hindi Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • काण विवाह

    (यह कहानी छत्तीसगढ़ी भाषा में ना लिखकर साधारण भाषा में लिखी गई है)  छत्तीसग...

  • गंगा की पुकार

    गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)...

  • नीरव आस

    नीरव आसरात के ठीक दो बजे थे। मोबाइल की तीखी घंटी ने सन्नाटे को ऐसे चीर दिया जैसे...

काण विवाह By Veena Vij

(यह कहानी छत्तीसगढ़ी भाषा में ना लिखकर साधारण भाषा में लिखी गई है)  छत्तीसगढ़ में सबसे घने जंगल को नंदनवन कहते हैं। यहां कुठामुड़ा गांव में हाथी बहुत होते हैं । यहां के लोग रा...

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जीएसटी और इनकम टैक्स भ्रष्टाचार By JUGAL KISHORE SHARMA

नियमों के नाम पर डर का कारोबार देखा है,हमने सिस्टम में खुला भ्रष्टाचार देखा है।नोटिस भी अब यहाँ न्याय नहीं, हथियार बने,हर कदम पर शोषण का विस्तार देखा है।कानून की हर पंक्ति अलग मतलब...

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मिठास ज़िंदगी की By Rakesh Kaul

मिठास ज़िंदगी की बीना के जाने के बाद आज मैं ख़ुद को बिलकुल तन्हा महसूस कर रहा हूँ | इतना लम्बा वक़्त साथ गुज़ारने के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के इस कद्र आदी हो जाते हैं कि वे उनके बिना र...

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मुनक्का के बीज By राज बोहरे

कहानी : राजनारायण बोहरे   मुनक्का के बीज   वैद्य जी ने सिल्ली  की नब्ज पर उँगली रखी। आँखें बंद करके चुप हो के बैठ गये, जैसे किसी गहरे गणित में डूब गए हों। वैद्य जी उम्र से अधेड़ थे...

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साँझ का करघा By राज बोहरे

साँझ का करघा उस घर की लय घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि करघे की उस निरंतर होने वाली 'खट-खट' से तय होती थी जो कभी रुकती नहीं थी। दीनू के उस संकरे और नीची छत वाले कमरे की हवा कभी साफ...

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कारखाना By राज बोहरे

कहानी: कारखाना    “आप अगर मेरा साथ दोगे तो मैं अपने कारखाने को मिला इतना बड़ा ऑर्डर स्वीकार कर पाऊंगा… नहीं तो मैं मना कर देता हूँ।” तरुण भल्ला की आवाज़ में एक अजीब-सी सधी हुई नरमी...

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घर लौटती पगडंडी By राज बोहरे

कहानी: घर लौटती पगडंडी मचान पर खड़ा ज्ञान सिंह दूर तक फैले खेत को देख रहा था। गेहूं की सुनहरी फसल अब कटकर ढेरों में बदल चुकी थी। हवा में भूसे की हल्की गंध तैर रही थी। उसने आंखें मि...

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खलनायक By Ramesh Desai

                           खलनायक ??  रंजन कुमार देसाई                                 कल उस ने दोबारा ख़ुदकुशी करने का प्रयास किया था. उस वजह से भरत समेत कोई रात को सो नहीं पाया था...

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जड़ें By राज बोहरे

जड़ें  सावित्री देवी अक्सर खिड़की के पास बैठ जातीं। बाहर लगे नीम के पेड़ को देखतीं और सोचतीं— “जैसे इस पेड़ की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं, वैसे ही इंसान की जड़ें उसके परिवार से जुड़...

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गंगा की पुकार By Shivraj Bhokare

गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)भाइयों और बहनों,ज़रा ठहरकर सोचिए। एक 86 साल का वृद्ध। कोई साधारण व्यक्ति नहीं—आईआईटी कानपुर का पूर्व...

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हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया By Devendra Kumar

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया उस दिन लोधी रोड श्मशान घाट में खाकी वर्दी में बहुत लोग उपस्थित थे, विद्युत् शवदाह अर्थात  इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम के पास ही एक तरफ दो बिगुलर भी चुपच...

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सेंध By राज बोहरे

                                              सेंध धूप की एक धार मंदिर के अधबने प्रांगण में तिरछी कटती हुई गिर रही थी। हवा में महीन धूल तैर रही थी—इतनी हल्की कि दिखती नहीं, पर सांस...

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इन गुड फ़ेथ By Deepak sharma

                   सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा के बाद हुई लंबी छुट्...

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कर्ज़ By राज बोहरे

                                                           कर्ज़ हेड क्लर्क नागर ने अपनी मेज़ पर रखी पीतल की पुरानी घंटी को उँगलियों से दो बार थपथपाया—“टन्… टन्…”। दफ्तर की दीवारों...

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डर By राज बोहरे

                                                          डर   शाम उतर रही थी—धीरे-धीरे, जैसे किसी बूढ़े लेखक की कलम थककर कागज़ पर रेंग रही हो। दफ्तर की घड़ी ने पाँच बजाए, और दिनेश...

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टूटकर भी मुस्कुराती रही By aakanksha

पूर्वांचल के एक छोटे से गाँव में नंदिनी रहती थी—मिट्टी के घर, कच्ची गलियाँ और सपनों से भरी आँखें। घर में गरीबी थी, लेकिन उसके इरादे बहुत अमीर थे। माँ अक्सर कहतीं—“बेटी, जिंदगी आसान...

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डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 By Std Maurya

मैंने हल्के गुस्से और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा,“अभी जाकर शिकायत कर ले, चुड़ैल।”अंकिता भी पीछे हटने वाली कहाँ थी, वह तुरंत बोली,“अभी तो बोलोगे ही, जब घर से दूर हो तो।”मैंने हँसते हुए...

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आपदधर्म By Deepak sharma

आपदधर्म                    “चरण- स्पर्श, ताऊजी,” बाहर के बरामदे से बहू की आवाज़ मेरे कमरे तक चली आई।    &nbsp...

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कुछ रिश्ते खत्म होकर भी… By Makvana Bhavek

रात के 11 बजे थे। शहर की सड़कों पर सन्नाटा धीरे-धीरे फैल रहा था। स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी सड़क पर लंबी परछाइयाँ बना रही थी।   एक आदमी बेचैनी से सड़क किनारे टहल रहा था। उसके हाथ...

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नीरव आस By राजनारायण बोहरे

नीरव आसरात के ठीक दो बजे थे। मोबाइल की तीखी घंटी ने सन्नाटे को ऐसे चीर दिया जैसे किसी शांत तालाब में अचानक पत्थर फेंक दिया गया हो। चंपा की नींद हड़बड़ा कर खुली। आँखें आधी खुली थीं,...

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अधूरी सी दोस्ती... पूरी सी कहानी By Piyu soul

चैप्टर: “वो दोस्त जो दिल के बहुत पास था”कॉलेज का पहला दिन था…हर तरफ नए चेहरे, नई आवाज़ें, नई शुरुआत की हलचल थी। उसी भीड़ में एक लड़की खड़ी थी—आर्या। हाथ में फाइल, चेहरे पर हल्की सी...

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परछाईं By राजनारायण बोहरे

परछाइयाँअसीर उस दिन चौके के कोने में बैठा थाली को ऐसे घूर रहा था जैसे उसमें रोटी नहीं, कोई सवाल रखा हो—जिसका जवाब उसके पास नहीं है। दाल की सतह पर जमी पतली-सी परत बार-बार काँप जाती,...

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बोधिवृक्ष और हम By Std Maurya

प्रियांशी की नींद अचानक टूटी, वह हड़बड़ाकर जागी और घबराते हुए बोली, "अरे... क्या हुआ?"​अंकिता ने चुटकी लेते हुए मज़ाक किया, "कुछ नहीं हुआ... बस सुबह हो गई है! अब उठ भी जाओ... जो एक...

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सच और झूठ के मध्य By Alok Mishra

उमेश अब पीठ से हाथ सामने ले आया और धीरे से उभारों को सहलाने लगा ।  कमरा शांत था उमा ने घबरा कर आंखें बंद कर ली ।

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2:30 Am By Neha kariyaal

सब लोग है यहां बस मैं ही नहीं हूं क्योंकि हम human being कम और Deta points ज्यादा लगते हैं।हम सबका अधिकतर समय screen पर गुजरता है, हम सब पास तो हैं पर साथ कोई नहीं। तो कभी कभी लगता...

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मौन से जागरण तक By Anant Dhish Aman

एक गाँव था—छोटा, शांत और अपनी सहजता में अद्भुत।सुबह की पहली किरण जब कच्ची गलियों को छूती, तो लगता जैसे प्रकृति स्वयं वहाँ आशीर्वाद बनकर उतर आई हो।वहाँ की मिट्टी में विश्वास की गंध...

