी भी हूँ।

दोस्त:
अब क्या करने का सोच रही है?

रागिनी:
एक NGO शुरू करूँगी — उन औरतों के लिए,
जिन्होंने अपनी आवाज खो दी है, जैसे मैंने खोई थी।



बॉस:
तुम्हारी वाइफ का NGO मीडिया में काफी वायरल हो रहा है।

आरव (हैरान):
क्या? उसने मुझे बताया भी नहीं…

(खुद से बड़बड़ाता है):
रागिनी… तुम मुझसे इतनी दूर कब हो गई?


आरव:
तुमने इतना बड़ा कदम अकेले क्यों उठाया?

रागिनी (शांत लेकिन दृढ़):
क्योंकि जब मैंने तुम्हारे साथ चलना चाहा,
तुमने मुझे पीछे छोड़ दिया था।

आरव:
मैं… शायद तुम्हें समझ नहीं पाया।

रागिनी:
अब समझना नहीं, साथ चलना सीखो।

"जब औरत अपने डर से बाहर निकलती है,
तब वो सिर्फ एक साथी नहीं रहती —
वो खुद की दुनिया बन जाती है।"

rajukumarchaudhary502010

मैंने वो लाल टॉफी खाई और मेरा भविष्य मिट गया! #समय#जिंदगी#प्रेरककहानी
https://youtu.be/WKvT6FBM20Y?si=yIcxantQkcRBLpcz

surajprakash.857127

परिश्रम का alarm रोज बजता है,
उसे इतवार की छुट्टी नहीं होती ।

इसलिए फालतु लोगों से दूर रहो
न उनको पोस्ट पर भी आने दो

ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए
ये मतलबी होते है

किसी एक के कभी नहीं हो सकते
50 जगह मुंह मारने की आदत होती हैं

anisroshan324329