मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं

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हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर निकलना ही नहीं चाहते। मैं देखता हूँ कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, किंतु धरातल पर कुछ भी ठोस नहीं होता। वे सारी बातें सिर्फ किताबों तक ही सीमित रह जाती हैं। लोग गीता, कुरान और बाइबल जैसी पवित्र पुस्तकें पढ़ते तो हैं, मगर उनके बताए आदर्शों पर कोई नहीं चलता। सच तो यह है कि आज के समय में किताबों की दुनिया जितनी खूबसूरत है, बाहरी दुनिया उतनी ही बदसूरत।

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1

भाग -1.लेखक -एसटीडी मौर्यकटनी मध्य प्रदेश भारतमोबाईल न. 7648959825हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर निकलना ही नहीं चाहते। मैं देखता हूँ कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, किंतु धरातल पर कुछ भी ठोस नहीं होता। वे सारी बातें सिर्फ किताबों तक ही सीमित रह जाती हैं। लोग गीता, कुरान और बाइबल जैसी पवित्र पुस्तकें पढ़ते तो हैं, मगर उनके बताए आदर्शों पर कोई नहीं चलता। सच तो यह है कि आज के समय में किताबों ...Read More