मैं और मेरे अह्सास
जिंदगी एक खूबसूरत सफ़र
दिल ने दर्द को चुपचाप सहना सीख लिया l
जुदाई में हसते हुए जीते रहना सीख लिया ll
किसीको बिना मर्जी के बाँध नहीं सकते हैं l
जान से भी प्यारों से बिछड़ना सीख लिया ll
हमेशा कोई नहीं आता है आँसू को पोछने l
अकेलेपन में खुद ही सिमटना सीख लिया ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह