मैं और मेरे अह्सास
अधूरे सपने
अधूरे सपने को मुकम्मल करना चाहिए l
मनचाहा पाने के लिए आगे सरना चाहिए ll
बैठे बिठाए कुछ भी हासिल नहीं होता l
दिल की तमन्ना पाने को बहना चाहिए ll
ये खानाबदोशी दिवानगी कहां ले जाएंगी l
जीगर में जोश और उमंग भरना चाहिए ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह