इस घर में प्यार मना है

(4)
  • 48
  • 0
  • 1.6k

इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार हो जाओ।” माँ की आवाज़ कानों में पड़ी, लेकिन संस्कृति का ध्यान आईने में दिख रही अपनी ही परछाईं पर अटका था। लाल जोड़ा, भारी गहने और आँखों में वो डर… जो किसी दुल्हन का नहीं होता। आज उसकी शादी थी। कार्तिक रघुवंशी से। एक ऐसा नाम… जिसे सुनते ही पूरे शहर में खामोशी छा जाती थी। संस्कृति ने धीरे से खुद से पूछा— “क्या शा

1

इस घर में प्यार मना है - 1

इस घर में प्यार मना है…क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा।या शायद…क्योंकि इस घर का प्यार से नफरत करता है।अध्याय 1— एक अनचाही शादी“संस्कृति… तैयार हो जाओ।”माँ की आवाज़ कानों में पड़ी, लेकिन संस्कृति का ध्यान आईने में दिख रही अपनी ही परछाईं पर अटका था। लाल जोड़ा, भारी गहने और आँखों में वो डर… जो किसी दुल्हन का नहीं होता।आज उसकी शादी थी। कार्तिक रघुवंशी से।एक ऐसा नाम… जिसे सुनते ही पूरे शहर में खामोशी छा जाती थी।संस्कृति ने धीरे से खुद से पूछा—“क्या शादी के बाद ज़िंदगी शुरू होती है… या यहीं खत्म ...Read More

2

इस घर में प्यार मना है - 2

कमरे में सन्नाटा था।इतना गहरा… कि संस्कृति की सिसकियाँ भी उसे तोड़ नहीं पा रही थीं।वो वहीं बैठी रही। की तरह सजी… लेकिन किसी बेवा से भी ज़्यादा अकेली।धीरे-धीरे उसने फाइल अपने हाथ से नीचे रख दी। जैसे उसमें लिखा हर शब्द उसके दिल पर किसी ने नुकीले पत्थर से उकेर दिया हो।संस्कृति (खुद से, टूटती आवाज़ में) बोली -“तो यही है… शादी?”उसने कंगन उतार दिए। एक-एक करके। गहने उतार कर इधर उधर फेंक दिए। हर खनक के साथ उसकी उम्मीद टूटती गई।आईने में खुद को देखा—लाल जोड़ा अब बोझ लग रहा था। सिंदूर… जैसे किसी और की कहानी ...Read More

3

इस घर में प्यार मना है - 3

संस्कृति अब वर्क फ्रॉम होम में नहीं… बल्कि नियमों के बीच काम करने लगी थी। अकेलापन अब सिर्फ़ घर सीमित नहीं था। वो उसके साथ ऑफिस तक चला जाता।सुबह-सुबह सास की आवाज़ उसके कानों में गूँजती रहती।सास (सख्त लहजे में) बोली -ऑफिस जाना है तो ये बात दिमाग़ में रखना—संस्कृति चुपचाप साड़ी की पल्लू ठीक करती।सास बोली -साड़ी पहनकर जाना।ज्यादा मेकअप नहीं।लिपस्टिक हल्की।बाल खुले नहीं रहने चाहिए।संस्कृति ने सिर हिला दिया।सास बोली -किसी से ज़्यादा बात नहीं करोगी। खासतौर पर मर्दों से।एक और नियम।सास बोली -हँसना नहीं है। ऑफिस घूमने की जगह नहीं है।संस्कृति का दिल और सिकुड़ गया।लेकिन ...Read More

4

इस घर में प्यार मना है - 4

घर में शाम का सन्नाटा था। कमरे की खिड़की से हल्की धूप अंदर आ रही थी। लेकिन कमरे में कार्तिक उस हल्की रोशनी के बीच भी पूरी तरह खोया हुआ लगता था।वो थका हुआ था… और मानसिक रूप से पूरी तरह खाली।उसका दिमाग ब्लैंक था। सिर्फ दीवार को घूर रहा था,जैसे दुनिया में कुछ भी न हो।संस्कृति खिड़की से बाहर झांक रही थी। उसके मन में एक ख्याल आया—संस्कृति (मन में) बोली -अगर मैं इस घर को फिर से पहले जैसा बनाना चाहती हूँ…तो पहले घर के बड़े बेटे को अपने वश में करना होगा।पर कैसे?वो कुछ पल के ...Read More