यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्यापरिमाग्ने दुश्चरिताद बयजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप ह#में दुष्ट आचरण से बचाएँ।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) ...
यजुर्वेद सूक्ति (4) की व्याख्यामा भेर्मा संविक्था अऊर्ज धतस्व"यजुर्वेद --6/35 भावार्थ --मत डर। मत घबरा। धैर्य धारण कर। इसका ...
यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्यापरिमाग्ने दुश्चरिताद बाधस्व"यजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप हमें दुष्ट आचरण से बचाएँ।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) ...
यजुर्वेद सूक्ति (2) की व्याख्या"तनूपा अग्निःपातु दुरितादलद्यात"यजुर्वेद--4/15ईश्वर हमें यह मंत्र यजुर्वेद 4.15 का अंश है। इसका भाव अत्यंत प्रेरणादायक ...
यजुर्वेद सूक्ति~(1) की व्याख्या"त्रयम्बकं यजामहे"त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्"यजुर्वेद --3/60भावार्थ --हम तीन नेत्रों वाले भगवान् शिव की उपासना करते ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (१५) की व्याख्यातवेद्धि सख्यम् स्तृतम्। १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है।पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या" भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ-- हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या"ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और सत्य ही (जगत का) आधार है।आपने जो मंत्र दिया ...
ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या"कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जागने ...
ऋगुवेद सूक्ति--(35) की व्याख्या"स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भाव--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् ...