मैं और मेरे अह्सास
बदल गया
साहिल की तलाश में दरिया बदल गया l
मंज़िल तक पहुंचने का ज़रिया बदल गया ll
जब से इन्सान का रास्ता बदल गया तब से l
जिंदगी को देखने का नजरिया बदल गया ll
पीने का नया निराला अंदाज ढूँढ लिया कि l
मयखाने तक जाती हुई गलिया बदल गया ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह