hindi Best Fiction Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Fiction Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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युवा किंतु मजबूर - पार्ट 2 By Lalit Kishor Aka Shitiz

चुनाव का नतीजा आ चुका था, खाने के पैकेट और मोबाइल बांटने वाली पार्टी जो सत्ता में थी, उसे हार का सामना करना पड़ा। विपक्षी दल ने मंदिर और धर्मस्थलों के नाम पर वोट बटोर कर अपनी सरकार...

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नक़ल या अक्ल - 25 By Swati Grover

25 रेलवे ट्रैक     नीमवती भी रिमझिम को देखें जा रही है, “ बेटा मुझे भी तुम्हारी शक्ल किसी की याद दिला रही है।“ “किसकी?”  उसने उसे हैरानी से देखते हुए पूछा,   किसकी आंटी?     थी मेर...

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जेहादन - भाग 5 (अंतिम भाग) By Pradeep Shrivastava

भाग -5 इस उद्देश्य के लिए धर्मान्तरण के साथ-साथ लैंड-जिहाद को भी चलाने में जी-जान से जुटे हुए हैं। इसके लिए देश को मज़ारों, मस्ज़िदों, मदरसों, क़ब्रिस्तानों से पाट देने का अभियान प्रच...

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फागुन के मौसम - भाग 31 By शिखा श्रीवास्तव

गोरखपुर पहुँचने के बाद जब राघव और जानकी खाना खाने के लिए रुके तब राघव ने तारा को फ़ोन किया। "क्या हाल-चाल है मैनेज़र मैडम?" "सब ठीक है बॉस। आप बताइये कहाँ हैं आप?" "मैं तो गोरखपुर मे...

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प्यार हुआ चुपके से - भाग 29 By Kavita Verma

शिव और अजय ने रति को ओंकारेश्वर के हर मन्दिर में तलाशा, पर उन्हें रति कहीं नही मिली। थककर शिव नर्मदा नदी के किनारे एक घाट पर आकर बैठ गया। तभी अजय दो दोने लेकर वहां आया और शिव की बग...

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बड़ी माँ - भाग 8 By Kishore Sharma Saraswat

8 राम आसरी का समय अब बहुत अच्छी तरह से व्यतीत होने लगा था। सारा दिन घर के कामों में व्यस्त रहती। शाम को मुन्ना के साथ बैठकर बहुत देर तक बतियाती। न खाने की चिंता थी और न पहनने की। र...

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Shadow Of The Packs - 5 By Vijay Sanga

तान्या और उसकी दोस्त के वहां से जाने का बाद, विक्रांत भी कैंटीन से जाने ही वाला था की तभी वहां सुप्रिया आ जाती है। “अरे अचानक कहां चल दिए? अभी तो मैं आई हूं और तुम जा रहे हो! क्या...

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रुबिका के दायरे - भाग 4 (अंतिम भाग) By Pradeep Shrivastava

भाग -4 “भ्रम फैला भी लेकिन लाचित ने अपनी बुद्धिमत्ता, रण-कौशल से ब्रह्मपुत्र नदी युद्ध में भी मुग़ल सेना को कुचल कर रख दिया। मुग़लों ने हार मानते हुए लिखा ‘महाराज की जय ह...

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उन्हीं रास्तों से गुज़रते हुए - भाग 20 By Neerja Hemendra

भाग 20 " तुम्हारे लक्षण ठीक नही है। इन्द्रेश के जाने के बाद तुम हमारे वश में नही हो। मनमौजी हो गयी हो। तुम हमारे घर में नही रह सकती। हमारा घर तुरन्त खाली करो । हमारा तुमसे कोई नाता...

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वंश - भाग 8 By Prabodh Kumar Govil

आठ उस दिन की गोष्ठी के बाद आयोजकों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों के बीच सुष्मिताजी का स्वागत जिस गर्मजोशी से हुआ, उससे वे पुलकित हो गईं। गिरधर, जिसने इस समारोह के लिए सुष्मिताजी पर वि...

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रिबर्थ ऑफ़ डेविल - 7 By Sanju

क्लास में अभी सब एक दूसरे से बातें कर रहे थे कि तभी अचानक से साइलेंट हो जाता है।परी - अचानक साइलेंट क्यों हो गया?.मोहित - प्रोफेसर जो वापस आ गए हैं परी ने कहा आई जो मैंने उनके कार...

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द्वारावती - 38 By Vrajesh Shashikant Dave

38“केशव, कृष्ण का एक नाम केशव भी है ना?” गुल ने पूछा। केशव ने गुल को देखा। वह दूर स्थित मंदिर की धजा को देख रही थी। “गुल, आज ऐसा प्रश्न क्यूँ?”“प्रथम मेरे प्रश्न का उत्तर दो पश्चात...

