hindi Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • मेहमान

    मेहमानस्टेशन पर काफी भीड़ थी। सुबह साढ़े 9 बजे भी दिल्ली दौड़ रही थी। यात्री अपन...

  • कलयुग का सच

    *कलयुग का सच* जुलाई की सुबह थी। रीना ने बच्चों को स्कूल भेजा, किचन समेटा और फिर...

  • लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 2

    शीर्षक ​- *देश के सच्चे नायक और हमारी खामोशी*​क्या आप जानते हैं, सोनम वांगचुक जी...

चिता की आग By Dr Sandip Awasthi

  ——————-          आंटी को पिछली बार अंकल के चौथे पे देखा था ।जाने के समय जब मैंने हाथ जोड़कर उनसे विदा ली तो कहने...

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ठुकराईन नयना देवी - 3 By Vandna Sharma

उम्र के तीसरे पड़ाव पर आकर नयनादेवी बिल्कुल शांत हो गई थीं। तीनों बच्चों की शादी के बाद घर खाली-खाली सा हो गया था। दोनों लड़के विदेश जाकर बस गए थे, और बेटी अपनी ससुराल चली गई थी। ब...

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कर्म फल By Vandna Sharma

कर्म फलआसमान में रूई जैसे बादल जगह-जगह बिखरे हुए थे। सूरज ढलने को था। पेड़ का पत्ता भी नहीं हिल रहा था। जुलाई महीने की उमस भरी शाम थी। सरोज अपनी बालकनी में बैठी ढलते हुए सूरज को दे...

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सजा.....बिना कसूर की - 9 By Soni shakya

  ....आकाश की फोन की घंटी बजती है पर आकाश ध्यान नहीं देता। वह अपने सुनहरे पलों को यु बर्बाद नही करना चाहता था।पर .. मोबाइल की रिंग भी बहुत जिद्दी थी लगातार बजे जा रही थी । आकाश के...

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पीपल के पत्ते By Jeetendra

बारिश  की वह पहली बूँद जब पीपल के पत्ते पर गिरी तो वरुण मिश्रा ठीक उसी पल गाँव की सीमा पर खड़ा था। उसके कंधे पर एक भारी बैग था जिसमें तीन कैमरे पाँच लेंस और एक ज़िंदगी भर की थकान ब...

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किले का आखिरी पहरेदार By Zero

️ किले का आखिरी पहरेदारसाल 1672...अरावली की पहाड़ियों के बीच बना देवगढ़ का किला उस रात बिल्कुल शांत था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और तेज हवा के कारण किले की दीवारों पर जल रही...

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मेहमान By Vandna Sharma

मेहमानस्टेशन पर काफी भीड़ थी। सुबह साढ़े 9 बजे भी दिल्ली दौड़ रही थी। यात्री अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए भागे जा रहे थे। रिया का टिकट बुक था लेकिन दिल्ली का प्लेटफार्म ही इतना बड़ा है...

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कलयुग का सच By Vandna Sharma

*कलयुग का सच* जुलाई की सुबह थी। रीना ने बच्चों को स्कूल भेजा, किचन समेटा और फिर अपनी माँ को फोन लगाया। फोन उठते ही माँ की आवाज सुनकर रीना चौंक गई। माँ बहुत दुखी और भारी स्वर में बो...

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लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 2 By Std Maurya

शीर्षक ​- *देश के सच्चे नायक और हमारी खामोशी*​क्या आप जानते हैं, सोनम वांगचुक जी ने इस देश को क्या दिया है? और वे आज क्यों भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं?अगर नहीं, तो क्यों नहीं? क्या...

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जमीन का बंटवारा By Vandna Sharma

लघु कथा जमीनएक जमीन से न जाने कितने रिश्ते जुड़े होते हैं, और न जाने कितने स्वार्थ भी। सुरेश के पिताजी पिछले आठ महीनों से बीमार थे। अब वो छोटे बेटे के साथ देहरादून में रहते थे। सुर...

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गुण्टी - स्टोरी by Renu Husen By Dr Sandip Awasthi

“गुण्टी...गुण्टी... । जाने कहाँ गई है गुण्टी सुबह-सुबह? आज इतनी सुबह कैसे जग गई? ज़रुर खिड़की से निकल गई होगी गुट....गुट....ट”। “अम्मा, क्यों परेशान होती हो। कूदत...

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नेट नहीं तो कुछ नहीं By Vandna Sharma

सोहन आज सुबह से परेशान था। बार-बार अपना मोबाइल चेक कर रहा था। शायद कुछ जरूरी मेल आने वाला था। दो दिन से हल्की बारिश हो रही थी। खराब सिग्नल आ रहे थे, नेट काम नहीं कर रहा था। ऑफिस मे...

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अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे By Sajid Ahmad

अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजेशाम की जाती हुई रोशनी के साथ अब स्ट्रीट लाइट की हल्की पीली रौशनी रास्तों पर अपनी जगह बनाने लगी थी, आती जाती गाड़ियां और किनारे चलते हुए लोगों...

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नियति का खेल By Vandna Sharma

कहानी: नियति का खेलरविवार का दिन था। सीमा फोन में फेसबुक पर अपनी कविता पर आई पाठकों की प्रतिक्रिया पढ़ रही थी। तभी उसकी नजर एक नाम पर रुक गई। रिद्धि ने उसकी कविता पर प्रतिक्रिया दी...

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ऊंची छलांग By Deepak sharma

                   जब एक बड़े शहर के जाने- माने अस्पताल में मेरी नियुक्ति हुई तो मैं फूली न समायी।        &nbs...

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ऑनलाइन शॉपिंग By Vandna Sharma

आर्यन के बेटे का दो दिन बाद जन्मदिन था। उसने अपने मम्मी-पापा को गाँव से बुलाने के लिए कहा। उसके पिता सुरेश ने इतनी जल्दी आने में असमर्थता जताते हुए कहा कि मैं अभी स्टेशन गया भी टिक...

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दिल्ली जिमखाना क्लब By Devendra Kumar

दिल्ली जिमखाना क्लब   दिल्ली  के बड़े  बड़े लोगों की जान और शान इस दिल्ली जिमखाना  क्लब के लगता है बुरे दिन आ गए हैं, पर यह तो एक दिन होना ही था.  संत कबीर ठीक ही कह गये है :- ‘सब दि...

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Fake Boyfriend real Feelings - 1 By Mawaskar Pratigya

झूठ बोल कर निकली, ये कहानी शुरू होती है एक झूठ से, प्रतिज्ञा ने अपने घर पर सबको बोला था, कि वो कॉलेज ट्रिप पर जा रही है, लेकिन सच ये था कि, ये कोई आम कॉलेज ट्रिप नहीं थी, ये एक कपल...

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समय का चक्र _एक रियासत का अंत By Vandna Sharma

समय का चक्र_ एक रियासत के अंत की कहानी बात उस समय की है जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। छोटी-छोटी रियासतें हुआ करती थीं। रियासतें क्या साहब यूं कहिए अंग्रेज जिस कर्मचारी से खुश हो...

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सावन आया ही नहीं By Vandna Sharma

सावन नहीं आया जुलाई का उमस भरा मौसम। हवा तो बस नाम मात्र की चल रही थी। सड़ी हुई गर्मी पड़ रही थी। ईश्वर भी जैसे मानसून के साथ मजाक ही कर रहे थे। बादल आते तो जरूर लेकिन बरसते नहीं।...

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मिट्टी की महक By Vandna Sharma

मिट्टी की महक  रवि के बच्चे शहरी जिंदगी से बोर हो चुके थे। सुबह से जिद कर रहे थे - कहीं फार्महाउस पर घुमाने ले चलो। वहाँ बहुत सारी गतिविधियां होती हैं। रवि चुपचाप अपने कम्प्यूटर मे...

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कॉल - 3 By sky

आर्य अंदर आता है और कमरे को ध्यान से देखने लगता है। उसे सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगता है। वह मान लेता है कि यह सब सिर्फ एक सपना था। वह जैसे ही बिस्तर पर लेटने वाला होता है, तभी उसका...

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सिंधु संधि पर विराम By Mayuresh Patki

भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सिंधु जल संधि सबसे महत्वपूर्ण और लंबे समय तक प्रभावी रहने वाले समझौतों में से एक मानी जाती है। 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस...

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गोल रोटी By Priyanka Gupta

"प्रिया, हाँ माँ..." कमरे में बैठी प्रिया ने किचन से आ रही आवाज़ की तरफ मुँह करके कहा।"यहाँ आ जा," ये आवाज़ उसकी माँ, सरिता की थी। प्रिया उठी और किचन की तरफ दौड़ पड...