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समय का सौदागर। By Jeetendra

शहर के पुराने हिस्से में एक बहुत छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। बाहर से देखने पर वह दुकान किसी साधारण, भुला दिए गए कोने जैसी लगती थी। धूल से ढकी कांच की खिड़की, दीवारों पर पीतल की पुरान...

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देट वूमेन By Pankaj Modak

देट वूमेन [शॉर्ट स्टोरी]एक स्त्री जिसकी शादी कुछ वर्षों पहले हुई। शादी से पहले वह स्कूल गई थी। होली का दिन था। एक लड़का लाल सिंदूर उसके माथे पर लगा देता है और भाग जाता है। परिवारवा...

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खुलासा By Deepak sharma

                 “मां ने बैंंक में अपना खाता कब खोला?” मां की स्मृतियों में से एक नई कड़ी मैं ने खोलनी चाही। उनकी मृत्यु के...

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नेता जी By Rajeev kumar

उन्होंने वाणी को विराम देना ही आवश्यक समझा। उन्होंने अपने ही जवाब से कई सवाल खड़े कर दिए थे। अपनी मानसिकता छुपाने के चक्कर में छुपी हुई मानसिकता को उन्होंने उजागर कर दिया था। विकास...

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अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर By Rakesh Kaul

अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूँ तो यक़ीन ही नहीं होता कि मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की वही मासूम सी छोटी लड़की गोमती हूँ जो कभी अकेले बाज़ार जाने से भी हिचकिच...

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वो दोस्त… जो याद बन गया By Angel

शुरू करने से पहले एक शेर याद आता है।ऐसे रिश्तों के लिए, जिनकी कोई परिभाषा नहीं होती—Gulzar“दिल में कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं,जिनका नाम नहीं होता…पर एहसास उनकी मौजूदगी काहर वक्त हो...

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चकरी गिरह By Deepak sharma

                   “आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय  महिला डिग्री कालेज का एक चपर...

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और एक प्रयास By Rajeev kumar

’’ हालात से समझौता सभी करते हैं, मगर पापा, मैं हालात से कुछ वर्ष और लड़ना चाहता हूं, जुझना चाहता हूं मुश्किलों से। हमको मालूम है कि आप जो भी कह रहे हैं अपने अनुभव के आधार पर ही कह र...

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चाचा एन.आर.आई. By Makvana Bhavek

अहमदाबाद की एक तंग लेकिन जिंदादिल गली में शाम ढल रही थी। नुक्कड़ की चाय की दुकान पर भाप से ज्यादा अफवाहें उड़ रही थीं। प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा गौरव पटेल अपनी किस्मत को कोस रहा...

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नियति (नसीब) :एक सत्य घटना पर आधारित By pink lotus

    ​लोग कहते हैं नसीब खराब है... पर सच तो कुछ और ही है।​हम सब कहते हैं कि "मेरा नसीब खराब है," "मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?" लेकिन रियलिटी पता है क्या है? नियति (Destiny) तुम्ह...

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ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस देत By Devendra Kumar

ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस दे उपरोक्त देशी कहावत मैंने दो अवसरों पर सुनी थी, दोनों अलग सन्दर्भ थे अलग अलग तरह लोगों के मुंह से इसे सुना था. पहली बार तो कहावत बूढ़े गौ पुत्र वृषभ क...

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निशानी By कमल चोपड़ा

​निशानी                                    कमल चोपड़ा     ​सात आठ दिन ऊपर हो गये थे। वह माँ बनने वाली है जब वह यह खबर अपने पति को देगी तो वह भी खुशी से झूम उठेगा। लेकिन यह 'गुड...

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वो कौन थी By S Sinha

                                                                               वो कौन थी       तपन घोष  और मैंने एक साथ एक जहाज कंपनी में नौकरी ज्वाइन किया था  . दोनों ने  कंपनी के...

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कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश मोबाईल न. 7648959825यह कहानी पूर्ण रूप से सत्य है। इसमें कोई काल्पनिक बातें नहीं हैं, बल्कि इसे सच्चाई के रंगों से सजाया गया है। यह घटना आज से ल...

