hindi Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं

    चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स...

  • जल-समाधि

    ‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोग...

  • अरविन्द बाबू

    हमलोगों के आदि पुरखा पं.देवदत्त राम त्रिपाठी थे।उनके पांच पुत्र हुए-पं.विशेषर रा...

टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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मेरी जिंदगी का सफर 8 By Ankit Khatri

संघर्ष और टूटना कभी-कभी जिंदगी में ऐसा वक्त आता है, जब इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी उसे लगता है कि उसके पास कुछ नहीं है।मेरी जिंदगी में भी एक ऐसा दौर आया।बाहर से देखने पर शायद म...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ" और "ना"...

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बरबस By Deepak sharma

                  इस बीती का पूर्वापर संबंध हम बहन- भाई के बचपन से है।                बीती को ट...

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सादगी By Rajeev kumar

    उसको ऐसा लगा था कि बात बहुत लम्बी चलेगी, दुर तक जाएगी, अपना ज्ञान बघारूंगा, इधर-उधर की कुछ बातें करूंगा। सच और झुठ मिश्रीत बातों का प्रयोग करके , इसकी बोलती बंद रखुंगा और सामने...

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दो शहर एक सपना By Bihari Lal Chouhan

दो शहर एक सपनारायगढ़ की लाल मिट्टी से निकला था रघु। उसके हाथों में फावड़ा था और आँखों में एक सपना - अपना एक पक्का मकान। रायगढ़ में काम था पर पैसा कम। किसी ने बताया - "मंदसौर चला जा...

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सजा.....बिना कसूर की - 13 By Soni shakya

बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??और फिर भूमि को स्वीकार करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??सरल बोली --मै आपकी बात समझती  हूं ब...

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बचपन By Rajeev kumar

रंग-बिरंगी तीतलियों ने दिवाना बना रखा था। मनमोहक रंगों की आकर्षक तीतलियों के पीछे बच्चे पागल हुए जा रहे थे। बच्चे तो बच्चे हैं, इतनी सारी तीतलियों के पीछे न लग कर एक ही तीतली के पी...

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वजहें By Virendra Dewangan

किसी जमाने में गांवों में समाचार या गाना सुनने का एकमेव माध्यम रेडियो या ट्रांजिस्टर हुआ करता था। जो लोग संपन्न व शौकीन थे, वे अपनें मनोरंजन, समययापन और शान के लिए इसे रखा करते थे।...

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कमरा नंबर 17 By Bittu Jain

रात के ठीक बारह बजे अनन्या के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।कमरा नंबर 17 मत खोलना।अनन्या ने मैसेज पढ़ा और फोन एक तरफ रख दिया।उसे लगा किसी ने मजाक किया है।वह जिस पुराने हॉस्टल म...

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पितृ दोष By Vandna Sharma

बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मोहन अपनी बीवी के साथ शहर में किराए पर रहता था। बाबूराम का गाँव में बड़ा सा घर था। उसने अपने बेटे-बहू...

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गाँव का लगाव By Deepak Kumar Tiwari

शहर की भागदौड़ से दूर, अमित पूरे पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटा था। गांव के पगडंडी पर चलते-चलते उसको बचपन की यादें आने लगी उसका बचपन इसी गांव में बीता था। उसके पिता जी के ग...

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दूध बताशा राजा खाए By Deepak sharma

  समर वेकेशन के बाद हमारा कालेज जब खुला तो हमारे मनोविज्ञान विभाग में एक बड़ा सरप्राइज़ हमारी प्रतीक्षा में था। 38- वर्षीया हमारी विभागाध्यक्षा का मेक-ओवर। एकदम नए स्टाइल में...

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अरविन्द बाबू By Prafulla Kumar Tripathi

हमलोगों के आदि पुरखा पं.देवदत्त राम त्रिपाठी थे।उनके पांच पुत्र हुए-पं.विशेषर राम,शंकर राम,चंदर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम त्रिपाठी।विशेषर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम की आगे की वं...

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मृत्यु के बाद की यात्रा एक आत्मा की अनजानी दुनिया की ओर यात्रा By Aloka Patel

मृत्यु…यह शब्द सुनते ही इंसान के मन में एक अनजाना डर पैदा हो जाता है।मृत्यु के बाद क्या होता है?क्या सब कुछ समाप्त हो जाता है?क्या आत्मा सचमुच शरीर छोड़कर कहीं जाती है?क्या हम फिर...

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एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 4 By Aloka Patel

भाग ४ — पत्नी की शिकायतेंरात को हर्ष का मैसेज पढ़ने के बाद भी मिहिर को नींद नहीं आई।निशा उसके बगल में सो रही थी।मिहिर छत की ओर देख रहा था।पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ बदल गया था।पा...