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अंत भला तो सब भला। By Vandna Sharma

आज मौसम सुहावना हो रहा था। आसमान में बादल छाए हुए थे। हल्की बारिश हो रही थी। धरती पर पानी टप टप टपक रहा था। बहुत दिनों बाद बारिश हुई थी पहली बारिश के बाद मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशब...

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यादों की पोटली By Vandna Sharma

वो दिन भी क्या दिन थे  जानकी देवी की लड़की की शादी थी आज। घर फिर भी सूना लग रहा था। कोई रिश्तेदार नहीं आया था। जो आस-पड़ोस के जान-पहचान वाले थे वो भी रात को ही आयेंगे सिर्फ खाना खा...

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ऑनलाइन राखी By Vandna Sharma

रक्षाबंधन  प्रीति सुबह का काम खत्म कर, बच्चों का टिफिन पैक कर अपनी साहित्यक पत्रिका पढ़ने बैठी। तभी दरवाजे की डोरबेल बजी जैसे ही दरवाजा खोला सामने अपनी बहन अदिति को देख खुशी से उछल...

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तीज का सिंधारा By Vandna Sharma

आज तनु अपनी दोस्त प्रीति से मिलने उसके घर गई थी। बहुत दिनों बाद दोनों दोस्त मिलीं थीं। एक दूसरे को देख दोनों खुशी से चहकते हुए गले मिली। प्रीति अपना घर दिखाने लगी तनु को। अपने बेडर...

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अंतिम यात्रा By Vandna Sharma

अंतिम यात्रा  कहानी  'अंतिम यात्रा' शब्द सुनकर ही दिल काँपने लगता है। यह समय सभी को आना है। दुनिया का अंतिम सत्य भी यही है। दुनिया में लाखों लोग रोज मरते हैं। दिल दहल जाता...

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हन्सु के प्रेम की नैया By Rakesh Kumar Sharma

हमारे सभ्य समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से अपनी आजिविका कमाने के लिए प्रयासरत है। कुछ विशेष प्रवृति के प्राणी भी हमारे इसी समाज में पाये जाते हैं जो दिन-भर कुछ नहीं...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 By miss k

आपको पता ही होगा की थोड़े दिन पहले ही फ़ादर्स डे गया तभी मेरे मन में एक विचार आया कि पापा तो रोज ही स्पेशल होते हैं तो फिर फ़ादर्स डे मनाने की तो कोई जरूरत हे ही नहीं। पहले इतना को...

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तैयारी के भंवर में कैद जवानी By Kapil Tiwari

आज मन काफी उदास है। मुझे प्रयागराज के एक छोटे से कमरे में रहते हुए लगभग तीन साल हो गए हैं। इस बंद कमरे में रहते-रहते अब मन में बार-बार यही सवाल उठता है कि आखिर और कब तक? कब तक सरका...

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देसी जुगाड बड़ा कमाल By Vandna Sharma

लोक कथा  देशी जुगाड बड़ा कमाल एक समय की बात है। किसी गाँव में एक पंडित जी रहते थे। वो थोड़ा कम पढ़े-लिखे थे लेकिन बुद्धि बहुत थी उनके पास। आध्यात्मिक ज्ञान भी था। गाँव में उनके ज्ञ...

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दंगा By Virendra Devangan

एक नगर में जाने किस बात पर दंगा भड़का कि दंगाई खून की होली खेलने लगे। वहां देखते-ही-देखते रक्तरंजित लाशें बिछ गईं। जबरदस्त आगजनी हुई। घर-के-घर फूंक डाले गए। मोटरगाड़ियां धू-धू कर जल...

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बुआ By Vandna Sharma

---बुआ - महक की कहानी आज सबसे उपेक्षित रिश्ता है बुआ। कोई नहीं बुलाना चाहता बुआ को। बुआ के नाम से ही घर की बहुओं के मुँह बन जाते हैं। पहले होती होंगी बुआ रुआब, मैंने तो आज तक नहीं...

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ये सब इतना Complicated क्यों है ? By InkImagination

सब इतना उलझा हुआ क्यों है? यह सवाल अक्सर उन पलों में उठता है जब ज़िंदगी अचानक अपनी रफ्तार बदल देती है। कभी-कभी कोई इंसान हमारी ज़िंदगी में बिना किसी पूर्व सूचना के आता है। शुरूआत ब...

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कोन्निचिवा: माय देसी लव - 2 By Kajal Soam

परिदृश्य: जयपुर की हलचल भरी सड़कें और शिवानी का संघर्ष।जयपुर की दोपहर अपनी पूरी रंगत में थी। हवा में आमेर के किलों की खुशबू और बाज़ारों का शोर घुला हुआ था। शिवानी आज 'सीतापुरा इं...

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बहु पुराण By Vandna Sharma

*'बहु-पुराण' - ये कहानी नहीं, हर उस औरत का दस्तावेज है जिसने गाँव की मिट्टी से शहर के अकेलेपन तक का सफर तय किया है।*शीर्षक: बहु-पुराण*  *- सुबह से बारिश हो रही थी। मौसम सुह...

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अनबुझा चूना By Deepak sharma

                 घड़ी में तीन बजे थे जब जाई बिस्तर से उठ कर बैठ ली थीं।                  &...

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पढ़ाकू By Vandna Sharma

*'किरन' - ये सिर्फ एक शिष्या की कहानी नहीं है, ये हर उस गुरु की जीत है जो बच्चों में 'इंसान' बनाता है।यह कहानी मेरी शिष्या की है। उससे मेरा परिचय एम.ए. की कक्षा के...

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मेरा एक दिन का प्यार By Ubaid ali

( मेरा एक दिन का प्यार )साल 2016 pnb बैंक की लाइन, आपको याद होगा जब हमारे देश में नोटबंदी हुयी थी तो सब लोग नोट बदलवाने के लिए लाइनों में लग रहे थे. इत्तीफाक से मुझे भी पैसे निकालन...

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राई- भर मरहम By Deepak sharma

                  बिजली की तार बेचने वाली अपनी दुकान की सीढ़ियों पर उस छोटे बच्चे को देख कर पहले तो मैं हैरान हुआ।      ...

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सुभीता By Deepak sharma

                मेरे लिए दरवाज़ा बहन ने खोला।                 “और कौन आया है?” अंदर के ब...

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गेंदा रानी By Deepak sharma

लेखिका: दीपक शर्मा                    ड्यूटी रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर के साथ मैं ने अपना अराइवल टाइम दर्ज किया : दो बजे।  ...

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चिता की आग By Dr Sandip Awasthi

  ——————-          आंटी को पिछली बार अंकल के चौथे पे देखा था ।जाने के समय जब मैंने हाथ जोड़कर उनसे विदा ली तो कहने...

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ठुकराईन नयना देवी - 3 By Vandna Sharma

उम्र के तीसरे पड़ाव पर आकर नयनादेवी बिल्कुल शांत हो गई थीं। तीनों बच्चों की शादी के बाद घर खाली-खाली सा हो गया था। दोनों लड़के विदेश जाकर बस गए थे, और बेटी अपनी ससुराल चली गई थी। ब...

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कर्म फल By Vandna Sharma

कर्म फलआसमान में रूई जैसे बादल जगह-जगह बिखरे हुए थे। सूरज ढलने को था। पेड़ का पत्ता भी नहीं हिल रहा था। जुलाई महीने की उमस भरी शाम थी। सरोज अपनी बालकनी में बैठी ढलते हुए सूरज को दे...

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सजा.....बिना कसूर की - 9 By Soni shakya

  ....आकाश की फोन की घंटी बजती है पर आकाश ध्यान नहीं देता। वह अपने सुनहरे पलों को यु बर्बाद नही करना चाहता था।पर .. मोबाइल की रिंग भी बहुत जिद्दी थी लगातार बजे जा रही थी । आकाश के...

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पीपल के पत्ते By Jeetendra

बारिश  की वह पहली बूँद जब पीपल के पत्ते पर गिरी तो वरुण मिश्रा ठीक उसी पल गाँव की सीमा पर खड़ा था। उसके कंधे पर एक भारी बैग था जिसमें तीन कैमरे पाँच लेंस और एक ज़िंदगी भर की थकान ब...

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किले का आखिरी पहरेदार By Zero

️ किले का आखिरी पहरेदारसाल 1672...अरावली की पहाड़ियों के बीच बना देवगढ़ का किला उस रात बिल्कुल शांत था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और तेज हवा के कारण किले की दीवारों पर जल रही...

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मेहमान By Vandna Sharma

मेहमानस्टेशन पर काफी भीड़ थी। सुबह साढ़े 9 बजे भी दिल्ली दौड़ रही थी। यात्री अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए भागे जा रहे थे। रिया का टिकट बुक था लेकिन दिल्ली का प्लेटफार्म ही इतना बड़ा है...

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कलयुग का सच By Vandna Sharma

*कलयुग का सच* जुलाई की सुबह थी। रीना ने बच्चों को स्कूल भेजा, किचन समेटा और फिर अपनी माँ को फोन लगाया। फोन उठते ही माँ की आवाज सुनकर रीना चौंक गई। माँ बहुत दुखी और भारी स्वर में बो...

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लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 2 By Std Maurya

शीर्षक ​- *देश के सच्चे नायक और हमारी खामोशी*​क्या आप जानते हैं, सोनम वांगचुक जी ने इस देश को क्या दिया है? और वे आज क्यों भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं?अगर नहीं, तो क्यों नहीं? क्या...

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जमीन का बंटवारा By Vandna Sharma

लघु कथा जमीनएक जमीन से न जाने कितने रिश्ते जुड़े होते हैं, और न जाने कितने स्वार्थ भी। सुरेश के पिताजी पिछले आठ महीनों से बीमार थे। अब वो छोटे बेटे के साथ देहरादून में रहते थे। सुर...

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गुण्टी - स्टोरी by Renu Husen By Dr Sandip Awasthi

“गुण्टी...गुण्टी... । जाने कहाँ गई है गुण्टी सुबह-सुबह? आज इतनी सुबह कैसे जग गई? ज़रुर खिड़की से निकल गई होगी गुट....गुट....ट”। “अम्मा, क्यों परेशान होती हो। कूदत...

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नेट नहीं तो कुछ नहीं By Vandna Sharma

सोहन आज सुबह से परेशान था। बार-बार अपना मोबाइल चेक कर रहा था। शायद कुछ जरूरी मेल आने वाला था। दो दिन से हल्की बारिश हो रही थी। खराब सिग्नल आ रहे थे, नेट काम नहीं कर रहा था। ऑफिस मे...

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अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे By Sajid Ahmad

अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजेशाम की जाती हुई रोशनी के साथ अब स्ट्रीट लाइट की हल्की पीली रौशनी रास्तों पर अपनी जगह बनाने लगी थी, आती जाती गाड़ियां और किनारे चलते हुए लोगों...

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नियति का खेल By Vandna Sharma

कहानी: नियति का खेलरविवार का दिन था। सीमा फोन में फेसबुक पर अपनी कविता पर आई पाठकों की प्रतिक्रिया पढ़ रही थी। तभी उसकी नजर एक नाम पर रुक गई। रिद्धि ने उसकी कविता पर प्रतिक्रिया दी...

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ऊंची छलांग By Deepak sharma

                   जब एक बड़े शहर के जाने- माने अस्पताल में मेरी नियुक्ति हुई तो मैं फूली न समायी।        &nbs...

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ऑनलाइन शॉपिंग By Vandna Sharma

आर्यन के बेटे का दो दिन बाद जन्मदिन था। उसने अपने मम्मी-पापा को गाँव से बुलाने के लिए कहा। उसके पिता सुरेश ने इतनी जल्दी आने में असमर्थता जताते हुए कहा कि मैं अभी स्टेशन गया भी टिक...

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दिल्ली जिमखाना क्लब By Devendra Kumar

दिल्ली जिमखाना क्लब   दिल्ली  के बड़े  बड़े लोगों की जान और शान इस दिल्ली जिमखाना  क्लब के लगता है बुरे दिन आ गए हैं, पर यह तो एक दिन होना ही था.  संत कबीर ठीक ही कह गये है :- ‘सब दि...

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Fake Boyfriend real Feelings - 1 By Mawaskar Pratigya

झूठ बोल कर निकली, ये कहानी शुरू होती है एक झूठ से, प्रतिज्ञा ने अपने घर पर सबको बोला था, कि वो कॉलेज ट्रिप पर जा रही है, लेकिन सच ये था कि, ये कोई आम कॉलेज ट्रिप नहीं थी, ये एक कपल...

