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  • बोलती खिड़की

    एक अरसे बादमैंने फिर से कलम उठाई—लिखने के लिए नहीं,बल्कि इसलिए किखामोशीअब ज़्याद...

  • The Last Room of Floor 7 - भाग 2

    भाग 1 अनजान बुलावा जरूर देखे।Vansh ने देखा कि सीढ़ियों के पास एक बड़ा सा ताला जड...

  • मैं दादा-दादी की लाड़ली - 2

    यह कहानी “मैं दादा-दादी की लाडली” का दूसरा भाग है।बचपन की मासूमियत के बाद, अब ज़...

  • Last Flight : रसोई की चारदीवारी और खामोश चीखें!

    क्या आपने कभी उस खामोशी को सुना है जो एक जलती हुई रोटी और खौलती हुई दाल के बीच द...

  • चेकपोस्ट:चाणक्य - 2

    अध्याय २: रिकवरी मोड और अक्षय खन्ना वाली एक्टिंगद मुहाना ऑपरेशन्स: 'रडार&#39...

  • वरदान - 5

    बड़ी रानी का दिखावा इतना सधा हुआ था कि छोटी रानी पूरी तरह उसके प्रभाव में आ गई। ...

  • बिना देखे प्यार - 1

    ++Bina_dekhe_pyar+++मैं कोई पेशेवर लेखक तो नहीं लेकिन ऐसे ही थोड़ा लिखने का प्रय...

  • लोहड़ी

    ---कहानी: "लोहड़ी ️ लेखक: विजय शर्मा एरी  ---प्रस्तावनाजनवरी की ठंडी रातें पंजाब...

  • रूहों का सौदा

    रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और...

  • दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 11

    मंच पर उद्घाटन फिर शुरू। मंत्री ने रिबन काटा। पहली ट्रेन सीटी बजा कर आई। पृथ्वी-...

अंधेरी गुफा By Wow Mission successful

एक रहस्यमयी भयावह कथा)
बिहार के एक छोटे से गाँव कुरहारी के पास, पहाड़ियों के बीच एक पुरानी गुफा थी — जिसे लोग “अंधेरी गुफा” कहते थे। कोई नहीं जानता था कि वो कितनी गहरी है, पर इतना...

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अंजान By Raj Phulware

हसीना की दस्तकरात धीरे-धीरे अपनी नमी फैला रही थी।बाहर आसमान जैसे किसी पुराने ज़ख्म की तरह गरज रहा था —बिजली की चमक हर कुछ मिनट में कमरे की दीवारों पर नाच जाती।बारिश की बूँदें खिड़क...

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निशांत ब्लॉगर By Raj Phulware

अध्याय 1 : शोहरत की सीढ़ियाँ

सुबह की धूप खिड़की से छनकर कमरे में गिर रही थी। दीवार पर टंगे पोस्टरों में कैमरे, लाइटें और एडिटिंग के नोट्स लगे हुए थे।
कमरे के बीच में एक लड़का अ...

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कुछ यूं हुआ By Anup Gajare

मुझे सूर्यास्त के बाद कभी भी नींद नहीं आती। रात की चादर ओढ़कर बैठ जाना मेरे लिए आसान है। कभी पुराना अखबार लेकर घंटों पढ़ता हु।मेरे मकान की दीवारों पर एक भी तस्वीर नहीं लगी हुई। यान...

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वो खोफनाक रात By Khushwant Singh

दिल्ली,

शहर की दुर्गा कॉलोनी ,

आलोक शर्मा जी का घर,

आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं।


सुबह के तकरीबन 8...

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खामोश परछाइयाँ By Kabir

दिल्ली का सेंट मैरी कॉलेज। गर्मियों का पहला दिन।
नए सेशन का पहला दिन हमेशा हलचल भरा होता है। हॉस्टल में नए चेहरे, कैंटीन में भीड़, और हर किसी में कॉलेज लाइफ़ का रोमांच।

आर्यन भ...

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अंधेरा कोना By Rahul Narmade ¬ चमकार ¬

पिछले डेढ़ साल से मैंने अनंतगढ़ गांव से दूर आलोक और रतिबेन पाटिल कॉलेज ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज से बायो-मेडिकल साइंस में एमएससी कर रहा था, मैं सेमेस्टर 4 मे बायोसेंसर विषय पर डेझर्टेश...

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चुडैल की कामवासन By Mister Rakesh

आर्यन की जिंदगी हमेशा साधारण रही थी। दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में एक छोटा सा अपार्टमेंट, एक मामूली नौकरी, और एक एकाकी जीवन। लेकिन उसके भीतर हमेशा एक खालीपन था, जिसे कोई भी चीज़...

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अधूरी घंटी By Arkan

शहर से दूर, पुराने गाँव के कोने में एक हवेली थी, जिसे लोग “काली हवेली” कहते थे। वहाँ कभी किसी ज़मींदार का परिवार रहता था, लेकिन दशकों से वह वीरान थी। टूटी खिड़कियाँ, दरकती दीवारें...

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House no105 (Unsolved Mystery) By silent Shivani

शादी को कुछ ही दिन हुए थे,, मीरा और आरव अपनी जिंदगी के नये सफर को लेकर बहुत खुश थे,, इस मुंबई शहर की भाग दौड़ भरी जिंदगी से दूर वो कही शुकुन भरी जिंदगी बिताना चाहते थे...
लंबे स...

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