અજાણ્યો પત્ર -25
उसे चाँद बहुत पसंद है–
अधूरा चाँद,
पूनम का चाँद,
अमावस का चाँद,
ढलता हुआ चाँद।
वह चाँद में खुद को निहारती है, जैसे अपनी ही परछाई से
इश्क़ कर बैठी हो। वह चाँद में उसे ढूँढती है,जिसे वह कभी अपना कह नहीं पाई और उसी तलाश को इश्क़ समझ बैठी है।
पर काश उसे यह भी याद रहता कि जो चाँद इतना चमक रहा है, उसकी चाँदनी भी किसी और के उजाले से उधार ली हुई है।
जो जितना चमकता है,
उतना ही किसी और की रोशनी पर
निर्भर होता है।
- Nilesh Tank ✍️