वैदही

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धूप का हल्का पीला रंग खेतों की मेड़ों पर फैल रहा था। कहीं दूर एक बच्ची मिट्टी से सनी किताब लेकर भागती हुई आ रही थी। उसके नंगे पाँवों से धूल उड़ रही थी, चेहरे पर मासूम पसीना, मगर आँखों में कुछ ऐसा तेज़ था जो उम्र से कहीं ज़्यादा बड़ा था। उसके हाथ में एक फटी हुई कॉपी थी, जिसमें उसने अपने बचपन के अक्षरों में लिखा था — “मैं देश के लिए कुछ करूंगी।”वो बच्ची थी — वैदही।

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वैदही - 1

धूप का हल्का पीला रंग खेतों की मेड़ों पर फैल रहा था। कहीं दूर एक बच्ची मिट्टी से सनी लेकर भागती हुई आ रही थी। उसके नंगे पाँवों से धूल उड़ रही थी, चेहरे पर मासूम पसीना, मगर आँखों में कुछ ऐसा तेज़ था जो उम्र से कहीं ज़्यादा बड़ा था। उसके हाथ में एक फटी हुई कॉपी थी, जिसमें उसने अपने बचपन के अक्षरों में लिखा था — “मैं देश के लिए कुछ करूंगी।”वो बच्ची थी — वैदही।गाँव के छोटे से घर में जन्मी, लेकिन सपने इतने बड़े कि आकाश भी छोटा लगे। चारों ओर फैले भ्रष्टाचार, अन्याय ...Read More

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वैदही - 2

काले शीशों वाली एक लंबी ब्लैक BMW अंदर आई। इंजन की धीमी घरघराहट के साथ सबकी नज़र उसी पर गई।वैदही ने सिर घुमाया — और क्षणभर को जैसे समय थम गया।गाड़ी का दरवाज़ा खुला, और एक लंबा, सुथरे कपड़ों में सजीव युवक बाहर निकला।सफेद शर्ट, ग्रे जैकेट, और गहरी नज़रों में आत्मविश्वास की ठंडक। वैदही ने सोचा — फ्रेशर होगा शायद… कोई रईस परिवार से आया है।वो वहीं खड़ी रही। उसके दोस्तों ने एक-दूसरे की तरफ देखा —“अरे नहीं… वो फ्रेशर नहीं है, रुक जा वैदही…”मगर अब देर हो चुकी थी।वैदही उस लड़के के सामने पहुँच चुकी थी।वो हल्के ...Read More