GANESH TEWARI 'NESH' (NASH) Books | Novel | Stories download free pdf

अभय दान

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 162

यजुर्वेद सूक्ति (6) की व्याख्या"मा अघशंसः°यजुर्वेद-- 1/1हे ईश्वर! दुष्ट मेरा अहगत न करें। पूरा मंत्र अर्थ सहितआपके द्वारा उद्धृत ...

ऊर्जा त्बा

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 319

यजुर्वेद सूक्ति (5) की व्याख्या"इषे त्वा ऊर्जे त्वा"यजुर्वेद --1/1भावार्थ =-जीवन समृद्ध और शक्तिशाली बने। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद ...

परिमाग्ने

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 576

यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्यापरिमाग्ने दुश्चरिताद बयजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप ह#में दुष्ट आचरण से बचाएँ।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) ...

मा भैर्मा

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 618

यजुर्वेद सूक्ति (4) की व्याख्यामा भेर्मा संविक्था अऊर्ज धतस्व"यजुर्वेद --6/35 भावार्थ --मत डर। मत घबरा। धैर्य धारण कर। इसका ...

सदाचार

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • (5/5)
  • 957

यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्यापरिमाग्ने दुश्चरिताद बाधस्व"यजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप हमें दुष्ट आचरण से बचाएँ।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) ...

धर्म में पवित्रता

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 834

यजुर्वेद सूक्ति (2) की व्याख्या"तनूपा अग्निःपातु दुरितादलद्यात"यजुर्वेद--4/15ईश्वर हमें यह मंत्र यजुर्वेद 4.15 का अंश है। इसका भाव अत्यंत प्रेरणादायक ...

त्रयम्बकं यजामहे

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 1.1k

यजुर्वेद सूक्ति~(1) की व्याख्या"त्रयम्बकं यजामहे"त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्"यजुर्वेद --3/60भावार्थ --हम तीन नेत्रों वाले भगवान् शिव की उपासना करते ...

योग क्षेमं वहाम्यहम्

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 1.2k

ऋगुवेद सूक्ति-- (१५) की व्याख्यातवेद्धि सख्यम् स्तृतम्। १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है।पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव ...

देव मार्ग

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • 1.5k

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या" भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ-- हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ...

ऋतं च सत्यं च

by GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
  • (4.9/5)
  • 1.4k

ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या"ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और सत्य ही (जगत का) आधार है।आपने जो मंत्र दिया ...