शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर” [दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या] लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है। पुल के नीचे झुग्गियाँ हैं। अर्जुन ऊँची इमारत की छत पर खड़ा है। उसकी पीठ पर काले, अस्थि-जैसे पंख सिमटे हुए हैं। नीचे भीड़ में अफ़रा-तफ़री है। अर्जुन (स्वगत):

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Vulture - 1

शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानविशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर”[दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या]लाल सूरज डूब है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है। पुल के नीचे झुग्गियाँ हैं। अर्जुन ऊँची इमारत की छत पर खड़ा है। उसकी पीठ पर काले, अस्थि-जैसे पंख सिमटे हुए हैं। नीचे भीड़ में अफ़रा-तफ़री है।अर्जुन (स्वगत):“जिस शहर ने मुझे कूड़े की तरह फेंका… आज उसी शहर की साँसें मेरी पीठ पर टिकी हैं।”दूर क्षितिज पर एक कारख़ाने की चिमनियों से काला धुआँ उठता है।[दृश्य 2 – कारख़ाना परिसर, रात्रि]लोहे के विशाल द्वार खुलते हैं। अंदर लाल रोशनी ...Read More

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शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 2 (बैकस्टोरी): “रक्तपंख का जन्म”[दृश्य 1 – महानगर का पिछड़ा इलाका, प्रातः]टूटी-फूटी झुग्गियाँ। की दुर्गंध। धूप में बच्चे पानी की टूटी बाल्टी के चारों ओर खेल रहे हैं। अर्जुन किशोर अवस्था में है, कबाड़ बीनते हुए घर लौटता है। उसकी माँ बीमार चारपाई पर लेटी है।माँ (कमज़ोर स्वर में):“बेटा… आज दवा ले आया?”अर्जुन (मुस्कराकर):“आज ज़रूर ले आऊँगा, माँ। कल से हालात बदलेंगे।”वह बाहर निकलता है। आँखों में उम्मीद है।[दृश्य 2 – कारख़ाना मालिक का धोखा]पुराने कारख़ाने में मज़दूरों की भीड़। मालिक मजदूरी देने से मना कर देता है।अर्जुन के हाथ में पसीने से ...Read More

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Vulture - 3

शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 3: “राख से उठता शहर”[दृश्य 1 – युद्ध के बाद की सुबह]जली हुई टूटी सड़कें, धुएँ के बादल। दमकल की गाड़ियाँ अभी भी पानी छिड़क रही हैं। लोग मलबे में अपने अपनों को ढूँढ रहे हैं। अर्जुन एक ऊँची छत पर खड़ा शहर को देख रहा है। उसके पंख थके हुए सिमटे हैं।अर्जुन (स्वगत):“नरकवीर गिर गया… पर यह शहर अब भी ज़ख़्मी है।शत्रु को हराना आसान है… विनाश को भरना कठिन।”नीचे एक बच्चा जली हुई दुकान के सामने रो रहा है। अर्जुन की आँखें नम हो जाती हैं।[दृश्य 2 – शून्य का जन्म]अंधेरी ...Read More