कहानी नेट बनाम धड़कन
सोहन आज सुबह से परेशान था। बार-बार अपना मोबाइल चेक कर रहा था। शायद कुछ जरूरी मेल आने वाला था। दो दिन से हल्की बारिश हो रही थी। खराब सिग्नल आ रहे थे, नेट काम नहीं कर रहा था। ऑफिस में एक प्रोजेक्ट जमा किया था। उसका परिणाम मेल पर आना था। बार-बार अपना फोन चेक कर रहा था। पर कोई मेल नहीं दिखाई दिया। उसे झुंझलाहट होने लगी। वो सिर पकड़कर चिल्लाने लगा - "क्या हो गया इस नेट को, चल क्यों नहीं रहा। इतनी देर से बफरिंग हो रही है। सिम भी दोबारा निकालकर डाल दिया। इतना जरूरी मेल आना है। और ये फोन। मन करता है इसे उठाकर फेंक दूं।"
उसकी पत्नी मीना इतनी देर से उसकी हरकतें दूर से देख रही थी। मीना रसोई में कॉफी बना रही थी लेकिन नजर सोहन पर ही थी।
उसकी ऐसी बेचैनी देख मीना उसके पास आई। एक कप कॉफी पकड़ाते हुए बोली - "शांत रहो सोहन। शांत हो जाओ। गहरी सांस लो। अब इतने चिल्लाने से समस्या तो ठीक नहीं होगी। कुछ तकनीकी खराबी होगी, कई दिन से मौसम भी खराब है। सोचो यदि किसी ने समुद्र में नेट की वायर काट दी। या कोई व्हेल मछली आ जाए और तार काट दे। या कोई दुश्मन ही नेट की सप्लाई बंद कर दे। सोचो सोहन, सोचो तुम्हारा क्या होगा।"
अब तुम्हारी तो धड़कन ही रुक जाएगी। बिना फोन के तुम कैसे रहोगे ।जो सारे दिन फोन में आंखें गड़ाए रहते हो फिर अगर नेट ही नहीं होगा तो तुम्हारा फोन तो डिब्बा है डिब्बा।
सोहन चिल्लाते हुए कहता है - "क्या बकवास कर रही हो मीना। तुम्हें पता है क्या बोल रही हो। अगर नेट बंद हो गया न एक दिन के लिए भी तो करोड़ों का नुकसान हो जाएगा। सारा व्यापार रुक जाएगा। ओह गॉड ऐसा कभी न हो।"
सोहन की पत्नी मीना कहती है "ये स्मार्ट फोन तो अभी आए हैं कोई दस साल पहले। इससे पहले भी तो लोग जिंदा थे। व्यापार होता था। सब काम होते थे। आज इंसान फोन पर निर्भर पर हो गया है इतना कि बिना नेट के बिना फोन के पागल हो जाता है। लाइफ रुक जाती है। देखो सोहन किसी भी चीज की अति बुरी होती है। और तकनीकी डिवाइस पर इतना निर्भर नहीं होना चाहिए। कुछ दिमाग चलाओ। नेट ही तो नहीं चल रहा। कॉल तो हो सकती है। अरे कॉल करके पूछ लो। कौन सी बड़ी बात है। गुस्से में इंसान छोटी-छोटी बातें भी सोचना भूल जाता है।"
सोहन सिर खुजाते हुए कहता है - "हां ये तो मैंने सोचा ही नहीं। कॉल भी तो कर सकता हूं।"
मीना कहती है - "सोहन समस्या इतनी बड़ी नहीं होती, जितना हम उसे बना देते हैं। बिना फोन के कुछ दिन गुजार कर देखो, जिंदगी बहुत सुंदर है।"
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डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली