अग्नि एक अधूरी इबादत

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गंगा ,वरुण और अस्सी के संगम से बनी हुई नगरी, जहां मृत्यु ही मोक्ष हो, जहां पीड़ा ,प्रार्थना ही प्रेम बनाजाए। त्याग की पराकाष्ठा मूरत, जहां घटियो की ताल और गंगा की चाल, प्रयाग सी गालियां और नगरी जो विश्वनाथ की हो, नाम है उसका काशी, क्योंकि शिव है यहां के वासी। इसी तरह के एक दिन श्रद्धालुओं के जमावड़े में मुँह पर लालीमा लिए, राजकुमार शर्मा मणिकर्णिका घाट पर अपनी पुरानी यादों के संग आए।

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अग्नि एक अधूरी इबादत - भाग 1

भाग- 1 गंगा ,वरुण और अस्सी के संगम से बनी हुई नगरी, जहां ही मोक्ष हो, जहां पीड़ा ,प्रार्थना ही प्रेम बनाजाए। त्याग की पराकाष्ठा मूरत, जहां घटियो की ताल और गंगा की चाल, प्रयाग सी गालियां और नगरी जो विश्वनाथ की हो, नाम है उसका काशी, क्योंकि शिव है यहां के वासी। इसी तरह के एक दिन श्रद्धालुओं के जमावड़े में मुँह पर लालीमा लिए, राजकुमार शर्मा मणिकर्णिका घाट पर अपनी पुरानी यादों के संग आए।राजकुमार शर्मा का स्वभाव सरल, साधारण व दार्शनिक है। आँखों पर गोल चश्मा व ...Read More