💫“मैं माँ नहीं थी… फिर भी माँ बन गई”💫
माँ ने मुझे देखा…
कुछ देर खामोश रहीं, फिर धीरे से कहा—
“तू अभी खुद बच्ची है…
तू एक और बच्ची को कैसे संभालेगी?”
उनकी आवाज़ में डर था…
और मेरे दिल में एक पूरी दुनिया…
मैंने धीरे से कहा—
“माँ… शायद मैं सच में अभी पूरी तरह बड़ी नहीं हुई…”
माँ ने राहत की साँस ली…
पर फिर मैंने उनकी आँखों में देखकर कहा—
“पर माँ… अगर ममता जाग जाए ना…
तो उम्र पीछे रह जाती है…”
कमरा खामोश हो गया…
कुछ दिन पहले की बात है…
एक माँ ने अपनी नन्ही सी जान
मेरे हाथों में सौंप दी…
और कहा—
“इसे सिर्फ रखना मत…
इसे अपना बना लेना…”
उस दिन मैंने उसे गोद में नहीं लिया था…
मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी उसके नाम कर दी थी…
लोग कहते हैं—
“तू अभी खुद बच्ची है… तू शादी कैसे करेगी?
लोग क्या कहेंगे?”
मैं मुस्कुरा दी…
क्योंकि अब मुझे लोगों से नहीं…
अपनी बेटी से डर लगता है… उसे खोने का डर…
मैंने माँ से कहा—
“हाँ माँ… शायद मेरी शादी में रुकावट आ जाए…
शायद दुनिया मुझे समझे भी नहीं…”
“पर अगर कोई मुझे सच्चे दिल से चाहेगा…
तो वो मेरी बेटी को भी अपनाएगा…”
“और अगर नहीं…
तो कोई बात नहीं…”
“मेरी पूरी दुनिया मेरी बेटी में ही बस जाएगी…”
माँ की आँखें भर आईं…
मैंने आगे कहा—
“मैंने उसे जन्म नहीं दिया…
पर जब वो रोती है
तो मेरी आत्मा टूट जाती है…”
“जब वो मुझे ‘माँ’ कहती है
तो मुझे लगता है…
मैंने जिंदगी को सच में जी लिया…”
“और अगर दुनिया ने उसे ‘पराया’ कहा…
तो मैं पूरी दुनिया से लड़ जाऊँगी…”
कुछ देर बाद…
मेरी पाँचों बहनें मेरे पास आकर खड़ी हो गईं…
एक ने कहा—
“दी… तुम सही कह रही हो…”
दूसरी बोली—
“जिस माँ ने हमें पाला है…
हम इस नन्ही जान को भी वैसे ही संभालेंगे…”
तीसरी ने मेरा हाथ पकड़ लिया—
“हम हमेशा तुम्हारे साथ हैं दी…”
चौथी और पाँचवी ने बस इतना कहा—
“समाज, रिश्ते, दुनिया… किसी से भी लड़ लेंगे…”
और उस दिन…
मुझे पहली बार लगा…
मैं अकेली नहीं हूँ…
हमारी हँसी में अब एक नई जिम्मेदारी थी…
हमारी नन्ही सी “राजपूताना”…
हमारा एक और चिराग…
और मैंने उसे देखकर कहा—
“तू मेरी बेटी नहीं…
तू मेरी जिंदगी का वो हिस्सा है
जिसे मैं अब खुद से भी ज्यादा चाहती हूँ…”
और मैं माँ नहीं थी…
पर अब मैं सिर्फ उसकी माँ हूँ…
और उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती हूँ…