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The Diary Of Pankaj - Hindi Edition By Pankaj Modak

The Diary Of Pankaj Hindi EditionBy Pankaj Modak Published By TDOP Publisher, 2026.Copyright Page:- While every precaution has been taken in the preparation of this book, the publi...

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घर की देहरी, पुरुष का दायित्व और सामाजिक ताने By Shivam Kumar Pandey

भारतीय समाज में सदियों से पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं को लेकर कुछ अघोषित नियम तय रहे हैं। पारंपरिक व्यवस्था में माना जाता रहा है कि पुरुष का मुख्य काम घर से बाहर जाकर आजीविका कम...

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अहमदाबाद के चर्चे By Devendra Kumar

अहमदाबाद के चर्चे            अहमदाबाद में बिताये उन दिनों को भुलाना बड़ा मुश्किल है. तब वह मुसीबत थी कठिन समय था  केवल मेरा ही नहीं बल्कि सभी का. वे कोई सामान्य दिन नहीं थे साधारण स...

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रिश्तों का बाजार By Vandna Sharma

रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी के लिए चूड़ियों का सुंदर सेट, भतीजी के...

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आज का समाज, आज के रीति-रिवाज By Aloka Patel

आज का समाज, आज के रीति-रिवाजएक बदलते समाज की कहानीलेखक: अलोका पटेलअध्याय १ — बदलता समयसमय कभी एक जगह ठहरकर नहीं रहता।कल जो बात हमें असामान्य लगती थी, वह आज सामान्य हो गई है। और आज...

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सावन By Rakesh Kumar Sharma

सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की काली छाया और लम्बी हो चली थी। इसी नीम की छाया में लखपत अपनी चारपाई पर औंधे मुंह लेटा हुआ था। काफी देर...

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राखी सिर्फ धागा नहीं होती By Nisha Choudhary

सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपनी किताबों की अलमारी के सबसे निचले दराज में एक पुरानी लकड़ी की डिब्बी ढूंढ रहा था।उस डिब्बी में कोई क...

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मुर्दो से प्यार By Vandna Sharma

मीना बहुत दिनों बाद अपने मायके जा रही थी। ट्रेन से उतर कर उसने रिक्शा किया। "भैया, नई बस्ती जाना है।""20 रुपये लगेंगे।" रिक्शा वाला बोला।घर पहुँचकर जैसे ही मीना सामान उतार कर पैसे...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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मेरी जिंदगी का सफर 8 By Ankit Khatri

संघर्ष और टूटना कभी-कभी जिंदगी में ऐसा वक्त आता है, जब इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी उसे लगता है कि उसके पास कुछ नहीं है।मेरी जिंदगी में भी एक ऐसा दौर आया।बाहर से देखने पर शायद म...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ" और "ना"...

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बरबस By Deepak sharma

                  इस बीती का पूर्वापर संबंध हम बहन- भाई के बचपन से है।                बीती को ट...

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सादगी By Rajeev kumar

    उसको ऐसा लगा था कि बात बहुत लम्बी चलेगी, दुर तक जाएगी, अपना ज्ञान बघारूंगा, इधर-उधर की कुछ बातें करूंगा। सच और झुठ मिश्रीत बातों का प्रयोग करके , इसकी बोलती बंद रखुंगा और सामने...

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दो शहर एक सपना By Bihari Lal Chouhan

दो शहर एक सपनारायगढ़ की लाल मिट्टी से निकला था रघु। उसके हाथों में फावड़ा था और आँखों में एक सपना - अपना एक पक्का मकान। रायगढ़ में काम था पर पैसा कम। किसी ने बताया - "मंदसौर चला जा...

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सजा.....बिना कसूर की - 13 By Soni shakya

बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??और फिर भूमि को स्वीकार करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??सरल बोली --मै आपकी बात समझती  हूं ब...

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बचपन By Rajeev kumar

रंग-बिरंगी तीतलियों ने दिवाना बना रखा था। मनमोहक रंगों की आकर्षक तीतलियों के पीछे बच्चे पागल हुए जा रहे थे। बच्चे तो बच्चे हैं, इतनी सारी तीतलियों के पीछे न लग कर एक ही तीतली के पी...

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वजहें By Virendra Dewangan

किसी जमाने में गांवों में समाचार या गाना सुनने का एकमेव माध्यम रेडियो या ट्रांजिस्टर हुआ करता था। जो लोग संपन्न व शौकीन थे, वे अपनें मनोरंजन, समययापन और शान के लिए इसे रखा करते थे।...

