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---*कम उम्र वेडिंग - "चूड़ियों का रंग"* *[Story Start]**1. शॉक - "किताब गिर गई"*...
शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक संकरी गली के कोने में बना वह छोटा सा कैफे, 'द ओल्...
कहानी: नियति का खेलरविवार का दिन था। सीमा फोन में फेसबुक पर अपनी कविता पर आई पाठ...
बरसों पहले अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे एक छोटे से गांव के किनारे एक पुरानी हव...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 19 : आखिरी शब्द अंतिम अध्याय के द्वार के पीछे...
एपिसोड 2: दलदल की पहली सीढ़ीराघव की जिंदगी में सब कुछ किसी सुनहरे सपने जैसा चल र...
अब सब लोग होटल पहुंच गए थे । थके होने के कारण सब सो गए...लेकिन हरि और श्री को नी...
बर्बाद इश्कएपिसोड 6 — जब दिल और दिमाग़ लड़ने लगेमुंबई में शाम का वक़्त सबसे अजीब...
उधर, नासिक के ज्योतिर्मठ के मठाधीश पंडित विश्वनाथ दीनानाथ त्रिवेदी अपने शिष्यों...
सुबह के सात बजे थे। शहर की सड़कें धीरे-धीरे जाग रही थीं, लेकिन निशा कुमारी की रा...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
ये उपन्यास सत्य पर एक ऐसी प्रेरित कहानी है, जो लिखने मे मुझे काफ़ी तकलीफ झेलनी पड़ी। कारण था, बस एक ही स्थान वही रहे और पात्र बदले जाये फिर सोचा नहीं सब कुछ ही सच हो।...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
रात का सन्नाटा…इतना गहरा था कि जैसे हवा भी डर रही हो चलने से। गाड़ी धीरे-धीरे कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ रही थी।चारों तरफ घना जंगल… सूखे पेड़ों की टहनियाँ ऐसे हिल रही थीं जैसे किसी...
रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों। एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाह...
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