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    विक्की :- और नही तो क्या , तुम्हारी औकात ही क्या है , तुमने यो सोचा भी कैसे के त...

  • पत्थर कि प्रेम

    घर के सबसे ज्यादा खालीपन अगर कहीं था, तो वह मेरे ताऊजी की आँखों में था। पिताजी क...

  • Behad Junooniyat

    "प्लीज़ मुझे जाने दो। मुझे तुमसे शादी नहीं करनी। मेरे भी कुछ सपने हैं!" पंखुड़ी...

  • रॉ एजेंट सीजन 1 - 14

    शुक्रवार का दिन था , तीनो गार्ड अपनी अपनी जगह पर तैनात थे , हमीद अंसारी धीरे कदम...

  • बड़े दिल वाला - भाग - 10

    अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या और वीर रात भर मोबाइल पर अपने मिलन के सपने बुनते रहे, ल...

  • त्रिशा... - 30

    "क्या कहा रे तूने???????? अब तू मुझे बताएगी कि  मुझे क्या बोलना है और क्या नहीं...

  • हम फिर भी मिलेंगे

                                                                                   ...

  • वाराणसी शहर की महिमा

    वाराणसी शहर की महिमा (कहानी – लगभग 1500 शब्द)  प्रस्तावनागंगा के तट पर बसा वाराण...

  • मेरे दूल्हे को मरना होगा - अध्याय 1: निर्वस्त्र

    घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। श...

  • वाशिकारिणी - 5

    आईना जो सच नहीं दिखाताशक्ति की चीख किले की दीवारों से टकराकर लौट आई…लेकिन उसकी आ...

नक़ल या अक्ल By Swati Grover

शाम का समय है, सूरज डूबने के लिए तैयार प्रतीत हो रहा है, उत्तरप्रदेश के मालपुरा गॉंव में खेतों की मुँडेर पर किशन और सोमेश बैठे हैं । किशन तो आराम से ढलते सूरज की तरफ देख रहा है तो...

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सर्विस पॉर्ट By Lalit Kishor Aka Shitiz

एक सूने से हॉल में दो कमरे हैं । उनके सामने की तरफ दीवार पर घड़ी लगी हुई है, जिसमे छोटी सुई दस पर और बड़ी सुई तीन पर है। हॉल के एक कोने में एक बेंच है जिस पर चार लड़के फॉर्मल पेंट शर...

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सुरासुर By Sorry zone

रात्रि के अंधकार में सुनसानी सड़क पर कंधे लटकाए हाथ झुलाए कर्ण आहिस्ता-आहिस्ता चल रहा है। 'राजू नाई' के दूकान को पार कर वो अपने कदमों को विराम देता है तथा सिर ऊपर की ओर उठा...

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रावी की लहरें By Sureshbabu Mishra

‘जीवन संघर्ष और उत्कट जिजीविषा से जुडी हैं संग्रह की कहानियां’

मानव जीवन और उसके कार्य व्यवहार सदा ही अनंत कौतुक - कौतूहलों व जिज्ञासाओं का केंद्र रहे हैं । साहित्य किसी भी कालख...

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युवा किंतु मजबूर By Lalit Kishor Aka Shitiz

आषाढ़ का महिना था, हल्की ठंडी हवा गुनगुना रही थी और धीमे धीमे भोर की खुशबू फैल रही थी और प्रकृति ये संदेश दे रही थी की कुछ ही क्षणों में सूर्योदय होने को है ...

राकेश वही रोज की...

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किरन By Veena

" नहीं नहीं। मेरे पापा को छोड़ दो।" छह साल की आभा ने एक परछाई को देखते हुए कहा। " प्लीज़ उन्हें कुछ मत करना.....।" यह कहते कहते सामने का नजारा देख वो सुन्न पड़ गईं।...

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Shadow Of The Packs By Vijay Sanga

इस कहानी की शुरुवात होती है एक घनी अंधेरी रात से, जहाँ एक आदमी बड़ी तेजी से जंगल के अंदर वाले रास्ते पर चला जा रहा था। अचानक से उसे कुछ आहट सुनाई दी। उसने इधर उधर देखा पर उसे कुछ द...

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एमी By Pradeep Shrivastava

मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...

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सदफ़िया मंज़िल By Pradeep Shrivastava

सदफ़िया मंज़िल का दरवाज़ा खुला हुआ है। वह भी सदफ़िया की तरह बहुत बूढ़ा हो चुका है। जगह-जगह से चिटक गया है। यह चिटकन और बढ़ कर दरवाज़े को ज़मीन न सुँघा दे, इस लिए जगह-जगह टीन की पट्टियों को...

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सुनहरी तितलियों का वाटरलू By Pradeep Shrivastava

कोविड-१९ फ़र्स्ट लॉक-डाउन काल की सत्ताईसवीं सुबह है। रिचेरिया अपॉर्टमेंट की पाँचवीं मंज़िल पर अपने फ़्लैट की बालकनी में बैठी, दूर क्षितिज में एक केसरिया घेरे को बड़ा होता देख रही है।...

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