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समय का चक्र _एक रियासत का अंत By Vandna Sharma

समय का चक्र_ एक रियासत के अंत की कहानी बात उस समय की है जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। छोटी-छोटी रियासतें हुआ करती थीं। रियासतें क्या साहब यूं कहिए अंग्रेज जिस कर्मचारी से खुश हो...

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सावन आया ही नहीं By Vandna Sharma

सावन नहीं आया जुलाई का उमस भरा मौसम। हवा तो बस नाम मात्र की चल रही थी। सड़ी हुई गर्मी पड़ रही थी। ईश्वर भी जैसे मानसून के साथ मजाक ही कर रहे थे। बादल आते तो जरूर लेकिन बरसते नहीं।...

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मिट्टी की महक By Vandna Sharma

मिट्टी की महक  रवि के बच्चे शहरी जिंदगी से बोर हो चुके थे। सुबह से जिद कर रहे थे - कहीं फार्महाउस पर घुमाने ले चलो। वहाँ बहुत सारी गतिविधियां होती हैं। रवि चुपचाप अपने कम्प्यूटर मे...

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कॉल - 3 By sky

आर्य अंदर आता है और कमरे को ध्यान से देखने लगता है। उसे सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगता है। वह मान लेता है कि यह सब सिर्फ एक सपना था। वह जैसे ही बिस्तर पर लेटने वाला होता है, तभी उसका...

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सिंधु संधि पर विराम By Mayuresh Patki

भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सिंधु जल संधि सबसे महत्वपूर्ण और लंबे समय तक प्रभावी रहने वाले समझौतों में से एक मानी जाती है। 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस...

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गोल रोटी By Priyanka Gupta

"प्रिया, हाँ माँ..." कमरे में बैठी प्रिया ने किचन से आ रही आवाज़ की तरफ मुँह करके कहा।"यहाँ आ जा," ये आवाज़ उसकी माँ, सरिता की थी। प्रिया उठी और किचन की तरफ दौड़ पड...

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अंत भला तो सब भला। By Vandna Sharma

आज मौसम सुहावना हो रहा था। आसमान में बादल छाए हुए थे। हल्की बारिश हो रही थी। धरती पर पानी टप टप टपक रहा था। बहुत दिनों बाद बारिश हुई थी पहली बारिश के बाद मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशब...

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यादों की पोटली By Vandna Sharma

वो दिन भी क्या दिन थे  जानकी देवी की लड़की की शादी थी आज। घर फिर भी सूना लग रहा था। कोई रिश्तेदार नहीं आया था। जो आस-पड़ोस के जान-पहचान वाले थे वो भी रात को ही आयेंगे सिर्फ खाना खा...

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ऑनलाइन राखी By Vandna Sharma

रक्षाबंधन  प्रीति सुबह का काम खत्म कर, बच्चों का टिफिन पैक कर अपनी साहित्यक पत्रिका पढ़ने बैठी। तभी दरवाजे की डोरबेल बजी जैसे ही दरवाजा खोला सामने अपनी बहन अदिति को देख खुशी से उछल...

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तीज का सिंधारा By Vandna Sharma

आज तनु अपनी दोस्त प्रीति से मिलने उसके घर गई थी। बहुत दिनों बाद दोनों दोस्त मिलीं थीं। एक दूसरे को देख दोनों खुशी से चहकते हुए गले मिली। प्रीति अपना घर दिखाने लगी तनु को। अपने बेडर...

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अंतिम यात्रा By Vandna Sharma

अंतिम यात्रा  कहानी  'अंतिम यात्रा' शब्द सुनकर ही दिल काँपने लगता है। यह समय सभी को आना है। दुनिया का अंतिम सत्य भी यही है। दुनिया में लाखों लोग रोज मरते हैं। दिल दहल जाता...

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हन्सु के प्रेम की नैया By Rakesh Kumar Sharma

हमारे सभ्य समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से अपनी आजिविका कमाने के लिए प्रयासरत है। कुछ विशेष प्रवृति के प्राणी भी हमारे इसी समाज में पाये जाते हैं जो दिन-भर कुछ नहीं...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 By miss k

आपको पता ही होगा की थोड़े दिन पहले ही फ़ादर्स डे गया तभी मेरे मन में एक विचार आया कि पापा तो रोज ही स्पेशल होते हैं तो फिर फ़ादर्स डे मनाने की तो कोई जरूरत हे ही नहीं। पहले इतना को...

