hindi Best Motivational Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Motivational Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations a...Read More


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  • ईश्वर कृपा

    ईश्वर कृपा जबलपुर शहर में सेठ राममोह...

  • बाल रूप

    बाल रूप बड़ा ही चंचल और अस्थिर होता हैं भावनाओं की इस पड़ाव पर कोई एक दिशा नहीं हो...

  • एकता दिवस

    आज दिनांक ३१ अक्टूबर है, हम और आप आज के दिन को एकता दिवस के रूप में मना रहे है!...

मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम By Ajay Amitabh Suman

(1) मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम मौजो से भिड़े हो ,पतवारें बनो तुम,खुद हीं अब खुद के,सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है ,आसां बहुत पर,गिर के सम्भलना है,आसां बहुत पर,डूबे हो...

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ईश्वर कृपा By Rajesh Maheshwari

ईश्वर कृपा जबलपुर शहर में सेठ राममोहन दास नाम के एक मालगुजार रहते थे। वे अत्यंत दयालु, श्रद्धावान, एवं जरूरतमंदों, गरीबों तथा बीमार व्यक...

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एक जिंदगी - दो चाहतें - 7 By Dr Vinita Rahurikar

परम क्षणभर में ही पलट कर कृष्णन के साथ हेलीकॉप्टर में बैठ गया। अमरकांत भी आ गया। तीनों फिर डयूटी पर लग गये। रिपोर्टर अपने कैमरों से शूट लेने लगे। परम का कतरा भर ध्यान उसके अनजाने म...

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इंद्रधनुष सतरंगा - 24 By Mohd Arshad Khan

मोबले का स्कूटर बिगड़ गया।
सुबह-सुबह स्कूटर निकालकर चले ही थे कि मौलाना साहब के दरवाजे़ तक पहुँचते-पहुँचते वह ‘घुर्र-घुर्र’ करके बंद हो गया। स्कूटर अभी नया था। उसे ख़रीदे साल भर भ...

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हुनर By Rajesh Maheshwari

हुनर बनारस में दो मित्र महेश और राकेश रहते जिन्हें मिठाईयाँ एवं चाट बनाने में महारत हासिल थी। उनके बनाये हुए व्यंजन बनारस में काफी प्रसिद्ध थे। एक दिन इन दोनो के मन में विदेश घूम...

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सुस्त रोहन By Satender_tiwari_brokenwordS

रोहन बहुत सुस्त इंसान था । उसके घरवालों को यही चिंता सताती थी कि रोहन भविष्य में कुछ नही कर पायेगा।। रोज़ सुबह उसी ताने से होती थी, " किस मनहूस घड़ी में ये लड़का हमारे घर मे पैदा हुआ...

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बाल रूप By Sohail Saifi

बाल रूप बड़ा ही चंचल और अस्थिर होता हैं भावनाओं की इस पड़ाव पर कोई एक दिशा नहीं होती क्षण भर मे माँ से रूठ जाता हैं और अगले ही क्षण माता की ममता का प्यासा कभी तो धीट हठी तो कभी परम द...

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एकता दिवस By Jyoti Prakash Rai

आज दिनांक ३१ अक्टूबर है, हम और आप आज के दिन को एकता दिवस के रूप में मना रहे है! एकता क्या है और इसका क्या अर्थ है यह जानना बेहद जरुरी है, आज के समय में बहुत से लोग ऐसे है जिन्हे एक...

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मुक्ति. By Pritpal Kaur

“तुम जिंदा क्यों हो? मर क्यों नहीं जाते? मर जाओ...”
उसकी तरफ से यह सलाह अनायास नहीं आयी थी. कई दिनों से देख रहा था, वह मुझसे ऊब चली थी. मेरे साथ-साथ, कभी मुझसे आगे, कभी पीछे चलते...

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डकैत By Sohail K Saifi

विशवाजीत साधारण सा दिखने वाला सामान्य लोगों मे रह रहा एक शातिर डकैत थाउसको देख कर होशियार से होशियार आदमी भी चकमा खा जाये ऐसा रूप धारण कर रखा था महाशय ने अरे औरो की तो छोड़ो अपनी पर...

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आस्था भूचाल By Sohail Saifi

भूचालयूँ तो श्रीमान सोमनाथ का एक मंजिला छोटा सा मकान था किन्तु अति सुन्दर था मकान के चारो ओर चार फिट की दीवारे थी अंदर प्रवेश करने के लिए एक धातु का सुन्दर द्वार था उसके बाद एक पां...