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राजा दाहिर सेन - सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राट By Chintansinh Jadav

राजा दाहिर सेन – सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राटभारत के इतिहास में कई ऐसे वीर योद्धा हुए हैं जिनकी गाथाएँ समय के साथ धुंधली पड़ गईं। उन्हीं में से एक थे राजा दाहिर — सिंध प्रदेश...

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ऐसे ही क्यों होता हैं? - 2 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य दूरभाष -917648959825  2 मार्च 2026यह कुछ ही दिन पुरानी बात है। मैं अक्सर सोशल मीडिया पर दो-चार लाइनें लिखकर पोस्ट किया करता हूँ, जो लोगों को काफी पसंद आती हैं। ए...

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 By Std Maurya

भाग -1. लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश भारत मोबाईल न. 7648959825 हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर...

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उल्टाआप By कमल चोपड़ा

                            उल्टा आप                          कमल चोपड़ा  ​                 लड़की को मास्टर जी के घर से निकलते देखकर देखने वालों की आँखों से आग की लपटें निकलने लगी थ...

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एक सपना क्या हो पाएगा अपना? By Rishav raj

उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव सीतामढ़ी के पास बसे एक साधारण से गाँव में एक लड़का रहता था — उसका नाम था आरव। गाँव बहुत छोटा था, कच्ची सड़कें, मिट्टी के घर, और चारों तरफ खेत। वहाँ के...

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खुदकुशी By कमल चोपड़ा

खुदकुशी                      कमल चोपड़ा        ​रातभर तेज़ आंधी के साथ बरसात और ओले उन दोनों के दिलो-दिमाग पर हथगोलों की तरह गिर रहे थे। रह-रहकर सतवंत सिंह खेत पर जाने के लिये उठ ख...

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लिव-इन By कमल चोपड़ा

लिव-इन                           कमल चोपड़ा                                ​अरुण उसे रास्ते में अचानक मिल गया था। पहले वह एक ऑफिस में उसके साथ ही काम करता था। इधर-उधर की बातों के ब...

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मैं हो रहा हूॅं By kunal kumar

कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।___________________________“तू फिर उसी पेड़ के पास बैठा है?” माँ ने पूछा। लड़का मुस्कुराया नहीं।बस धी...

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चंगुल By कमल चोपड़ा

चंगुल                            कमल चोपड़ा                        ​लड़की का चेहरा नहीं दिखाया गया था। धुंधले अक्स और आवाज़ के ज़रिए ही माँ-बाबूजी ने पहचान लिया था। उन्होंने कभी सो...

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काण विवाह By Veena Vij

(यह कहानी छत्तीसगढ़ी भाषा में ना लिखकर साधारण भाषा में लिखी गई है)  छत्तीसगढ़ में सबसे घने जंगल को नंदनवन कहते हैं। यहां कुठामुड़ा गांव में हाथी बहुत होते हैं । यहां के लोग रा...

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जीएसटी और इनकम टैक्स भ्रष्टाचार By JUGAL KISHORE SHARMA

नियमों के नाम पर डर का कारोबार देखा है,हमने सिस्टम में खुला भ्रष्टाचार देखा है।नोटिस भी अब यहाँ न्याय नहीं, हथियार बने,हर कदम पर शोषण का विस्तार देखा है।कानून की हर पंक्ति अलग मतलब...

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मिठास ज़िंदगी की By Rakesh Kaul

मिठास ज़िंदगी की बीना के जाने के बाद आज मैं ख़ुद को बिलकुल तन्हा महसूस कर रहा हूँ | इतना लम्बा वक़्त साथ गुज़ारने के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के इस कद्र आदी हो जाते हैं कि वे उनके बिना र...

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मुनक्का के बीज By राज बोहरे

कहानी : राजनारायण बोहरे   मुनक्का के बीज   वैद्य जी ने सिल्ली  की नब्ज पर उँगली रखी। आँखें बंद करके चुप हो के बैठ गये, जैसे किसी गहरे गणित में डूब गए हों। वैद्य जी उम्र से अधेड़ थे...

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साँझ का करघा By राज बोहरे

साँझ का करघा उस घर की लय घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि करघे की उस निरंतर होने वाली 'खट-खट' से तय होती थी जो कभी रुकती नहीं थी। दीनू के उस संकरे और नीची छत वाले कमरे की हवा कभी साफ...

