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"अम्मी आप फ्री हैं" ?? आज रूटीन के मुताबिक़ शहरयार वॉक करने के बजाए माँ के कमरे...
सुबह के पाँच बजे थे।चंदनगढ़ की सुबह बाकी जगहों जैसी नहीं थी। न अज़ान की आवाज़, न...
आख़िरी चिट्ठी का रहस्यबारिश की हल्की बूंदें गाँव की कच्ची गलियों को भिगो रही थीं...
जयगुरु क्या दीक्षा आवश्यक है? — शास्त्र, संत और मानवता की दृष्टि से एक विचारभारत...
ठंडी हवा चल रही थी…कोरिया की सड़कों पर हल्की रोशनी थी…और सुनामी और कृतिक साथ-साथ...
अक्षय गहरी नींद में सोया हुआ था. लेकिन उसकी नींद के अंधेरे में किसी की आवाज लगात...
चलो दूर कहीं.. 25सुबह के लगभग 7 बज रहे थे। दिल्ली के सूनी सड़कों पर इक्का-दुक्का...
“वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीर पराई जाणे रे।पर दुःखे उपकार करे तोये मन अभिमान न...
उसे देखकर कहीं खोया हुआ राजस वापस आना चाह रहा था, लेकिन क्या यह सहज संभव था? तो...
संध्या की बात सुनकर अभिमन्यु की आँखें फटी की फटी रह गईं।संध्या: "अभिमन्यु, ईशान...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
अध्याय 1: रणविजय शेखावत उसका नाम रणविजय शेखावत है। पूरी दुनिया उसे एक बेरहम, पत्थर दिल और 'कोल्ड प्रिंस' के नाम से जानती है। वह सिर्फ एक हैंडसम बैचलर ही नहीं, बल्कि अंडर...
स्वरा..... स्वरा....उठो स्वरा ....कब तक यूं ही सोती रहोगी ?? क्या माँ....सोने भी दो ना.... बिल्कुल भी नहीं..... चलो जल्दी उठो जाओ देखो तुम्हारी बरडी तुम्हारा कब से इंतजार कर...
मेरे ख्वाबो मे जो आए,,,, आ के मुझे छेड़ जाए,,,,, उससे कहो मेरे.... सामने तो आए,,, मेरे ख्वाबो मे जो आए ,,,,ऐ,,,,ऐ,,,, तभी माँ ने अंदर से आवाज लगाई,...
प्यार खेल नहीं एपिसोड 1 — वह रात जब सब कुछ बिखर गया मुंबई। एक ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं। यहाँ दिन में भी भीड़ होती है और रात में भी। यहाँ की सड़कें कभी खाली नहीं होतीं, यहाँ की...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...
मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे अपने कदम आगे बढा रहा था. उसने एक लंबा ब्लैक कोट पहना हुआ था, जिसकी वजह से इस अंधियारी रात में वह बेह...
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