रूहों का सौदा

(1)
  • 78
  • 0
  • 201

रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस शांति के पीछे एक भयानक तूफान छिपा था। एक रहस्यमयी परछाईं और एक खौफनाक चेतावनी— 'महागुरु ही तुम्हारे विनाश का द्वार हैं!' क्या रुद्र अपने रक्षक पर भरोसा कर पाएगा? क्या 'रक्त-शिला' के जागने का अर्थ पूरे गुरुकुल का अंत है?"​अध्याय 1  रुद्र का समर्पण और क्रोध का शमन​तलवारों की खनखनाहट और लौरा की चीखें पूरे गलियारे में गूँज रही थीं।

1

रूहों का सौदा - 1

रूहों का सौदाक्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस शांति के पीछे एक भयानक तूफान छिपा था। एक रहस्यमयी परछाईं और एक खौफनाक चेतावनी— 'महागुरु ही तुम्हारे विनाश का द्वार हैं!' क्या रुद्र अपने रक्षक पर भरोसा कर पाएगा? क्या 'रक्त-शिला' के जागने का अर्थ पूरे गुरुकुल का अंत है? ​अध्याय 1 रुद्र का समर्पण और क्रोध का शमन​तलवारों की खनखनाहट और लौरा की चीखें पूरे गलियारे में गूँज रही थीं। लौरा के ...Read More

2

रूहों का सौदा - 2

नियति का रक्त-अभिषेक और महाप्रस्थानकहते हैं कि विनाश से ठीक पहले की खामोशी सबसे डरावनी होती है, लेकिन गुरुकुल उस रात खामोशी ने आवाज़ दी थी। दीवार पर उभरी वह काली और रहस्यमयी आकृति जब धुंध में विलीन हुई, तो वह अकेले नहीं गई; वह अपने पीछे एक ऐसा ठंडा अहसास छोड़ गई जैसे मौत ने कमरे में कदम रख दिया हो। रुद्र के हाथ की नीली लकीरें अब महज़ निशान नहीं थे, वे उसकी त्वचा के नीचे किसी कैद नाग की तरह छटपटा रहे थे।​दीवार पर उभरी वह काली और रहस्यमयी आकृति धीरे-धीरे धुंध में विलीन होने लगी, ...Read More