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कारखाना By राज बोहरे

कहानी: कारखाना    “आप अगर मेरा साथ दोगे तो मैं अपने कारखाने को मिला इतना बड़ा ऑर्डर स्वीकार कर पाऊंगा… नहीं तो मैं मना कर देता हूँ।” तरुण भल्ला की आवाज़ में एक अजीब-सी सधी हुई नरमी...

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घर लौटती पगडंडी By राज बोहरे

कहानी: घर लौटती पगडंडी मचान पर खड़ा ज्ञान सिंह दूर तक फैले खेत को देख रहा था। गेहूं की सुनहरी फसल अब कटकर ढेरों में बदल चुकी थी। हवा में भूसे की हल्की गंध तैर रही थी। उसने आंखें मि...

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खलनायक By Ramesh Desai

                           खलनायक ??  रंजन कुमार देसाई                                 कल उस ने दोबारा ख़ुदकुशी करने का प्रयास किया था. उस वजह से भरत समेत कोई रात को सो नहीं पाया था...

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जड़ें By राज बोहरे

जड़ें  सावित्री देवी अक्सर खिड़की के पास बैठ जातीं। बाहर लगे नीम के पेड़ को देखतीं और सोचतीं— “जैसे इस पेड़ की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं, वैसे ही इंसान की जड़ें उसके परिवार से जुड़...

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गंगा की पुकार By Shivraj Bhokare

गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)भाइयों और बहनों,ज़रा ठहरकर सोचिए। एक 86 साल का वृद्ध। कोई साधारण व्यक्ति नहीं—आईआईटी कानपुर का पूर्व...

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हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया By Devendra Kumar

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया उस दिन लोधी रोड श्मशान घाट में खाकी वर्दी में बहुत लोग उपस्थित थे, विद्युत् शवदाह अर्थात  इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम के पास ही एक तरफ दो बिगुलर भी चुपच...

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सेंध By राज बोहरे

                                              सेंध धूप की एक धार मंदिर के अधबने प्रांगण में तिरछी कटती हुई गिर रही थी। हवा में महीन धूल तैर रही थी—इतनी हल्की कि दिखती नहीं, पर सांस...

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इन गुड फ़ेथ By Deepak sharma

                   सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा के बाद हुई लंबी छुट्...

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कर्ज़ By राज बोहरे

                                                           कर्ज़ हेड क्लर्क नागर ने अपनी मेज़ पर रखी पीतल की पुरानी घंटी को उँगलियों से दो बार थपथपाया—“टन्… टन्…”। दफ्तर की दीवारों...

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डर By राज बोहरे

                                                          डर   शाम उतर रही थी—धीरे-धीरे, जैसे किसी बूढ़े लेखक की कलम थककर कागज़ पर रेंग रही हो। दफ्तर की घड़ी ने पाँच बजाए, और दिनेश...

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टूटकर भी मुस्कुराती रही By aakanksha

पूर्वांचल के एक छोटे से गाँव में नंदिनी रहती थी—मिट्टी के घर, कच्ची गलियाँ और सपनों से भरी आँखें। घर में गरीबी थी, लेकिन उसके इरादे बहुत अमीर थे। माँ अक्सर कहतीं—“बेटी, जिंदगी आसान...

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डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 By Std Maurya

मैंने हल्के गुस्से और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा,“अभी जाकर शिकायत कर ले, चुड़ैल।”अंकिता भी पीछे हटने वाली कहाँ थी, वह तुरंत बोली,“अभी तो बोलोगे ही, जब घर से दूर हो तो।”मैंने हँसते हुए...

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आपदधर्म By Deepak sharma

आपदधर्म                    “चरण- स्पर्श, ताऊजी,” बाहर के बरामदे से बहू की आवाज़ मेरे कमरे तक चली आई।    &nbsp...

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कुछ रिश्ते खत्म होकर भी… By Makvana Bhavek

रात के 11 बजे थे। शहर की सड़कों पर सन्नाटा धीरे-धीरे फैल रहा था। स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी सड़क पर लंबी परछाइयाँ बना रही थी।   एक आदमी बेचैनी से सड़क किनारे टहल रहा था। उसके हाथ...

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नीरव आस By राजनारायण बोहरे

नीरव आसरात के ठीक दो बजे थे। मोबाइल की तीखी घंटी ने सन्नाटे को ऐसे चीर दिया जैसे किसी शांत तालाब में अचानक पत्थर फेंक दिया गया हो। चंपा की नींद हड़बड़ा कर खुली। आँखें आधी खुली थीं,...

