Hey, I am on Matrubharti!

हर किसी को खुश नहीं रख सकते .....
हर किसी की उम्मीद पर खरे नहीं उतर सकते
मेरी कोशिश सदा रहती है सबको मान देने की
पर हर किसी को कद्र नहीं होती उस सम्मान की
कुछ मेरी ग़लतियों को भी अनदेखा कर जाते हैं
तो कुछ नेकियों में भी कमियाँ निकाल जाते हैं
आजकल सारे रिश्ते भी मेंढक - से हो चले हैं
एक को बिठाओ तो दूसरे फुदकने लग जाते हैं

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अपने निशाँ छोड़ते जाओ ......
काम कोई ऐसा अनोखा कर जाओ
सफलता के शिखर चढ़ने में बाधाएँ होंगी अनेक
बुलंद हौंसले कर बढ़ता जा, न कभी तू घुटने टेक
तुझे गिराने की ख़ातिर सैंकड़ों हाथ आगे आएँगे
तू निरंतर चलता जा, वही फिर जश्न मनाने आएँगे

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मेरा यक़ीन करो .........
तुम चाहो तो हर मुश्किल डगर पार कर सकती हो
मत डरो पगडंडियों से , तुम पर्वत भी चढ़ सकती हो
तुमने मन में मान लिया तो ये कायरता केवल तुम्हारी है
तुमने मन में ठान लिया तो हर शिखर पर जीत तुम्हारी है
बीच भँवर को देख विचलित हो जाए काम ये काफ़िरों का
थाम लो पतवार तुम अपनी मोड़ दो रुख़ तूफ़ानों का

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अपनों का साथ रहे ..........
बस, और कोई चाहत नहीं , इस धाविका बनी ज़िंदगी में
अपनों से रूबरू होने की फ़ुरसत नहीं इस ज़िंदगानी में
सब आगे ही भाग रहे हैं जीवन में कुछ पाने को
कुछ पाने की चाह में अपनों का साथ गँवाने को
जीते जी अपनों से मिल लो, चार दिन की ज़िंदगानी है
फिर पछतावा ही रह जाएगा , एक दिन तो रवानगी है

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इस रात के रूप अनेक ...........

किसी के लिए पूर्णिमा की - सी उजियारी रात ,
किसी के लिए अमावस की - सी काली रात ।
लंबी हो जाती रात जब हो किसी का इंतज़ार ,
छोटी पड़ जाती ये रात जब करना हो इकरार ।
नागिन - सी डसने लगती विरह में कभी ये रात ,
कभी वादों की गवाह बन जाती ये चाँदनी रात ।
कभी नयनों में निंदिया है पर सोने नहीं देती ये रात ,
कभी निंदिया में मीठे - से ख़्वाब दिखाती है ये रात ।

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एक हवा का झोंका ......
काफ़ी हैं ज़िंदगी को समझने के लिए
गरमी की तपिश में सुकून दे जाता है,
हताश दिलों को एक आशा दे जाता है
श्रांत - मन को एक दिलासा दे जाता है ,
कुंठित - दिलों के द्वार खोल जाता है
बरसों की गाँठ को पल में खोल जाता है
एक हवा का झोंका ही सब कर जाता है ।

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ये बारिश कितनी अच्छी है .....
पल भर में नन्ही बौछारों से धरा का मैल सारा धो जाती है ,
पर जो इंसान के मन का मैल धोए वो बूँदें न बरस पाती हैं ।
हर चीज़ को स्वच्छ बनाने को बहुतेरे साधन मिल जाते हैं ,
जो मानव को स्वच्छ बना दे वो साधन न मिल पाते हैं ।
ऐसी बरखा भी कभी आए जो दिलों की धूल मिटा जाए,
फिर धरा पर स्नेहधारा बरसाकर , पीड़ा के शूल हटा जाए

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उस किनारे जाना है ...........
डगर बड़ी मुश्किल है पर ये नामुमकिन नहीं
हौंसले बुलंद हैं मेरे फिर डर कोई मुझे नहीं
काँटों से घिरकर भी फूल सदा खिला करते हैं
राह से पीछे हटने वाले मंज़िल न कभी पाते हैं
जीवन एक भँवर है जिसमें नैया हिचकोले खाती है
पतवार थामें जो चला उसकी नैया पार लग जाती है

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साफ़ रखो दिल का कमरा
मैले कमरे में भला कौन ठहरा ?
अस्त - व्यस्त कमरा देख जैसे रास नहीं कुछ आता है
बिखरे हुए विचारों से कोई दिल में भी नहीं आता है
सारी दुनिया छोटी लगे जब बड़ा - सा हो दिल का कमरा
दुनिया हसीन स्वप्न - सी जब सुथरा हो दिल का कमरा
हवेलियाँ छोटी पड़ जाती हैं जब दिल के द्वार बड़े होते हैं
झोंपड़ी भी महल लगे जब दिल के झरोखे खुले होते हैं

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सहज रहिए सरल रहिए .......😊
टेढ़ा बनकर चलने में क्या रखा है ?
ख़ुशमिज़ाज रहिए मुस्कुराते रहिए
तुनकमिज़ाज बनने में क्या रखा है ?
थोड़ा नमक - सा बन ज़िंदगी में स्वाद डालिए ,
बेस्वाद ज़िंदगी में क्या रखा है ?
कभी मिश्री - सा बन दिलों में मिठास घोलिए,
कसैलेपन में भला क्या रखा है ?
उषा जरवाल ✍️✍️

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