खामोशी का इकरार

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मेरा नाम आरव मल्होत्रा है, और मैं झूठ बोलने में माहिर हूँ। लेकिन जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो सच है। हर एक शब्द। हर एक पल। क्योंकि कुछ सच इतने भयानक होते हैं कि उन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। मुंबई की उस बरसाती रात को जब मैंने पहली बार मायरा को देखा था, मुझे नहीं पता था कि मेरी ज़िंदगी एक ऐसे भंवर में फंसने वाली है जिससे मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊँगा। वो एक आर्ट गैलरी में खड़ी थी, काली साड़ी में, एक पेंटिंग के सामने इतनी तन्मयता से देख रही थी मानो वो तस्वीर उससे कुछ कह रही हो। उसके लंबे काले बाल उसकी पीठ पर लहरा रहे थे, और जब उसने मुड़कर मुझे देखा, तो मुझे लगा जैसे समय रुक गया हो।

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खामोशी का इकरार - CH-1 - वो आखिरी रात

मेरा नाम आरव मल्होत्रा है, और मैं झूठ बोलने में माहिर हूँ। लेकिन जो कहानी मैं आपको सुनाने जा हूँ, वो सच है। हर एक शब्द। हर एक पल। क्योंकि कुछ सच इतने भयानक होते हैं कि उन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। मुंबई की उस बरसाती रात को जब मैंने पहली बार मायरा को देखा था, मुझे नहीं पता था कि मेरी ज़िंदगी एक ऐसे भंवर में फंसने वाली है जिससे मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊँगा। वो एक आर्ट गैलरी में खड़ी थी, काली साड़ी में, एक पेंटिंग के सामने इतनी तन्मयता से देख रही थी मानो वो ...Read More

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खामोशी का इकरार - CH-2 - कैद

छह महीने बाद हरिद्वार सेंट्रल जेल की दीवारें सफेद हैं, लेकिन मुझे हमेशा लगता है कि वो खून के से सनी हुई हैं। शायद ये मेरे दिमाग का खेल है। या शायद ये सच है, और इन दीवारों ने इतने अपराधियों को देखा है कि उनकी यादें यहाँ चिपक गई हैं। मैं यहाँ पिछले छह महीने से हूँ। हत्या के आरोप में। विक्रांत सिन्हा की हत्या। मायरा गायब है। उस रात जब पुलिस आई थी, वो धुएँ की तरह हवा में घुल गई थी। मैं वहाँ खड़ा था, उसकी दी हुई डायरी हाथ में, और कोई सफाई नहीं थी। ...Read More