💫" अधूरी ख्वाहिशें "💫
हर ख्वाहिश यहाँ पूरी नहीं होती,
इससे ज़िंदगी अधूरी नहीं होती।
मंज़िलें न मिलें तो मलाल कैसा,
रास्तों से कम यह दूरी नहीं होती।
हार जाना है बिखरने का ही हिस्सा,
हर मोड़ पर जीत ज़रूरी नहीं होती।
चमक उठती है रूह अंधेरों में भी,
हर बार जलना मजबूरी नहीं होती।
समेट ले खुद को बिखर कर भी 'व्योम',
बिना इम्तिहान ज़िंदगी पूरी नहीं होती।
✍...© विनोद. मो. सोलंकी " व्योम "
जेटको (GEB) अंजार. मु. रापर.