जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।
परियों सी अहाते में खिलखिलाके डोलतीं,
कुछ बोलतीं तो खूब तोतला के बोलतीं,
थोड़ी बड़ी होतीं तो बड़ा ख्याल ये करतीं,
पापा की तो हर वक्त देख भाल ये करतीं,
मम्मी की मदद शौक से करतीं हैं बेटियाँ,
माँ - बाप को आनंद से भरतीं हैं बेटियाँ,
जब बाप के आँगन में उतरती हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।
पढ़तीं हैं तो ये और मन लगा के हैं पढ़तीं,
धीरे से सफलता की सीढ़ियों पे हैं चढ़तीं,
सेना में ये जातीं हैं एवरेस्ट पे जातीं,
स्पेस यान और वायुयान उड़ातीं,
बेटों सा कीर्तिमान भी गढ़तीं हैं बेटियाँ,
सपनों में रंग बाप के भरतीं हैं बेटियाँ,
जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।
परिवार की प्यारी सी दुलारी सी ये होतीं,
भईया के लिए राजकुमारी सी ये होतीं,
वैसे तो ये माता - पिता का मान बढ़ातीं,
कुछ बन गईं विजय तो स्वाभिमान बढ़ातीं,
हँसते हुए लड़तीं हैं झगड़तीं हैं बेटियाँ,
आकाश में किरणों सी उभरतीं हैं बेटियाँ,
जब बाप के आँगन में उतरतीं हैं बेटियाँ,
सौभाग्य ले के साथ में बढ़तीं हैं बेटियाँ ।।
सर्वाधिकार सुरक्षित
✒️✒️---©️--®️ डाॅ. विजय प्रताप शाही