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तैयारी के भंवर में कैद जवानी By Kapil Tiwari

आज मन काफी उदास है। मुझे प्रयागराज के एक छोटे से कमरे में रहते हुए लगभग तीन साल हो गए हैं। इस बंद कमरे में रहते-रहते अब मन में बार-बार यही सवाल उठता है कि आखिर और कब तक? कब तक सरका...

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देसी जुगाड बड़ा कमाल By Vandna Sharma

लोक कथा  देशी जुगाड बड़ा कमाल एक समय की बात है। किसी गाँव में एक पंडित जी रहते थे। वो थोड़ा कम पढ़े-लिखे थे लेकिन बुद्धि बहुत थी उनके पास। आध्यात्मिक ज्ञान भी था। गाँव में उनके ज्ञ...

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दंगा By Virendra Devangan

एक नगर में जाने किस बात पर दंगा भड़का कि दंगाई खून की होली खेलने लगे। वहां देखते-ही-देखते रक्तरंजित लाशें बिछ गईं। जबरदस्त आगजनी हुई। घर-के-घर फूंक डाले गए। मोटरगाड़ियां धू-धू कर जल...

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बुआ By Vandna Sharma

---बुआ - महक की कहानी आज सबसे उपेक्षित रिश्ता है बुआ। कोई नहीं बुलाना चाहता बुआ को। बुआ के नाम से ही घर की बहुओं के मुँह बन जाते हैं। पहले होती होंगी बुआ रुआब, मैंने तो आज तक नहीं...

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ये सब इतना Complicated क्यों है ? By InkImagination

सब इतना उलझा हुआ क्यों है? यह सवाल अक्सर उन पलों में उठता है जब ज़िंदगी अचानक अपनी रफ्तार बदल देती है। कभी-कभी कोई इंसान हमारी ज़िंदगी में बिना किसी पूर्व सूचना के आता है। शुरूआत ब...

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कोन्निचिवा: माय देसी लव - 2 By Kajal Soam

परिदृश्य: जयपुर की हलचल भरी सड़कें और शिवानी का संघर्ष।जयपुर की दोपहर अपनी पूरी रंगत में थी। हवा में आमेर के किलों की खुशबू और बाज़ारों का शोर घुला हुआ था। शिवानी आज 'सीतापुरा इं...

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बहु पुराण By Vandna Sharma

*'बहु-पुराण' - ये कहानी नहीं, हर उस औरत का दस्तावेज है जिसने गाँव की मिट्टी से शहर के अकेलेपन तक का सफर तय किया है।*शीर्षक: बहु-पुराण*  *- सुबह से बारिश हो रही थी। मौसम सुह...

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अनबुझा चूना By Deepak sharma

                 घड़ी में तीन बजे थे जब जाई बिस्तर से उठ कर बैठ ली थीं।                  &...

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पढ़ाकू By Vandna Sharma

*'किरन' - ये सिर्फ एक शिष्या की कहानी नहीं है, ये हर उस गुरु की जीत है जो बच्चों में 'इंसान' बनाता है।यह कहानी मेरी शिष्या की है। उससे मेरा परिचय एम.ए. की कक्षा के...

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मेरा एक दिन का प्यार By Ubaid ali

( मेरा एक दिन का प्यार )साल 2016 pnb बैंक की लाइन, आपको याद होगा जब हमारे देश में नोटबंदी हुयी थी तो सब लोग नोट बदलवाने के लिए लाइनों में लग रहे थे. इत्तीफाक से मुझे भी पैसे निकालन...

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राई- भर मरहम By Deepak sharma

                  बिजली की तार बेचने वाली अपनी दुकान की सीढ़ियों पर उस छोटे बच्चे को देख कर पहले तो मैं हैरान हुआ।      ...

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सुभीता By Deepak sharma

                मेरे लिए दरवाज़ा बहन ने खोला।                 “और कौन आया है?” अंदर के ब...

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गेंदा रानी By Deepak sharma

लेखिका: दीपक शर्मा                    ड्यूटी रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर के साथ मैं ने अपना अराइवल टाइम दर्ज किया : दो बजे।  ...

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