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कमरा नंबर 17 By Bittu Jain

रात के ठीक बारह बजे अनन्या के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।कमरा नंबर 17 मत खोलना।अनन्या ने मैसेज पढ़ा और फोन एक तरफ रख दिया।उसे लगा किसी ने मजाक किया है।वह जिस पुराने हॉस्टल म...

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पितृ दोष By Vandna Sharma

बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मोहन अपनी बीवी के साथ शहर में किराए पर रहता था। बाबूराम का गाँव में बड़ा सा घर था। उसने अपने बेटे-बहू...

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गाँव का लगाव By Deepak Kumar Tiwari

शहर की भागदौड़ से दूर, अमित पूरे पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटा था। गांव के पगडंडी पर चलते-चलते उसको बचपन की यादें आने लगी उसका बचपन इसी गांव में बीता था। उसके पिता जी के ग...

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दूध बताशा राजा खाए By Deepak sharma

  समर वेकेशन के बाद हमारा कालेज जब खुला तो हमारे मनोविज्ञान विभाग में एक बड़ा सरप्राइज़ हमारी प्रतीक्षा में था। 38- वर्षीया हमारी विभागाध्यक्षा का मेक-ओवर। एकदम नए स्टाइल में...

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अरविन्द बाबू By Prafulla Kumar Tripathi

हमलोगों के आदि पुरखा पं.देवदत्त राम त्रिपाठी थे।उनके पांच पुत्र हुए-पं.विशेषर राम,शंकर राम,चंदर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम त्रिपाठी।विशेषर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम की आगे की वं...

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मृत्यु के बाद की यात्रा एक आत्मा की अनजानी दुनिया की ओर यात्रा By Aloka Patel

मृत्यु…यह शब्द सुनते ही इंसान के मन में एक अनजाना डर पैदा हो जाता है।मृत्यु के बाद क्या होता है?क्या सब कुछ समाप्त हो जाता है?क्या आत्मा सचमुच शरीर छोड़कर कहीं जाती है?क्या हम फिर...

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एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 4 By Aloka Patel

भाग ४ — पत्नी की शिकायतेंरात को हर्ष का मैसेज पढ़ने के बाद भी मिहिर को नींद नहीं आई।निशा उसके बगल में सो रही थी।मिहिर छत की ओर देख रहा था।पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ बदल गया था।पा...

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The Diary Of Pankaj - Hindi Edition By Pankaj Modak

The Diary Of Pankaj Hindi EditionBy Pankaj Modak Published By TDOP Publisher, 2026.Copyright Page:- While every precaution has been taken in the preparation of this book, the publi...

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घर की देहरी, पुरुष का दायित्व और सामाजिक ताने By Shivam Kumar Pandey

भारतीय समाज में सदियों से पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं को लेकर कुछ अघोषित नियम तय रहे हैं। पारंपरिक व्यवस्था में माना जाता रहा है कि पुरुष का मुख्य काम घर से बाहर जाकर आजीविका कम...

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अहमदाबाद के चर्चे By Devendra Kumar

अहमदाबाद के चर्चे            अहमदाबाद में बिताये उन दिनों को भुलाना बड़ा मुश्किल है. तब वह मुसीबत थी कठिन समय था  केवल मेरा ही नहीं बल्कि सभी का. वे कोई सामान्य दिन नहीं थे साधारण स...

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रिश्तों का बाजार By Vandna Sharma

रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी के लिए चूड़ियों का सुंदर सेट, भतीजी के...

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आज का समाज, आज के रीति-रिवाज By Aloka Patel

आज का समाज, आज के रीति-रिवाजएक बदलते समाज की कहानीलेखक: अलोका पटेलअध्याय १ — बदलता समयसमय कभी एक जगह ठहरकर नहीं रहता।कल जो बात हमें असामान्य लगती थी, वह आज सामान्य हो गई है। और आज...

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सावन By Rakesh Kumar Sharma

सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की काली छाया और लम्बी हो चली थी। इसी नीम की छाया में लखपत अपनी चारपाई पर औंधे मुंह लेटा हुआ था। काफी देर...

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राखी सिर्फ धागा नहीं होती By Nisha Choudhary

सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपनी किताबों की अलमारी के सबसे निचले दराज में एक पुरानी लकड़ी की डिब्बी ढूंढ रहा था।उस डिब्बी में कोई क...

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मुर्दो से प्यार By Vandna Sharma

मीना बहुत दिनों बाद अपने मायके जा रही थी। ट्रेन से उतर कर उसने रिक्शा किया। "भैया, नई बस्ती जाना है।""20 रुपये लगेंगे।" रिक्शा वाला बोला।घर पहुँचकर जैसे ही मीना सामान उतार कर पैसे...

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