hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • 30 शेड्स ऑफ बेला - 6

    30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 6 by Iqbal Rizvi इकबाल...

  • जय हिन्द की सेना - 5

    जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म पाँच जब अटल की बेहोशी टूटी तब सूरज सिर पर चढ़ आया...

  • राम रचि राखा - 3 - 6

    राम रचि राखा तूफान (6) सुबह किसी में उठने की हिम्मत नहीं थी। बच्चे कुनमुनाकर उठे...

यारबाज़ - 6 By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (6) "किस बात के लिए वकील? जो जमीन हमारी है उसमें वह जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहा है। अपनी जमीन को लेने के लिए क्या वकील करू? मैं भी जबरदस्ती उसे निकाल दूंगा।"...

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30 शेड्स ऑफ बेला - 6 By Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 6 by Iqbal Rizvi इकबाल रिजवी एक नदी की वापसी ऋषिकेश में गंगा का प्रवाह बनारस के मुकाबले काफी तेज़ है, पानी भी साफ़ रहता है...

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जय हिन्द की सेना - 5 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म पाँच जब अटल की बेहोशी टूटी तब सूरज सिर पर चढ़ आया था। उसने अपने घायल शरीर को टटोला, उसे आश्चर्य हो रहा था कि वह जिन्दा है। आज की मनहूस सुबह का सारा घ...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 11 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 11 समय की रफ्तार तो एक ही रहती हैं परंतु मनुष्य कभी धीमे और कभी तेज गति से उसके साथ कदम मिलाने के प्रयास में जुटा रहता है। जिसमें कभी वह अपनी सफलता पर इतर...

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राम रचि राखा - 3 - 6 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा तूफान (6) सुबह किसी में उठने की हिम्मत नहीं थी। बच्चे कुनमुनाकर उठे और भूख से थोड़ी देर रोए। लेकिन जल्दी ही अशक्त होकर शांत हो गए। आधे से अधिक लोग मरणासन्न हो चुके थे।...

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बात बस इतनी सी थी - 1 By Dr kavita Tyagi

बात बस इतनी सी थी 1 माता-पिता की इकलौती संतान के रूप में कुल को आबाद रखने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ढोता हुआ मैं अपने जीवन के चालीस बसंत पार कर चुका था, किंतु अभी तक मुझे अपने लि...

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गूंगा गाँव - 1 By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

एक भोर होते ही चिड़ियों ने चहकना शुरू कर दिया। उनमें एक संवाद छिड़ गया था। कुछों का कहना था-‘इस गाँव का किसान बड़ा खराब है, हमारे पहुँच ने से प...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 7 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (7) पापा के इरादे बुलंद थे, पर भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया। किसी पौधे को अगर जड़ से उखाड़ दिया जाए और मीलो...

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बुलडोज़र By Priyadarshan Parag

बुलडोज़र प्रियदर्शन कहानी तब शुरू हुई जब सिर्फ सात महीने पहले ली गई गाड़ी ख़राब हो गई। इंजन बिल्कुल रूठा हुआ था- स्टार्ट होने को तैयार नहीं। गाड़ी के सेंसर तक काम नहीं कर रहे थे। द...

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चाँद के पार एक चाबी - 7 By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 7 पिन्टू की इच्छा हुई, पूछे, ‘देर न होती तो कुछ देर और रुकती क्या?’ तारा कुमारी जा चुकी थी। प्रश्न प्रश्न ही रह गया था। खुद से प्रश्न करते, खुद ही...

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गवाक्ष - 19 By Pranava Bharti

गवाक्ष 19== कॉस्मॉस के इस बचपने से सत्यनिधि के चेहरे पर फिर मुस्कुराहट पसर गई। उसे प्रत्येक बात में उत्सुकता दिखाने वाला, यह बालक सा लगने वाला कॉस्मॉस बहुत प्यारा सा लगने ल...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 13 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 13. उस रोज प्रखर ने भी बहुत कुछ साझा किया था| कैसे स्कूल खत्म होने के बाद जब रिजल्ट आया ....सारे शहर में उसकी सेकंड पोजीशन थी। उसको शिखा का नाम पता था| स...

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उर्वशी - 22 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 22 " जब तक मेरे प्रति अपनी भावनाओं के विषय मे आपने कुछ नहीं कहा था, और मेरा आकर्षण भी आप नहीं जानते थे, उस वक़्त तक फिर भी ठीक था, पर अब नहीं। यह बहुत खतर...

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क्वार्टर नम्बर तेइस By Deepak sharma

क्वार्टर नम्बर तेइस माँ और तीनों बहनों की हँसी अशोक ने बाहर से ही सुन ली| हमेशा की तरह इस बार भी हँसी उसे अचरज तथा रोष से भर गयी| रेल गाड़ियों के धुएं और धमाके के हर दूसरे पल पर डोल...

