शाम के ठीक 6 बज रहे थे। बाहर बारिश की हल्की बूंदें गिर रही थीं, वैसी ही जैसी किसी पुराने ज़ख्म पर नमक गिरता है। कैफे का दरवाज़ा खुला और एक लड़की अंदर आकर कोने वाली मेज पर बैठ गई। उसने अपने लंबे बालों को उंगलियों से संवारा—उसकी वो एक हरकत ऐसी थी जैसे रुकी हुई फिल्म अचानक चलने लगी हो। वह दीवारों पर लगी ड्राइंग्स को ऐसे देख रही थी जैसे उनमें कोई राज छुपा हो। फिर उसने आवाज़ दी, "वेटर!" कार्तिक वहीं पास खड़ा था। वह ऑर्डर लेने बढ़ा, पर उस लड़की के चेहरे को देखते ही उसके कदम जम गए। कार्तिक ने उसे पहले कभी नहीं देखा था,
Ek Cup coffee - चैप्टर 1: हरी आँखों का सन्नाटा
शाम के ठीक 6 बज रहे थे। बाहर बारिश की हल्की बूंदें गिर रही थीं, वैसी ही जैसी किसी ज़ख्म पर नमक गिरता है। कैफे का दरवाज़ा खुला और एक लड़की अंदर आकर कोने वाली मेज पर बैठ गई। उसने अपने लंबे बालों को उंगलियों से संवारा—उसकी वो एक हरकत ऐसी थी जैसे रुकी हुई फिल्मअचानक चलने लगी हो।वह दीवारों पर लगी ड्राइंग्स को ऐसे देख रही थी जैसे उनमें कोई राज छुपा हो। फिर उसने आवाज़ दी, "वेटर!"कार्तिक वहीं पास खड़ा था। वह ऑर्डर लेने बढ़ा, पर उस लड़की के चेहरे को देखते ही उसके कदम जम गए। ...Read More