अंधेरा... सिर्फ घना अंधेरा और चारों तरफ खून की गंध। यह एक विशाल साम्राज्य की कालकोठरी, जहाँ की दीवारों पर कभी सोने की नक्काशी होती थी, आज वहां सिर्फ लोहे की जंजीरों की खनखनाहट थी। वह सम्राट, जिसके एक इशारे पर लाखों तलवारें उठ जाती थीं, आज मजबूत जंजीरों ने हाथों को जकड़ा हुआ था। उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने अपनी शक्ति से ज्यादा अपने परिवार के भाइयों पर भरोसा किया। उसके भाइयों ने उसकी दयालुता को कमजोरी समझा और सत्ता के लालच में उसे धोखा दिया। सम्राट और महारानी को राजकुमार के आंखों के सामने तड़पाया जा रहा था। लेकिन सबसे भयानक दृश्य तो कुछ और ही था।
लाल पत्थर का राज - भाग 1
वह अजीब निशान और सुबह का हंगामाप्रस्तावना: वह खूनी रात (सपना)अंधेरा... सिर्फ घना अंधेरा और चारों तरफ खून की एक विशाल साम्राज्य की कालकोठरी, जहाँ की दीवारों पर कभी सोने की नक्काशी होती थी, आज वहां सिर्फ लोहे की जंजीरों की खनखनाहट थी। वह सम्राट, जिसके एक इशारे पर लाखों तलवारें उठ जाती थीं, आज मजबूत जंजीरों ने हाथों को जकड़ा हुआ था। उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने अपनी शक्ति से ज्यादा अपने परिवार के भाइयों पर भरोसा किया। उसके भाइयों ने उसकी दयालुता को कमजोरी समझा और सत्ता के लालच में उसे धोखा दिया।सम्राट और महारानी ...Read More
लाल पत्थर का राज - भाग 2
बाहर काव्या अपनी स्कूटी के पास खड़ी होकर बार-बार हॉर्न की कर्कश आवाज़ निकाल रही थी। उसकी आवाज़ में धमकी थी जब उसने चिल्लाकर कहा, "विराज! अब अगर तुम एक मिनट में बाहर नहीं आए, तो मैं खुद अंदर आ रही हूँ!"अंदर, विराज अपने कमरे की खिड़की से बाहर का नज़ारा देख रहा था। उसने हताशा में अपने माथे पर हाथ मारा। उसने मन ही मन सोचा, 'आज तो यह मेरे दिमाग का दही कर देगी। अगर इसके साथ कॉलेज गया, तो पूरे रास्ते इसका भाषण सुनना पड़ेगा और ऊपर से सब दोस्त फिर मज़ाक उड़ाएंगे।'उसने दबे पाँव अपने ...Read More