' चलो कुछ नया बुनते हैं , न '
रिश्ता सिर्फ एक ही कंधे पर क्यों ?, दोनों मिलकर निभाते हैं न । , बोझ सिर्फ़ एक ही कंधे पर क्यों ?दोनों मिलकर उठाते हैं न।।
अगर गलती हुई है तो, कलंक सिर्फ एक ही के माथे पर क्यों? दोनों मिलकर लगाते हैं न।
सिर्फ़ भागी हुई लड़की ही क्यों? भागे हुए लड़के भी कहलवाते हैं न ।।
परिवार की इज्ज़त बचाना सिर्फ़ एक ही के हाथ में क्यों?, दोनों साथ में बनाते हैं न ।
नियम सिर्फ़ एक पर ही लागू क्यों ?दोनों मिलकर निभाते हैं न।।
यदि एक आगे बढ़ जाए तो घबराते क्यों हो ?, बस थोड़ा अना को परे रख, हाथ पकड़, क़दम क़दम मिलाकर साथ चलते हैं, न।
पुराने सड़े गले धागों को धुल कर ,नए धागों को चुनते है, न।
चलो कुछ नया बुनते है, न।
राखी