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शुरूआत By Sapna Singh

नेहा ज्यों ही लाइब्रेरी में दाखिल हुई, कोई आंधी की तरह उस से टकराते-टकराते बचा, ’’ सुनिए आप ने ’’ ’मैडम बावेरी’ इष्यू करवाई है क्या? आप शायद हफ्ते भर से ...........’’ कहते - कहते प...

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भूख... By Sarvesh Saxena

आज मंगलवार है | मैं और श्याम चौराहे के पास वाले हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ा के सीधा श्याम की बुआ जी को लेने बस अड्डे पहुंच गए, बस लेट थी, इसीलिए हमने वहीँ बैठकर बुआ जी की बस का इं...

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आस्था तर्क वितर्क By Sohail Saifi

तर्क वितर्कएक दिन प्रात काल दफ्तर के लिए घर से सोम नाथ जो निकले तो नुक्कड़ पर चायवाले के यहाँ खड़े पंडित जी ने सोम बाबू को अपनी ओर आते देख घबरा कर बचते हुए बोला राम राम सोम जी सोम -र...

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प्राप्ति By Sapna Singh

‘‘गुड नाईट‘‘ मिसेज राव । ‘‘शायद घर जाने से पहले अन्तिम बार वह राउंड मे आये थे। पीठ कि तरफ तकिया लगाये वह पूरी तरह किताब मे डूबी थी । वह कमरे मे दखिल हुए है, उसने देख लिया है कि उनक...

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आस्था परिचय By Sohail Saifi

परिचयमहाशय सोम एक नैतिक और सामाजिक व्यक्ति हैं ज्ञान का सागर उनके मस्तिष्क मे भरा पड़ा था किन्तु थे वो नास्तिक समाज की धार्मिक नीतियाँ उनको लुभाती तो थी मगर धार्मिकता के उपासक की अं...

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पदक By Upasna Siag

विभा शाम को अक्सर पास के पार्क चली जाया करती है .उसे छोटे बच्चों से बेहद लगाव है, सोचती है कितने प्यारे कितने मासूम, दौड़ते, भागते, मस्त हो कर दीन -दुनिया के ग़मों से बेखबर, बस चिं...

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साहित्य और मैं !.. By Pandit Swayam Prakash Mishra

दोस्तों !..आज मैं जिंदगी के उस दोहराहे पर खड़ा हूँ जहां मेरे लिए यह तय कर पाना संभव नही कि मैं किस रास्ते का चुनाव करू?एक ओर जहां साहित्य है तो दूसरी ओर मेरी जिंदगी ! ...भला कोई तो...

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वरुण का सफर -- अजनबी से........तक By Deepak Singh

नमस्कार मित्रों,सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।आप सभी पाठकों ने मेरा पहला लेख "मेरा पहला अनुभव...." को इतना प्यार और स्नेह दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके इतने...

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माँ की पूर्ति By Sohail Saifi

सरद बाबू को विद्यालय की ओर से माँ के ऊपर कुछ पंक्तिया लिखी मिली जिसको उनके बेटे ने लिखा था पुत्र द्वारा लिखी पत्रिका पड़ पिता के भीतर संवेदना की धारा उमड़ आई पुत्र प्रेम की भावना उ...

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दीवाली By Rajesh Bhatnagar

आज सरला मुंह अंध्ंारे ही उठ बैठी थी । उसने पौ फअने तक तो आंगन की झाड़ू लगाकर हैण्डपम्प से पानी भी भर लिया था । पानी भरते-भरते उसका दम फूल गया था । चाहती थी थोड़ा बैठकर सुस्ता ले, मगर...

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डाक्टर मित्र (फेसबुक) By महेश रौतेला

डाक्टर मित्र(फेसबुक) : फेसबुक पर मुझे एक मित्र अनुरोध मिला,अटलांटा, संयुक्त राज्य अमेरिका से। नाम है सोरेल। मैंने अनुरोध स्वीकार करने का मन बनाया। इससे पहले मैं सरला देवी जी(गाँ...

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सब का दाता है भगवान   By Rajesh Maheshwari

सब का दाता है भगवान जबलपुर शहर में एक धनाढ्य व्यापारी पोपटमल रहता था। वह कर्म प्रधान व्यक्तित्व का धनी था और गरीबों को दान धर्म, जरूरतमं...

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एक अच्छा-भला दिन By Pritpal Kaur

अशोका रोड पर ठीक बीजेपी मुख्यालय के सामने से वह गुज़र रही थी. उसको लग ही रहा था कि ट्रैफिक सिग्नल की लाइट हरी से पीली में बदलने वाली है. उसके आगे गाड़ियों का एक लम्बा सा रेला हरी बत्...