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गैंगस्टर का सनकी इश्क - 6 By Sanju

मुंबई......हेडकॉटर पुलिस स्टेसन......एक बड़े से रुम के अंदर प्रोजेक्टर चल रहे थे तस्वीर.... 'एक पुलिस ऑफिस था जिसका नाम आकाश मितल था' वो अपने साथियो से कह रहा था आप देख सकते...

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स्वयंवधू - 9 By Sayant

मैं इतना भयभीत हो गयी थी कि, "क..क-क...ब...", मेरे शब्द निकल नहीं रहे थे। ऐसा था जैसे किसीने मेरी ज़बान सिल दी थी।"चिंता मत करो हमने पूरी रात जाँच-पड़ताल की। यह कैमरे और माइक्रोफोन...

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शोहरत का घमंड - 88 By shama parveen

आलिया कोर्ट से बाहर आ कर बैंच पर बैठ जाती हैं। तभी आर्यन वहा पर आ कर बोलता है, "अब क्या हुआ तुम्हे, अब किस बात का मातम मना रही हो ??????तब आलिया बोलती है, "अपनी शादी का मातम मना रह...

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कहन - सुनन By Deepak sharma

सितम्बर का दूसरा शनिवार है। माँ और बाबूजी के कमरे में बिस्तर के बगल में बैठी बहन माँ से कह रही है, ’’इस मालिश और व्यायाम से आप बहुत जल्दी फिर से पहले की तरह नहाने लगेंग...

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फादर्स डे - 79 By Praful Shah

लेखक: प्रफुल शाह खण्ड 79 मंगलवार 14/02/2017 डॉक्यू-नॉवेल ‘दृश्यम अदृश्यम’ प्रकरण अंतिम चरण में है। इसके वास्तविक पात्रो की जीवन यात्रा निरंतर बढ़ती रहेगी। कथा-प्रवाह को...

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लाश किसकी By anurag kumar Genius

लाश किसकी28 वर्षीय श्याम हफ्ता हुआ एक दरवाजे पर पहुंचा और दरवाजे को पागलों की तरह पीटने लगा।"रुस्तम, रुस्तम!"जब दरवाजा ना खुला तो वह चीखने लगा,"दरवाजा खोल रुस्तम!"तत्काल ही दरवाजा...

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मैं तो ओढ चुनरिया - 59 By Sneh Goswami

  मैं तो ओढ चुनरिया    59       एक तो नया शहर , ऊपर से नया घर , नया माहौल , नये लोग और इस तरह का अकेलापन । मन बुरी तरह से घबरा रहा था । कोई तो आए जिसकी आवाज कानों में सुनाई पङे । ब...

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युवा किंतु मजबूर - पार्ट 2 By Lalit Kishor Aka Shitiz

चुनाव का नतीजा आ चुका था, खाने के पैकेट और मोबाइल बांटने वाली पार्टी जो सत्ता में थी, उसे हार का सामना करना पड़ा। विपक्षी दल ने मंदिर और धर्मस्थलों के नाम पर वोट बटोर कर अपनी सरकार...

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नक़ल या अक्ल - 25 By Swati Grover

25 रेलवे ट्रैक     नीमवती भी रिमझिम को देखें जा रही है, “ बेटा मुझे भी तुम्हारी शक्ल किसी की याद दिला रही है।“ “किसकी?”  उसने उसे हैरानी से देखते हुए पूछा,   किसकी आंटी?     थी मेर...

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जेहादन - भाग 5 (अंतिम भाग) By Pradeep Shrivastava

भाग -5 इस उद्देश्य के लिए धर्मान्तरण के साथ-साथ लैंड-जिहाद को भी चलाने में जी-जान से जुटे हुए हैं। इसके लिए देश को मज़ारों, मस्ज़िदों, मदरसों, क़ब्रिस्तानों से पाट देने का अभियान प्रच...

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फागुन के मौसम - भाग 31 By शिखा श्रीवास्तव

गोरखपुर पहुँचने के बाद जब राघव और जानकी खाना खाने के लिए रुके तब राघव ने तारा को फ़ोन किया। "क्या हाल-चाल है मैनेज़र मैडम?" "सब ठीक है बॉस। आप बताइये कहाँ हैं आप?" "मैं तो गोरखपुर मे...

