hindi Best Fiction Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Fiction Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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यासमीन - भाग 4 By गायत्री शर्मा गुँजन

अम्मी अम्मी अब्बू जान कहाँ हैं ? उनकी कोई खबर नहीं ..." पुलिस को शिकायत दर्ज कराए क्या? यासमीन अपनी अम्मी से कहते हुए...! शबाना बेगम- बेटी मुझे भी उनकी बहुत फिक्र हो रही है तू जाकर...

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अतीत के पन्ने - भाग 13 By RACHNA ROY

आलोक ने कहा देखो अगर तुम यहां रहकर पढ़ाई करना चाहते हो तो ठीक है वरना होस्टल में रहकर भी पढ़ाई कर सकते हो।आलेख ने कहा नहीं नहीं मैं ये हवेली छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा। एक बार जाकर ग...

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जीवन का गणित - भाग-3 By Seema Singh

भाग - 3"पहाड़ों पर रात बड़ी जल्दी हो जाती है दस बजते ना बजते ऐसा लगने लगता है जैसे आधी रात हो गई हो।" वैभव ने कहा तो अवंतिका मुस्कुराने लगी।"तू है तो जग रही हूं नहीं तो नौ बजे तक ब...

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टेढी पगडंडियाँ - 45 By Sneh Goswami

45 गुरजप दीन दुनिया से बेखबर पलंग पर उल्टा हुआ सोया पङा था , बिल्कुल निरंजन की तरह । वह भी इसी तरह सोया करता था । गुरजप के गुलाबी होंठ गुलाब की पंखुङियों की तरह बार बार सांस लेने क...

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ममता की परीक्षा - 10 By राज कुमार कांदु

' ............और फिर तुम्हारा उसके पिताजी के बारे में झूठ बोलना कि वो तुमसे मिले थे और तुमसे ये सब बातें की थीं। क्या मिलेगा तुम्हें उससे झूठ बोलकर ? वो झूठ जो उसे पता चल ही जा...

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यहां... वहाँ... कहाँ ? - 1 By S Bhagyam Sharma

यहां... वहाँ... कहाँ ? मूल लेखक राजेश कुमार राजेश कुमार इस उपन्यास के मूल तमिल लेखक राजेश कुमार है। आपने 50 वर्षों में डेढ़ हजार उपन्यास लिखे और 2000 कहानियां लिखी। आपकी उपन्यास और...

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मॉटरनी का बुद्धु - (भाग-15) By सीमा बी.

मॉटरनी का बुद्धु---(भाग-15)बच्चे आगे बढते जा रहे थे और संध्या के पास टाइम ज्यादा बचने लगा था, क्योंकि बच्चे मैथ्स और साइंस पढा दिया करते पर 10में संभव को साइंस की ट्यूशन रख कर देनी...

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साहेब सायराना - 29 By Prabodh Kumar Govil

हिंदी फ़िल्मों की शायद सबसे बड़ी विशेषता जो उसे अन्य देशों के फ़िल्म उद्योगों से अलग करती है वो उसका गीत- संगीत ही है। फ़िल्म में कथानक होता है, एक से बढ़कर एक खूबसूरत लोकेशंस होती...

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अपंग - 6 By Pranava Bharti

--------- भानुमति का मस्तिष्क काम नहीं कर रहा था, क्या करे ? क्या कर सकती है ? उसको छोड़ सकती है किन्तु इतना आसान भी तो नहीं| जिन माँ-बाबा के लाख मना करने पर भी वह अपने आपको राजेश क...

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लावण्या - भाग 20 By Jagruti Joshi

लावण्या ने जब मुड़कर देखा वह चंद्रशेखर जी थे,, वो उनके सामने देख कर मुस्कुराई। चंद्रशेखर जी लावण्या के पास आये और प्यार से हग किया,,,,,,! चंद्रशेखर जी ने देखा कि लावण्या की आंखों म...

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कोट - १६ By महेश रौतेला

कोट-१६मैं नियमित रूप से वर्षों से दूरदर्शन पर रंगोली देखता हूँ। मैं कोट को कसकर पकड़े था। उस दिन एक गाना आ रहा था-"प्यार के लिएचार पल कम नहीं थे,कभी हम नहीं थे,कभी तुम नहीं थे...।"द...

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Nice to meet you - 3 By Emika Ease

चलते-चलते अब दोपहर हो चुकी थी । ऊपर आसमान में सूरज काफी जोरों से चमक रहा था । मगर यहाँ जंगल में पेड़ों की छाँव ही काफी थी ठंडक के लिए ।राशि चलते-चलते थक चुकी थी । वह आराम करना चाहती...

