Free Hindi Poem Quotes by Ajantaaa | 111570269

वो औरत है
अपना हर ग़म हंसते हंसते पी लेती है
परिवार को अहमियत दे कभी अहम नहीं करती है
आसमान में पंख लगा उड़ना चाहे पर
पिंजरे में सिकुड़ती है
किस्मत है कहकर सपनों को
छुपी का नाम देती है
"वो औरत है ना" कहकर
दबा दी जाती है..

वो समाज की तकलीफों से गुजरती है
प्रति पल एक अग्नि परीक्षा देती है
मर्द की मार भी सहन कर लेती है
कुछ करना चाहे तो चुप करा दी जाती है
सही है औरत है वो क्या कर पाती है

औरत को समझाना मुशकिल है
कहकर अपनी जान बचाते है
वो तो रोज सवालों मै पिस्ती है
अपना मत रखे तो टोक‌‌ दी जाती है
सही है औरत है वो क्या समझती है
अब नहीं वो राम की सीता
वो झांसी की रानी है
वो नहीं सती सावित्री
वो चण्डी वो कली है
वो बरकत शोहरत लती है
क्या कहें वो देखो औरत आती है....


हर्षिता

Tushar agarwal 2 years ago

Bahut khub likha h

shekhar kharadi Idriya 2 years ago

अत्यंत सुंदर प्रस्तुति

Uplifted 2 years ago

Yeh tumney likhi ho ?

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