तस्वीरें बोलती हैं, बस सुनने वाला चाहिए,
सुकून यहीं कहीं है, बस ठहरने का बहाना चाहिए।
न जाने कौन सी दौलत है इन छोटी चीज़ों में,
हज़ार खुशियाँ वार दूँ, सादगी के इन लम्हों में।
✨️धूप, यादें और ये गुलाबी सर्दी✨️
सर्दियों की वो नर्म धूप जब आंगन में उतरती है, तो अपने साथ ढेर सारी पुरानी यादें और एक अजीब सा सुकून लेकर आती है। आज की भागती-दौड़ती दुनिया में, जहाँ हम घड़ी की सुइयों के गुलाम बन चुके हैं, ये तस्वीरें हमें 'Slow Life' यानी ठहरकर जीने का सलीका सिखाती हैं।
सर्दियों का असली मज़ा किसी बड़े मॉल या शोर-शराबे में नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी चीज़ों में है जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। सिल-बट्टे पर पिसती चटनी की वो सोंधी महक, अंगीठी की गर्माहट में सुखाए गए ऊनी कपड़े, और हाथ में चाय का वो गर्म प्याला जिसकी भाप में शायद हमारी आधी थकान उड़ जाती है।
Slow Life का जादू... पेड़ की ऊँची टहनियों में फंसी वो लाल पतंग शायद हम सबकी बचपन की उन ख्वाहिशों जैसी है, जो कहीं पीछे छूट गई हैं। पर आज भी, जब हम ठहर कर उसे देखते हैं, तो वो बचपन फिर से ज़िंदा हो जाता है।
ज़िंदगी बस यही है—धीमी आंच पर पकती हुई चाय, दरवाज़े पर बैठी एक शांत बिल्ली और अपनों के हाथों से मिलती हुई खुशियाँ। चलिए, इस सर्दी थोड़ा कम भागते हैं और थोड़ा ज़्यादा महसूस करते हैं।