“राजू… उठ जा बेटा… चल, काम पर नहीं जाना है क्या?” राजू की माँ उसे रोज़ सुबह जल्दी जगा दिया करती थी, जिससे वह हमेशा चिढ़ जाता था। वह अपने कानों पर हाथ रखकर चादर फिर से मुँह तक खींच लिया करता था। “माँ, थोड़ी देर और सोने दो ना…” राजू मुँह बनाकर कहता। माँ उसे अफ़सोस भरी नज़र से देखती और फिर दोबारा आवाज़ लगाती, “राजू बेटा, सुबह जल्दी उठने से दिन अच्छा गुजरता है और इंसान के सारे काम बन जाते हैं।” इतना कहकर माँ रसोई की ओर बढ़ जाती और राजू बड़बड़ाता रह जाता।
When Miracles Happen - 1
“राजू… उठ जा बेटा… चल, काम पर नहीं जाना है क्या?” राजू की माँ उसे रोज़ सुबह जल्दी जगा करती थी, जिससे वह हमेशा चिढ़ जाता था। वह अपने कानों पर हाथ रखकर चादर फिर से मुँह तक खींच लिया करता था। “माँ, थोड़ी देर और सोने दो ना…” राजू मुँह बनाकर कहता। माँ उसे अफ़सोस भरी नज़र से देखती और फिर दोबारा आवाज़ लगाती, “राजू बेटा, सुबह जल्दी उठने से दिन अच्छा गुजरता है और इंसान के सारे काम बन जाते हैं।” इतना कहकर माँ रसोई की ओर बढ़ जाती और राजू बड़बड़ाता रह जाता। “हाँ, जल्दी उठने ...Read More
When Miracles Happen - 2
राजू घर आया तो माँ ने खाना परोसा हुआ था। “अच्छा हुआ तू आ गया, चल खाना गरम है। खाते हैं। बेटा, पहले हाथ-मुँह धो ले…” माँ ने राजू से प्यार से कहा। राजू बाहर जो अभी सब देख कर आया था, उसकी वजह से घबराया हुआ था, पर घर आकर थोड़ा शांत हो गया था। माँ को ठीक देखकर उसे अच्छा लगा। “तू ठीक है ना माँ?” “हाँ, मैं ठीक हूँ। चल अब जल्दी आ जा, खाना खाते हैं।” राजू हाथ-मुँह धोने चला गया। दोनों ने अच्छे से खाना खाया। “माँ, आज इतना सब कैसे बना लिया?” बिस्तर ...Read More