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गाँव के बाहर एक पुराना और सुनसान मकान था। लोग कहते थे कि उस मकान में वर्षों पहले...
रोशनी को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके सीने में खंजर उतार दिया हो। जिस आदमी ने उसे ह...
मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी — Vedanta 2.0 @import url('https://f...
सुबह विधि कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी तब मम्मी ने उसे बेसन के लड्डु खिलाये। वि...
कोमल की बात पर रुद्रा PK हैरान हो जाता है और अपने माथे पर हाथ रखकर धिरे से बुदबु...
अगर जानवर बोल पाते...?जरूर पढ़ें और अपनी राय साझा करें। अगर जानवर इंसानी भाषा मे...
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सिंधु जल संधि सबसे महत्वपूर्ण और लंबे समय तक प्...
अब समय आ गया है राज से पड़दा उठने कालोहे का दरवाज़ा बंद हो चुका था।पूरा तहख़ाना...
---------- टाम ज़िंदा है -------15 सितंबर तक थाना अब वो नहीं रहा था.... उसकी हद ब...
दिवेर का युद्ध : मेवाड़ का मैराथन व अकबर की निर्णायक पराजयसन् 1576 में हल्दीघाटी...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...
(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...
यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं। हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...
सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...
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