CHIRANJIT TEWARY Books | Novel | Stories download free pdf

तेरे मेरे दरमियान - 108

by CHIRANJIT TEWARY
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अनय :- अरे शमिका ये तुमसे झुट बोला है , ये मेरे कंपनी का मामुली सा एम्पलाई है , ...

तेरे मेरे दरमियान - 107

by CHIRANJIT TEWARY
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उसकी आँखों से आँसू लगातार बहने लगते हैं। उधर आदित्य भी जानवी को देखकर कुछ पल के लिए खो ...

तेरे मेरे दरमियान - 106

by CHIRANJIT TEWARY
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उसकी आँखें नम हो जाती हैं और फिर आदित्य अपने आंखे चुराते हूए कहता है --आदित्य (धीरे): - बस… ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 78

by CHIRANJIT TEWARY
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निलु के इतना कहने पर गाड़ी अपने आप रुक जाती है। गाड़ी रुकने के बाद निलु गुस्से से कहता ...

तेरे मेरे दरमियान - 105

by CHIRANJIT TEWARY
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शमिका मोनिका के कंधे पर हाथ रखकर कहती है --शमिका :- मोनिका .. विकी ने तुम्हें और मुझे , ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 77

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश की बात का सत्यजीत जवाब देकर कहता है। अरे बैटा छोड़ो ना क्या तुम भी उसी बात पर ...

तेरे मेरे दरमियान - 104

by CHIRANJIT TEWARY
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इस बार शमिका तुरंत भरोसा नहीं करती क्योंकी उसने सुबह विकी के फोन पर वो रिपोर्ट बदलने वाली मेसेज ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 76

by CHIRANJIT TEWARY
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सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है।> गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो ...

तेरे मेरे दरमियान - 103

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी की बात को सुनकर शमिका कहती है --शमिका: - हां जानवी ... क्यों नही , तुम दोनो एक ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 75

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश वर्शाली की हाथ को पकड़कर अपने कंधे पर रख देता है।और कहता है।> ये भी तो तुम्हारा ही ...