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आदित्य :- कृतिका , छोड़ो , चुप हो जाओ ।कृतिका :- क्या चुप हो जाओ । ये अपने आपको...
तभी ऑफिस में देव के सर आ जाते हैं।बॉस के आते ही देव उनसे मिलने जाता है।क्या मैं...
अर्शित गुस्से और बेचैनी के बीच अपने घर पहुँचता है। उसके दिमाग़ में सिर्फ़ सिया क...
बुआ की शादीकुंती -मां सुबह जल्दी उठा देना कॉलेज जाना है। बच्चों की किलकारी कभी स...
हड्डियों से बने उस शहर के बीच खड़े अमन और रिया की साँसें बेकाबू थीं, दिल इतनी ते...
बालेन शाह की जीवनी (Balen Shah Biography in Hindi)पूरा नाम: बालेन शाहजन्म: 27 अप...
अतीत की परछाइयाँ और अनसुना सच1. लाइब्रेरी का गुप्त रास्ताराधिका ने जब से कार्यभा...
शाही दावतमुंबई की दोपहर की चिलचिलाती धूप अब विहान के शरीर को जला नहीं रही थी, बल...
शीर्षक: तुम्हारा अंश...!!आज पूरे डेढ़ वर्ष बीत चुके थे,जब आराध्या और अरुण पहली ब...
रघुवंशी हवेली में नियम पत्थर की लकीरों जैसे थे—दिखते नहीं थे, पर हर साँस में महस...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लॉक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर C.E.O—ऑफिस के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
कहानियां कुछ कह सी जाती है, जो दिल की बात है वो बयां सी कर जाति है ऐसे ही मेरी पहली कहानी की कोशिश का पहला भाग..... 21st...
उस चाँदनी रात की अंधेरी कमरे में जहाँ पर लाइट नहीं थी, पर चाँद की रोशनी उस लड़के पर पड़ रही थी जो बहुत ही खूबसूरती से अपने चेहरे को निहार रहा था। हाला कि वहाँ अंधेरा था , लेकिन उसक...
दिल्ली के पोर्श एरिया मे एक बोहत बड़ा और शानदार विला था,,, "" जो बोहत ही खूबसूरती से सजा था,,, "" देश के सभी रहिस और ऊँचे घराने के लोग वहां की पार्टी अटेंड करने आए थ...
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