वो आखिरी मुलाकात

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बारिश की बूंदें खिड़की पर टकरा रही थीं, जैसे कोई पुरानी यादें दरवाजे पर दस्तक दे रही हों। आराध्या ने कॉफी का कप हाथ में लिया और बालकनी की ओर देखा। आज ठीक तीन साल पहले इसी बारिश में वो मिले थे—अविनाश। "तुम कभी नहीं बदलोगे, आराध्या," उसकी आवाज आज भी कानों में गूंजती है। लेकिन आज वो यहां नहीं था। वो चला गया था, बिना कोई वजह बताए। फोन की स्क्रीन पर एक मैसेज ब्लिंक कर रहा था—

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वो आखिरी मुलाकात - 1

बारिश की बूंदें खिड़की पर टकरा रही थीं, जैसे कोई पुरानी यादें दरवाजे पर दस्तक दे रही हों। आराध्या कॉफी का कप हाथ में लिया और बालकनी की ओर देखा। आज ठीक तीन साल पहले इसी बारिश में वो मिले थे—अविनाश।"तुम कभी नहीं बदलोगे, आराध्या," उसकी आवाज आज भी कानों में गूंजती है। लेकिन आज वो यहां नहीं था। वो चला गया था, बिना कोई वजह बताए।फोन की स्क्रीन पर एक मैसेज ब्लिंक कर रहा था—"मैं वापस आ रहा हूं। आज रात 8 बजे पुराने कैफे में। बस एक बार मिल लो। - अविनाश"आराध्या का दिल धड़क उठा। क्या ...Read More