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अधूरी सी दोस्ती... पूरी सी कहानी By Piyu soul

चैप्टर: “वो दोस्त जो दिल के बहुत पास था”कॉलेज का पहला दिन था…हर तरफ नए चेहरे, नई आवाज़ें, नई शुरुआत की हलचल थी। उसी भीड़ में एक लड़की खड़ी थी—आर्या। हाथ में फाइल, चेहरे पर हल्की सी...

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परछाईं By राजनारायण बोहरे

परछाइयाँअसीर उस दिन चौके के कोने में बैठा थाली को ऐसे घूर रहा था जैसे उसमें रोटी नहीं, कोई सवाल रखा हो—जिसका जवाब उसके पास नहीं है। दाल की सतह पर जमी पतली-सी परत बार-बार काँप जाती,...

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बोधिवृक्ष और हम By Std Maurya

प्रियांशी की नींद अचानक टूटी, वह हड़बड़ाकर जागी और घबराते हुए बोली, "अरे... क्या हुआ?"​अंकिता ने चुटकी लेते हुए मज़ाक किया, "कुछ नहीं हुआ... बस सुबह हो गई है! अब उठ भी जाओ... जो एक...

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सच और झूठ के मध्य By Alok Mishra

उमेश अब पीठ से हाथ सामने ले आया और धीरे से उभारों को सहलाने लगा ।  कमरा शांत था उमा ने घबरा कर आंखें बंद कर ली ।

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2:30 Am By Neha kariyaal

सब लोग है यहां बस मैं ही नहीं हूं क्योंकि हम human being कम और Deta points ज्यादा लगते हैं।हम सबका अधिकतर समय screen पर गुजरता है, हम सब पास तो हैं पर साथ कोई नहीं। तो कभी कभी लगता...

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मौन से जागरण तक By Anant Dhish Aman

एक गाँव था—छोटा, शांत और अपनी सहजता में अद्भुत।सुबह की पहली किरण जब कच्ची गलियों को छूती, तो लगता जैसे प्रकृति स्वयं वहाँ आशीर्वाद बनकर उतर आई हो।वहाँ की मिट्टी में विश्वास की गंध...

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समय का सौदागर। By Jeetendra

शहर के पुराने हिस्से में एक बहुत छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। बाहर से देखने पर वह दुकान किसी साधारण, भुला दिए गए कोने जैसी लगती थी। धूल से ढकी कांच की खिड़की, दीवारों पर पीतल की पुरान...

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देट वूमेन By Pankaj Modak

देट वूमेन [शॉर्ट स्टोरी]एक स्त्री जिसकी शादी कुछ वर्षों पहले हुई। शादी से पहले वह स्कूल गई थी। होली का दिन था। एक लड़का लाल सिंदूर उसके माथे पर लगा देता है और भाग जाता है। परिवारवा...

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खुलासा By Deepak sharma

                 “मां ने बैंंक में अपना खाता कब खोला?” मां की स्मृतियों में से एक नई कड़ी मैं ने खोलनी चाही। उनकी मृत्यु के...

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नेता जी By Rajeev kumar

उन्होंने वाणी को विराम देना ही आवश्यक समझा। उन्होंने अपने ही जवाब से कई सवाल खड़े कर दिए थे। अपनी मानसिकता छुपाने के चक्कर में छुपी हुई मानसिकता को उन्होंने उजागर कर दिया था। विकास...

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अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर By Rakesh Kaul

अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूँ तो यक़ीन ही नहीं होता कि मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की वही मासूम सी छोटी लड़की गोमती हूँ जो कभी अकेले बाज़ार जाने से भी हिचकिच...

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वो दोस्त… जो याद बन गया By Angel

शुरू करने से पहले एक शेर याद आता है।ऐसे रिश्तों के लिए, जिनकी कोई परिभाषा नहीं होती—Gulzar“दिल में कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं,जिनका नाम नहीं होता…पर एहसास उनकी मौजूदगी काहर वक्त हो...

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चकरी गिरह By Deepak sharma

                   “आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय  महिला डिग्री कालेज का एक चपर...

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और एक प्रयास By Rajeev kumar

’’ हालात से समझौता सभी करते हैं, मगर पापा, मैं हालात से कुछ वर्ष और लड़ना चाहता हूं, जुझना चाहता हूं मुश्किलों से। हमको मालूम है कि आप जो भी कह रहे हैं अपने अनुभव के आधार पर ही कह र...