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आधा आदमी - 34 - अतिम भाग By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-34 ‘‘मैं तुम लोगों से बड़ा नंगा हूँ.‘‘ जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने उसका ढोगल ख्पोता, हाथ में लपेट लिया। ‘‘बहन जी छोड़ दीजिए.‘’ सज्जन ने आकर विनती की। मैंने क...

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जोकर By Vivek Mishra

जो क र - विवेक मिश्र फिर मेट्रो आई रुकी और चली गई. समय से घर पहुँचने का एक मौका आया,रुका और आँखों के सामने से सरकता चला गया. एक दिन, एक घंटा जल्दी जाने की मोहलत नहीं मिल...

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हर करम अपना करेंगे, ए - वतन तेरे लिए By AKANKSHA SRIVASTAVA

" यहां सदियों से ये रीत है जी हर डर के आगे जीत है जी, हम रक्षक है इस मिट्टी के बस जीत की राह चलते है, है जीत का परचम हाथो में डर के आगे जीत है....! ये देश है वीर-जवानों किसानों का,...

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कुछ से कुछ By Ramnarayan Sungariya

कहानी-- कुछ से कुछ आर. एन. सुनगरया दरवाजे पर दस्‍तक सुनकर गौर साहब ने दरवाजा खोला। सामने खड़े आगन्‍तुक क...

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मजबूर By Mens HUB

बारिश के कारण सड़क पर जगह-जगह पानी भरा हुआ था और पानी से भरे हुए ऐसे ही एक गड्ढे में मिस्टर स्वामी खून से लथपथ लगभग मृत पड़े थे | उनसे थोड़ी दूर जहाँ पर बारिश का पानी नहीं था वही पर ह...

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मेरा सहेरा सजेगा मां के हाथ By Saroj Prajapati

आज मधु जी का पूरा घर फूलों की सजावट व उनकी खुशबू से महक रहा था। घर में रिश्तेदारों की चहल-पहल थी और पकवानों की खुशबू चारों ओर बिखरी हुई थी। घर में मंगलगीतों के साथ, ढोलक की थापें भ...

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आघात.. By Saroj Verma

ये क्या पंडित जी, फिर इतने सारे बतासे ले आए,अभी तो बहुत रखें हुए हैं, पंडिताइन निर्मला अपने पति से बोली।। नहीं, पंडिताइन बतासे घर में कभी खत्म नहीं होने चाहिए,क्या पता कब कौन पी...

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बना रहे यह अहसास - 1 By Sushma Munindra

बना रहे यह अहसास सुषमा मुनीन्द्र 1 घटना सिर्फ एक बार घटती है जब अपनी प्रामाणिकता में वस्तुतः घट रही होती है। वही घटना स्मृति में बार-बार घटती है। विचारों में भिन्न तरह से घटती है।...

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तू नहीं और सही, और नहीं और सही By Annada patni

तू नहीं और सही, और नहीं और सही अन्नदा पाटनी छत पर खड़ी थी । इधर उधर नज़र दौड़ाई तो देखा । बाज़ू वाली छत पर एक लड़की खड़ी किसी को हाथ से कुछ इशारा कर रही थी । उत्सुकता हुई कि देखूँ...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 29 - अंतिम भाग By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 29. लाली ने शिकायत करते हुए रानी से कहा - "हर दम तेरे ही साथ रहती हूँ ! थोड़ी देर के लिए भी तू मुझे चन्दू-नन्दू के साथ नहीं जाने देती है ! बच्चों के...

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जमील चच्चा By राज बोहरे

जमील चच्चा जमील चच्चा ने अपनी चालीस साल पुरानी साइकिल के हैंडल पर बड़े प्यार से कपड़ा रगड़ा और पिछले पहिये की हवा चैक करने लगे। पिछला पहिया कुछ दिनों से परेशान करने लगा हैं। पं...

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ताई By Sandeep Tomar

"ताई" गॉव से आयी ताई यहाँ ठहरने को तैयार नहीं थी, कतई नहीं। पोटलीनुमा झोला काख में दबाए वह चली आ रही थी। उनका बड़ा बेटा सुबह ही अपने काम पर जा चुका था। बड़ा बिज़नेसमेन होने के ना...

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अकेली शाम By Mohini

स्मिता और प्रतीक दोनों की अरेंज मैरिज हुई थी,दोनों अपने अपने मा बाप के एक ही संतान थे.. पति पत्नी में..शादी के 10 साल में भी नया नया प्यार जैसा अहसास था...धन दौलत कि कोई कमी नहीं थ...

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बुखार By Priyadarshan Parag

बुखार प्रियदर्शन वह बाईस मार्च का दिन था। प्रधानमंत्री के आह्वान पर वह अपनी बालकनी पर खड़े होकर एक प्यारी सी घंटी बजा रहा था। यह घंटी उसने अपनी दुछत्ती पर पड़े पुराने सामानों के बी...

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केसरिया बालम - 21 - अंतिम भाग By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 21 केसरिया भात की खुशबू आज बाली घर आने वाला है। सिर्फ अपनी देह के साथ। ऐसी चेतनाविहीन देह जो देह होने का अर्थ भी नहीं जानती। ऐसी देह जहाँ न मन है, न दिमाग...