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वो पहली बारिश - भाग 32 By Daanu

“क्या?”, ध्रुव की मदद करने वाली बात सुन कर निया ने पूछा। “नीतू की फ्रेंड को मदद करने का वादा किया था मैंने।" “हाँ.. मतलब मुझे सुनाई दिया की तुमने क्या कहा, पर तुमने ऐसा क्यों कहा?”...

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फंस गया गुलशान - 3 By BRIJESH PREM GOPINATH

श्री गणेश आय नम: Recap: पिछले अंक में आपने पढ़ा गुलशन को दिल्ली से नौकरी का कॉल आता है, वो बहुत खुश है लेकिन उसकी प्रेमिका के घरवाले उसकी शादी कहीं और तय कर रहे हैं. गुलशन किसी तरह...

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तक़दीर का खेल - 7 By Aarushi Varma

Recap of chapter 5तो पहले हमने देखा के केसे हुई नील और आरोही की टक्कर। और एक अजब गजब बात जो निशु ने बताई और वो बात क्या है वो चलिए देखते है। अब आगे......Cafèनील और विकि तो शोक थे ह...

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मिलन पुर - 3 By Mehul Pasaya

ओके चलो वैसे टाइम देखलो की सब स्टोर खुलने का वक़्त हुआ या नहीं वरना ऐसे ही फालतू में घूमना पड़ेगा और कुछ मिलेगा भी नहींअरे कोई नी वेट कर लेंगे और क्याठीक है फिरवैसे कल वाली गाड़ी म...

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हारा हुआ आदमी (भाग 54) By Kishanlal Sharma

निशा जाते समय जिस तरह दरवाजा छोड़ गई थी।वैसे ही दरवाजा भिड़ा था।निशा दरवाजा खोलकर अंदर आ गयी।रात को पर्स निशा ने बेडरूम में लटका दिया था।पर्स लेने के लिए वह बेडरूम में चली गयी।निशा...

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चौथा नक्षत्र - 11 By Kandarp

रोज-डे कंप्यूटर साइंस का पहला सेमिस्टर समाप्त हो गया था | दूसरा सेमिस्टर शुरू हुए भी एक महीना बीत गया था | छात्रों में नये एकेडेमिक ईयर का जोश धीरे -धीरे कम हो गया था | क्लास में अ...

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यासमीन - भाग 4 By गायत्री शर्मा गुँजन

अम्मी अम्मी अब्बू जान कहाँ हैं ? उनकी कोई खबर नहीं ..." पुलिस को शिकायत दर्ज कराए क्या? यासमीन अपनी अम्मी से कहते हुए...! शबाना बेगम- बेटी मुझे भी उनकी बहुत फिक्र हो रही है तू जाकर...

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अतीत के पन्ने - भाग 13 By RACHNA ROY

आलोक ने कहा देखो अगर तुम यहां रहकर पढ़ाई करना चाहते हो तो ठीक है वरना होस्टल में रहकर भी पढ़ाई कर सकते हो।आलेख ने कहा नहीं नहीं मैं ये हवेली छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगा। एक बार जाकर ग...

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जीवन का गणित - भाग-3 By Seema Singh

भाग - 3"पहाड़ों पर रात बड़ी जल्दी हो जाती है दस बजते ना बजते ऐसा लगने लगता है जैसे आधी रात हो गई हो।" वैभव ने कहा तो अवंतिका मुस्कुराने लगी।"तू है तो जग रही हूं नहीं तो नौ बजे तक ब...

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टेढी पगडंडियाँ - 45 By Sneh Goswami

45 गुरजप दीन दुनिया से बेखबर पलंग पर उल्टा हुआ सोया पङा था , बिल्कुल निरंजन की तरह । वह भी इसी तरह सोया करता था । गुरजप के गुलाबी होंठ गुलाब की पंखुङियों की तरह बार बार सांस लेने क...

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ममता की परीक्षा - 10 By राज कुमार कांदु

' ............और फिर तुम्हारा उसके पिताजी के बारे में झूठ बोलना कि वो तुमसे मिले थे और तुमसे ये सब बातें की थीं। क्या मिलेगा तुम्हें उससे झूठ बोलकर ? वो झूठ जो उसे पता चल ही जा...

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यहां... वहाँ... कहाँ ? - 1 By S Bhagyam Sharma

यहां... वहाँ... कहाँ ? मूल लेखक राजेश कुमार राजेश कुमार इस उपन्यास के मूल तमिल लेखक राजेश कुमार है। आपने 50 वर्षों में डेढ़ हजार उपन्यास लिखे और 2000 कहानियां लिखी। आपकी उपन्यास और...