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प्यार हुआ चुपके से - भाग 29 By Kavita Verma

शिव और अजय ने रति को ओंकारेश्वर के हर मन्दिर में तलाशा, पर उन्हें रति कहीं नही मिली। थककर शिव नर्मदा नदी के किनारे एक घाट पर आकर बैठ गया। तभी अजय दो दोने लेकर वहां आया और शिव की बग...

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बड़ी माँ - भाग 8 By Kishore Sharma Saraswat

8 राम आसरी का समय अब बहुत अच्छी तरह से व्यतीत होने लगा था। सारा दिन घर के कामों में व्यस्त रहती। शाम को मुन्ना के साथ बैठकर बहुत देर तक बतियाती। न खाने की चिंता थी और न पहनने की। र...

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Shadow Of The Packs - 5 By Vijay Sanga

तान्या और उसकी दोस्त के वहां से जाने का बाद, विक्रांत भी कैंटीन से जाने ही वाला था की तभी वहां सुप्रिया आ जाती है। “अरे अचानक कहां चल दिए? अभी तो मैं आई हूं और तुम जा रहे हो! क्या...

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रुबिका के दायरे - भाग 4 (अंतिम भाग) By Pradeep Shrivastava

भाग -4 “भ्रम फैला भी लेकिन लाचित ने अपनी बुद्धिमत्ता, रण-कौशल से ब्रह्मपुत्र नदी युद्ध में भी मुग़ल सेना को कुचल कर रख दिया। मुग़लों ने हार मानते हुए लिखा ‘महाराज की जय ह...

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उन्हीं रास्तों से गुज़रते हुए - भाग 20 By Neerja Hemendra

भाग 20 " तुम्हारे लक्षण ठीक नही है। इन्द्रेश के जाने के बाद तुम हमारे वश में नही हो। मनमौजी हो गयी हो। तुम हमारे घर में नही रह सकती। हमारा घर तुरन्त खाली करो । हमारा तुमसे कोई नाता...

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आठ उस दिन की गोष्ठी के बाद आयोजकों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों के बीच सुष्मिताजी का स्वागत जिस गर्मजोशी से हुआ, उससे वे पुलकित हो गईं। गिरधर, जिसने इस समारोह के लिए सुष्मिताजी पर वि...

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क्लास में अभी सब एक दूसरे से बातें कर रहे थे कि तभी अचानक से साइलेंट हो जाता है।परी - अचानक साइलेंट क्यों हो गया?.मोहित - प्रोफेसर जो वापस आ गए हैं परी ने कहा आई जो मैंने उनके कार...

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गैंगस्टर का सनकी इश्क - 6 By Sanju

मुंबई......हेडकॉटर पुलिस स्टेसन......एक बड़े से रुम के अंदर प्रोजेक्टर चल रहे थे तस्वीर.... 'एक पुलिस ऑफिस था जिसका नाम आकाश मितल था' वो अपने साथियो से कह रहा था आप देख सकते...

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स्वयंवधू - 9 By Sayant

मैं इतना भयभीत हो गयी थी कि, "क..क-क...ब...", मेरे शब्द निकल नहीं रहे थे। ऐसा था जैसे किसीने मेरी ज़बान सिल दी थी।"चिंता मत करो हमने पूरी रात जाँच-पड़ताल की। यह कैमरे और माइक्रोफोन...

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शोहरत का घमंड - 88 By shama parveen

आलिया कोर्ट से बाहर आ कर बैंच पर बैठ जाती हैं। तभी आर्यन वहा पर आ कर बोलता है, "अब क्या हुआ तुम्हे, अब किस बात का मातम मना रही हो ??????तब आलिया बोलती है, "अपनी शादी का मातम मना रह...

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कहन - सुनन By Deepak sharma

सितम्बर का दूसरा शनिवार है। माँ और बाबूजी के कमरे में बिस्तर के बगल में बैठी बहन माँ से कह रही है, ’’इस मालिश और व्यायाम से आप बहुत जल्दी फिर से पहले की तरह नहाने लगेंग...

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फादर्स डे - 79 By Praful Shah

लेखक: प्रफुल शाह खण्ड 79 मंगलवार 14/02/2017 डॉक्यू-नॉवेल ‘दृश्यम अदृश्यम’ प्रकरण अंतिम चरण में है। इसके वास्तविक पात्रो की जीवन यात्रा निरंतर बढ़ती रहेगी। कथा-प्रवाह को...

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मैं तो ओढ चुनरिया - 59 By Sneh Goswami

  मैं तो ओढ चुनरिया    59       एक तो नया शहर , ऊपर से नया घर , नया माहौल , नये लोग और इस तरह का अकेलापन । मन बुरी तरह से घबरा रहा था । कोई तो आए जिसकी आवाज कानों में सुनाई पङे । ब...

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