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कुनबेवाला By Deepak sharma

कुनबेवाला “ये दिए गिन तो|” मेरे माथे पर दही-चावल व सिन्दूर का तिलक लगा रही माँ मुस्कुराती है| वह अपनी पुरानी एक चमकीली साड़ी पहने है| उस तपेदिक से अभी मुक्त है जो उस ने तपेदिक-ग्रस्...

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जननम - 16 - अंतिम भाग By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 16 वह उसके सामने आराम से बैठी हुई थी। बड़े सहज रूप से मुस्कुरा रही थी। कितनी अच्छी तरह से मुस्कुराती है ! कितनी सुंदर! कितनी सौम्य । इस सौम्यता पर सिर्फ मेरा अधिकार है...

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यारबाज़ - 6 By Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (6) "किस बात के लिए वकील? जो जमीन हमारी है उसमें वह जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहा है। अपनी जमीन को लेने के लिए क्या वकील करू? मैं भी जबरदस्ती उसे निकाल दूंगा।"...

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30 शेड्स ऑफ बेला - 6 By Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 6 by Iqbal Rizvi इकबाल रिजवी एक नदी की वापसी ऋषिकेश में गंगा का प्रवाह बनारस के मुकाबले काफी तेज़ है, पानी भी साफ़ रहता है...

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जय हिन्द की सेना - 5 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म पाँच जब अटल की बेहोशी टूटी तब सूरज सिर पर चढ़ आया था। उसने अपने घायल शरीर को टटोला, उसे आश्चर्य हो रहा था कि वह जिन्दा है। आज की मनहूस सुबह का सारा घ...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 11 समय की रफ्तार तो एक ही रहती हैं परंतु मनुष्य कभी धीमे और कभी तेज गति से उसके साथ कदम मिलाने के प्रयास में जुटा रहता है। जिसमें कभी वह अपनी सफलता पर इतर...

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राम रचि राखा - 3 - 6 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा तूफान (6) सुबह किसी में उठने की हिम्मत नहीं थी। बच्चे कुनमुनाकर उठे और भूख से थोड़ी देर रोए। लेकिन जल्दी ही अशक्त होकर शांत हो गए। आधे से अधिक लोग मरणासन्न हो चुके थे।...

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गूंगा गाँव - 1 By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 7 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी (7) पापा के इरादे बुलंद थे, पर भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया। किसी पौधे को अगर जड़ से उखाड़ दिया जाए और मीलो...

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चाँद के पार एक चाबी - 7 By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 7 पिन्टू की इच्छा हुई, पूछे, ‘देर न होती तो कुछ देर और रुकती क्या?’ तारा कुमारी जा चुकी थी। प्रश्न प्रश्न ही रह गया था। खुद से प्रश्न करते, खुद ही...

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गवाक्ष - 19 By Pranava Bharti

गवाक्ष 19== कॉस्मॉस के इस बचपने से सत्यनिधि के चेहरे पर फिर मुस्कुराहट पसर गई। उसे प्रत्येक बात में उत्सुकता दिखाने वाला, यह बालक सा लगने वाला कॉस्मॉस बहुत प्यारा सा लगने ल...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! 13. उस रोज प्रखर ने भी बहुत कुछ साझा किया था| कैसे स्कूल खत्म होने के बाद जब रिजल्ट आया ....सारे शहर में उसकी सेकंड पोजीशन थी। उसको शिखा का नाम पता था| स...

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उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 22 " जब तक मेरे प्रति अपनी भावनाओं के विषय मे आपने कुछ नहीं कहा था, और मेरा आकर्षण भी आप नहीं जानते थे, उस वक़्त तक फिर भी ठीक था, पर अब नहीं। यह बहुत खतर...

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आधा आदमी - 34 - अतिम भाग By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-34 ‘‘मैं तुम लोगों से बड़ा नंगा हूँ.‘‘ जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने उसका ढोगल ख्पोता, हाथ में लपेट लिया। ‘‘बहन जी छोड़ दीजिए.‘’ सज्जन ने आकर विनती की। मैंने क...

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" यहां सदियों से ये रीत है जी हर डर के आगे जीत है जी, हम रक्षक है इस मिट्टी के बस जीत की राह चलते है, है जीत का परचम हाथो में डर के आगे जीत है....! ये देश है वीर-जवानों किसानों का,...

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बारिश के कारण सड़क पर जगह-जगह पानी भरा हुआ था और पानी से भरे हुए ऐसे ही एक गड्ढे में मिस्टर स्वामी खून से लथपथ लगभग मृत पड़े थे | उनसे थोड़ी दूर जहाँ पर बारिश का पानी नहीं था वही पर ह...

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मेरा सहेरा सजेगा मां के हाथ By Saroj Prajapati

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केसरिया बालम - 21 - अंतिम भाग By Hansa Deep

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कुनबेवाला By Deepak sharma

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जननम - 16 - अंतिम भाग By S Bhagyam Sharma

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