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मॉटरनी का बुद्धु - (भाग-15) By सीमा बी.

मॉटरनी का बुद्धु---(भाग-15)बच्चे आगे बढते जा रहे थे और संध्या के पास टाइम ज्यादा बचने लगा था, क्योंकि बच्चे मैथ्स और साइंस पढा दिया करते पर 10में संभव को साइंस की ट्यूशन रख कर देनी...

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साहेब सायराना - 29 By Prabodh Kumar Govil

हिंदी फ़िल्मों की शायद सबसे बड़ी विशेषता जो उसे अन्य देशों के फ़िल्म उद्योगों से अलग करती है वो उसका गीत- संगीत ही है। फ़िल्म में कथानक होता है, एक से बढ़कर एक खूबसूरत लोकेशंस होती...

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अपंग - 6 By Pranava Bharti

--------- भानुमति का मस्तिष्क काम नहीं कर रहा था, क्या करे ? क्या कर सकती है ? उसको छोड़ सकती है किन्तु इतना आसान भी तो नहीं| जिन माँ-बाबा के लाख मना करने पर भी वह अपने आपको राजेश क...

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लावण्या - भाग 20 By Jagruti Joshi

लावण्या ने जब मुड़कर देखा वह चंद्रशेखर जी थे,, वो उनके सामने देख कर मुस्कुराई। चंद्रशेखर जी लावण्या के पास आये और प्यार से हग किया,,,,,,! चंद्रशेखर जी ने देखा कि लावण्या की आंखों म...

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कोट - १६ By महेश रौतेला

कोट-१६मैं नियमित रूप से वर्षों से दूरदर्शन पर रंगोली देखता हूँ। मैं कोट को कसकर पकड़े था। उस दिन एक गाना आ रहा था-"प्यार के लिएचार पल कम नहीं थे,कभी हम नहीं थे,कभी तुम नहीं थे...।"द...

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Nice to meet you - 3 By Emika Ease

चलते-चलते अब दोपहर हो चुकी थी । ऊपर आसमान में सूरज काफी जोरों से चमक रहा था । मगर यहाँ जंगल में पेड़ों की छाँव ही काफी थी ठंडक के लिए ।राशि चलते-चलते थक चुकी थी । वह आराम करना चाहती...

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वो पहली बारिश - भाग 32 By Daanu

“क्या?”, ध्रुव की मदद करने वाली बात सुन कर निया ने पूछा। “नीतू की फ्रेंड को मदद करने का वादा किया था मैंने।" “हाँ.. मतलब मुझे सुनाई दिया की तुमने क्या कहा, पर तुमने ऐसा क्यों कहा?”...

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फंस गया गुलशान - 3 By BRIJESH PREM GOPINATH

श्री गणेश आय नम: Recap: पिछले अंक में आपने पढ़ा गुलशन को दिल्ली से नौकरी का कॉल आता है, वो बहुत खुश है लेकिन उसकी प्रेमिका के घरवाले उसकी शादी कहीं और तय कर रहे हैं. गुलशन किसी तरह...

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तक़दीर का खेल - 7 By Aarushi Varma

Recap of chapter 5तो पहले हमने देखा के केसे हुई नील और आरोही की टक्कर। और एक अजब गजब बात जो निशु ने बताई और वो बात क्या है वो चलिए देखते है। अब आगे......Cafèनील और विकि तो शोक थे ह...

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मिलन पुर - 3 By Mehul Pasaya

ओके चलो वैसे टाइम देखलो की सब स्टोर खुलने का वक़्त हुआ या नहीं वरना ऐसे ही फालतू में घूमना पड़ेगा और कुछ मिलेगा भी नहींअरे कोई नी वेट कर लेंगे और क्याठीक है फिरवैसे कल वाली गाड़ी म...

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हारा हुआ आदमी (भाग 54) By Kishanlal Sharma

निशा जाते समय जिस तरह दरवाजा छोड़ गई थी।वैसे ही दरवाजा भिड़ा था।निशा दरवाजा खोलकर अंदर आ गयी।रात को पर्स निशा ने बेडरूम में लटका दिया था।पर्स लेने के लिए वह बेडरूम में चली गयी।निशा...

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चौथा नक्षत्र - 11 By Kandarp

रोज-डे कंप्यूटर साइंस का पहला सेमिस्टर समाप्त हो गया था | दूसरा सेमिस्टर शुरू हुए भी एक महीना बीत गया था | छात्रों में नये एकेडेमिक ईयर का जोश धीरे -धीरे कम हो गया था | क्लास में अ...

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