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आदमी और कुत्ता By Rajesh Bhatnagar

वह बस से उतर कर उस आदमी से कुछ कदम की दूरी पर पीछे-पीछे चल पड़ी जिस आदमी का चेहरा वह घूंघट के कारण अभी तक ठीक से देख भी नहीं पाई थी । उसने थोड़-सा घूंघट उठाकर नज़रें चारों ओर दौड़ाई ।...

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मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम By Ajay Amitabh Suman

(1) मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम मौजो से भिड़े हो ,पतवारें बनो तुम,खुद हीं अब खुद के,सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है ,आसां बहुत पर,गिर के सम्भलना है,आसां बहुत पर,डूबे हो...

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ईश्वर कृपा By Rajesh Maheshwari

ईश्वर कृपा जबलपुर शहर में सेठ राममोहन दास नाम के एक मालगुजार रहते थे। वे अत्यंत दयालु, श्रद्धावान, एवं जरूरतमंदों, गरीबों तथा बीमार व्यक...

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एक जिंदगी - दो चाहतें - 7 By Dr Vinita Rahurikar

परम क्षणभर में ही पलट कर कृष्णन के साथ हेलीकॉप्टर में बैठ गया। अमरकांत भी आ गया। तीनों फिर डयूटी पर लग गये। रिपोर्टर अपने कैमरों से शूट लेने लगे। परम का कतरा भर ध्यान उसके अनजाने म...

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इंद्रधनुष सतरंगा - 24 By Mohd Arshad Khan

मोबले का स्कूटर बिगड़ गया।
सुबह-सुबह स्कूटर निकालकर चले ही थे कि मौलाना साहब के दरवाजे़ तक पहुँचते-पहुँचते वह ‘घुर्र-घुर्र’ करके बंद हो गया। स्कूटर अभी नया था। उसे ख़रीदे साल भर भ...

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हुनर By Rajesh Maheshwari

हुनर बनारस में दो मित्र महेश और राकेश रहते जिन्हें मिठाईयाँ एवं चाट बनाने में महारत हासिल थी। उनके बनाये हुए व्यंजन बनारस में काफी प्रसिद्ध थे। एक दिन इन दोनो के मन में विदेश घूम...

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सुस्त रोहन By Satender_tiwari_brokenwordS

रोहन बहुत सुस्त इंसान था । उसके घरवालों को यही चिंता सताती थी कि रोहन भविष्य में कुछ नही कर पायेगा।। रोज़ सुबह उसी ताने से होती थी, " किस मनहूस घड़ी में ये लड़का हमारे घर मे पैदा हुआ...

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बाल रूप By Sohail Saifi

बाल रूप बड़ा ही चंचल और अस्थिर होता हैं भावनाओं की इस पड़ाव पर कोई एक दिशा नहीं होती क्षण भर मे माँ से रूठ जाता हैं और अगले ही क्षण माता की ममता का प्यासा कभी तो धीट हठी तो कभी परम द...

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एकता दिवस By Jyoti Prakash Rai

आज दिनांक ३१ अक्टूबर है, हम और आप आज के दिन को एकता दिवस के रूप में मना रहे है! एकता क्या है और इसका क्या अर्थ है यह जानना बेहद जरुरी है, आज के समय में बहुत से लोग ऐसे है जिन्हे एक...

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मुक्ति. By Pritpal Kaur

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उसकी तरफ से यह सलाह अनायास नहीं आयी थी. कई दिनों से देख रहा था, वह मुझसे ऊब चली थी. मेरे साथ-साथ, कभी मुझसे आगे, कभी पीछे चलते...

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डकैत By Sohail K Saifi

विशवाजीत साधारण सा दिखने वाला सामान्य लोगों मे रह रहा एक शातिर डकैत थाउसको देख कर होशियार से होशियार आदमी भी चकमा खा जाये ऐसा रूप धारण कर रखा था महाशय ने अरे औरो की तो छोड़ो अपनी पर...

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आस्था भूचाल By Sohail Saifi

भूचालयूँ तो श्रीमान सोमनाथ का एक मंजिला छोटा सा मकान था किन्तु अति सुन्दर था मकान के चारो ओर चार फिट की दीवारे थी अंदर प्रवेश करने के लिए एक धातु का सुन्दर द्वार था उसके बाद एक पां...

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शुरूआत By Sapna Singh

नेहा ज्यों ही लाइब्रेरी में दाखिल हुई, कोई आंधी की तरह उस से टकराते-टकराते बचा, ’’ सुनिए आप ने ’’ ’मैडम बावेरी’ इष्यू करवाई है क्या? आप शायद हफ्ते भर से ...........’’ कहते - कहते प...

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भूख... By Sarvesh Saxena

आज मंगलवार है | मैं और श्याम चौराहे के पास वाले हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ा के सीधा श्याम की बुआ जी को लेने बस अड्डे पहुंच गए, बस लेट थी, इसीलिए हमने वहीँ बैठकर बुआ जी की बस का इं...

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आस्था तर्क वितर्क By Sohail Saifi

तर्क वितर्कएक दिन प्रात काल दफ्तर के लिए घर से सोम नाथ जो निकले तो नुक्कड़ पर चायवाले के यहाँ खड़े पंडित जी ने सोम बाबू को अपनी ओर आते देख घबरा कर बचते हुए बोला राम राम सोम जी सोम -र...

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प्राप्ति By Sapna Singh

‘‘गुड नाईट‘‘ मिसेज राव । ‘‘शायद घर जाने से पहले अन्तिम बार वह राउंड मे आये थे। पीठ कि तरफ तकिया लगाये वह पूरी तरह किताब मे डूबी थी । वह कमरे मे दखिल हुए है, उसने देख लिया है कि उनक...

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आस्था परिचय By Sohail Saifi

परिचयमहाशय सोम एक नैतिक और सामाजिक व्यक्ति हैं ज्ञान का सागर उनके मस्तिष्क मे भरा पड़ा था किन्तु थे वो नास्तिक समाज की धार्मिक नीतियाँ उनको लुभाती तो थी मगर धार्मिकता के उपासक की अं...

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पदक By Upasna Siag

विभा शाम को अक्सर पास के पार्क चली जाया करती है .उसे छोटे बच्चों से बेहद लगाव है, सोचती है कितने प्यारे कितने मासूम, दौड़ते, भागते, मस्त हो कर दीन -दुनिया के ग़मों से बेखबर, बस चिं...

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साहित्य और मैं !.. By Pandit Swayam Prakash Mishra

दोस्तों !..आज मैं जिंदगी के उस दोहराहे पर खड़ा हूँ जहां मेरे लिए यह तय कर पाना संभव नही कि मैं किस रास्ते का चुनाव करू?एक ओर जहां साहित्य है तो दूसरी ओर मेरी जिंदगी ! ...भला कोई तो...

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वरुण का सफर -- अजनबी से........तक By Deepak Singh

नमस्कार मित्रों,सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।आप सभी पाठकों ने मेरा पहला लेख "मेरा पहला अनुभव...." को इतना प्यार और स्नेह दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके इतने...

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माँ की पूर्ति By Sohail Saifi

सरद बाबू को विद्यालय की ओर से माँ के ऊपर कुछ पंक्तिया लिखी मिली जिसको उनके बेटे ने लिखा था पुत्र द्वारा लिखी पत्रिका पड़ पिता के भीतर संवेदना की धारा उमड़ आई पुत्र प्रेम की भावना उ...

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दीवाली By Rajesh Bhatnagar

आज सरला मुंह अंध्ंारे ही उठ बैठी थी । उसने पौ फअने तक तो आंगन की झाड़ू लगाकर हैण्डपम्प से पानी भी भर लिया था । पानी भरते-भरते उसका दम फूल गया था । चाहती थी थोड़ा बैठकर सुस्ता ले, मगर...

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डाक्टर मित्र (फेसबुक) By महेश रौतेला

डाक्टर मित्र(फेसबुक) : फेसबुक पर मुझे एक मित्र अनुरोध मिला,अटलांटा, संयुक्त राज्य अमेरिका से। नाम है सोरेल। मैंने अनुरोध स्वीकार करने का मन बनाया। इससे पहले मैं सरला देवी जी(गाँ...

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सब का दाता है भगवान   By Rajesh Maheshwari

सब का दाता है भगवान जबलपुर शहर में एक धनाढ्य व्यापारी पोपटमल रहता था। वह कर्म प्रधान व्यक्तित्व का धनी था और गरीबों को दान धर्म, जरूरतमं...

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एक अच्छा-भला दिन By Pritpal Kaur

अशोका रोड पर ठीक बीजेपी मुख्यालय के सामने से वह गुज़र रही थी. उसको लग ही रहा था कि ट्रैफिक सिग्नल की लाइट हरी से पीली में बदलने वाली है. उसके आगे गाड़ियों का एक लम्बा सा रेला हरी बत्...

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आदमी और कुत्ता By Rajesh Bhatnagar

वह बस से उतर कर उस आदमी से कुछ कदम की दूरी पर पीछे-पीछे चल पड़ी जिस आदमी का चेहरा वह घूंघट के कारण अभी तक ठीक से देख भी नहीं पाई थी । उसने थोड़-सा घूंघट उठाकर नज़रें चारों ओर दौड़ाई ।...

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