" एकांश जी वो देखिये मेले के बिच में वो सुखा पेड़ दिख रहा है। सभी उसी पेड़ को देखने लगता है पर कुछ दिखाई नहीं देता। आलोक कहता है--->" पर वहाँ तो कुछ दिखाई नहीं देता। वर्शाली कहती हैं--->" ध्यान से देखीए एकांश जी पेड़ के उस सुखी टहनी पर जो सिधे ऊपर की और गई है। उसी पर देखीए कुम्भन की आंखें दिखाई देगी आपको। जो उस पैड़ पर">