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चाचा एन.आर.आई. By Makvana Bhavek

अहमदाबाद की एक तंग लेकिन जिंदादिल गली में शाम ढल रही थी। नुक्कड़ की चाय की दुकान पर भाप से ज्यादा अफवाहें उड़ रही थीं। प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा गौरव पटेल अपनी किस्मत को कोस रहा...

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नियति (नसीब) :एक सत्य घटना पर आधारित By pink lotus

    ​लोग कहते हैं नसीब खराब है... पर सच तो कुछ और ही है।​हम सब कहते हैं कि "मेरा नसीब खराब है," "मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?" लेकिन रियलिटी पता है क्या है? नियति (Destiny) तुम्ह...

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ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस देत By Devendra Kumar

ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस दे उपरोक्त देशी कहावत मैंने दो अवसरों पर सुनी थी, दोनों अलग सन्दर्भ थे अलग अलग तरह लोगों के मुंह से इसे सुना था. पहली बार तो कहावत बूढ़े गौ पुत्र वृषभ क...

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निशानी By कमल चोपड़ा

​निशानी                                    कमल चोपड़ा     ​सात आठ दिन ऊपर हो गये थे। वह माँ बनने वाली है जब वह यह खबर अपने पति को देगी तो वह भी खुशी से झूम उठेगा। लेकिन यह 'गुड...

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वो कौन थी By S Sinha

                                                                               वो कौन थी       तपन घोष  और मैंने एक साथ एक जहाज कंपनी में नौकरी ज्वाइन किया था  . दोनों ने  कंपनी के...

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कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश मोबाईल न. 7648959825यह कहानी पूर्ण रूप से सत्य है। इसमें कोई काल्पनिक बातें नहीं हैं, बल्कि इसे सच्चाई के रंगों से सजाया गया है। यह घटना आज से ल...

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राजा दाहिर सेन - सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राट By Chintansinh Jadav

राजा दाहिर सेन – सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राटभारत के इतिहास में कई ऐसे वीर योद्धा हुए हैं जिनकी गाथाएँ समय के साथ धुंधली पड़ गईं। उन्हीं में से एक थे राजा दाहिर — सिंध प्रदेश...

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ऐसे ही क्यों होता हैं? - 2 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य दूरभाष -917648959825  2 मार्च 2026यह कुछ ही दिन पुरानी बात है। मैं अक्सर सोशल मीडिया पर दो-चार लाइनें लिखकर पोस्ट किया करता हूँ, जो लोगों को काफी पसंद आती हैं। ए...

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 By Std Maurya

भाग -1. लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश भारत मोबाईल न. 7648959825 हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर...

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उल्टाआप By कमल चोपड़ा

                            उल्टा आप                          कमल चोपड़ा  ​                 लड़की को मास्टर जी के घर से निकलते देखकर देखने वालों की आँखों से आग की लपटें निकलने लगी थ...

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एक सपना क्या हो पाएगा अपना? By Rishav raj

उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव सीतामढ़ी के पास बसे एक साधारण से गाँव में एक लड़का रहता था — उसका नाम था आरव। गाँव बहुत छोटा था, कच्ची सड़कें, मिट्टी के घर, और चारों तरफ खेत। वहाँ के...

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खुदकुशी By कमल चोपड़ा

खुदकुशी                      कमल चोपड़ा        ​रातभर तेज़ आंधी के साथ बरसात और ओले उन दोनों के दिलो-दिमाग पर हथगोलों की तरह गिर रहे थे। रह-रहकर सतवंत सिंह खेत पर जाने के लिये उठ ख...

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लिव-इन By कमल चोपड़ा

लिव-इन                           कमल चोपड़ा                                ​अरुण उसे रास्ते में अचानक मिल गया था। पहले वह एक ऑफिस में उसके साथ ही काम करता था। इधर-उधर की बातों के ब...

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मैं हो रहा हूॅं By kunal kumar

कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।___________________________“तू फिर उसी पेड़ के पास बैठा है?” माँ ने पूछा। लड़का मुस्कुराया नहीं।बस धी...

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चंगुल By कमल चोपड़ा

चंगुल                            कमल चोपड़ा                        ​लड़की का चेहरा नहीं दिखाया गया था। धुंधले अक्स और आवाज़ के ज़रिए ही माँ-बाबूजी ने पहचान लिया था। उन्होंने कभी सो...

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