बिल्ली जो इंसान बनती थी

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Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात होते ही सन्नाटा उसकी छाती पर बैठ जाता। फोन में न कोई मैसेज, न किसी की कॉल। बस दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक। उस दिन भी ऑफिस से लौटते हुए उसने खुद से कहा — अब और नहीं… मुझे कोई चाहिए।

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 1

Heroine: शानवी सिंहHero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान)शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था।बड़े शहर में छोटी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात होते ही सन्नाटा उसकी छाती पर बैठ जाता।फोन में न कोई मैसेज, न किसी की कॉल। बस दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक।उस दिन भी ऑफिस से लौटते हुए उसने खुद से कहा —अब और नहीं… मुझे कोई चाहिए।और उसी शाम, वो एक बिल्ली ले आई। एक सफेद सा, बहुत मासूम सा बिल्ली का बच्चा। उसकी आंखें अजीब सी गहरी थीं… जैसे कुछ कहना चाहती हों। वो बहुत प्यासा ...Read More

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 2

कमरे में अंधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। शानवी खाना बनाकर टीवी के सामने बैठ गई। उसका बिल्ला… यानी कार्तिकेय…चुपचाप कोने में बैठा उसे देख रहा था। वो घड़ी की तरफ देखता।बार-बार।⏰ 10:30… 11:15… 11:50…उसके दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी।कार्तिकेय बोला -बस थोड़ा सा और…फिर मैं खुद नहीं रहूँगा…फिर मैं वो बन जाऊँगा… जो मैं असल में हूँ…।वो मन ही मन सोच रहा था —कितना अजीब है…दिन में मैं उसके पैरों के पास घूमता हूँ,और रात में… उसी के पास बैठकर उसे देख भी नहीं सकता…।शानवी सोने की तैयारी करने लगी। उसने लाइट बंद की और बिस्तर ...Read More