चुपके-चुपके आऊँगा

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यह कहानी कुछ ही दिन पहले की है। एक दिन मैं अपनी डायरी में कहानी लिख रहा था। तभी मेरी खिड़की के पास एक बिल्ली आ गई। वह “म्याऊँ-म्याऊँ” कर रही थी। मैंने उसे प्यार से “पूसी” कहकर बुलाया। वह बिल्ली बिना डरे मेरे पास आ गई और कुछ पल मेरे पास बैठी रही। थोड़ी देर बाद वह उठकर चल दी। मैं उसे बुलाता रह गया, लेकिन वह नहीं रुकी। फिर भी मैं उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। कुछ दूर जाकर वह एक घर के सामने रुक गई। मुझे लगा कि शायद वह लौटकर मेरे पास आएगी, लेकिन जब मैं उसके करीब पहुँचा तो वह पास के घर के अंदर चली गई।

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चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 1

लेखक -एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेशदूरभाष +917648959825यह कहानी कुछ ही दिन पहले की है।एक दिन मैं अपनी डायरी में लिख रहा था। तभी मेरी खिड़की के पास एक बिल्ली आ गई। वह “म्याऊँ-म्याऊँ” कर रही थी।मैंने उसे प्यार से “पूसी” कहकर बुलाया। वह बिल्ली बिना डरे मेरे पास आ गई और कुछ पल मेरे पास बैठी रही। थोड़ी देर बाद वह उठकर चल दी। मैं उसे बुलाता रह गया, लेकिन वह नहीं रुकी।फिर भी मैं उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। कुछ दूर जाकर वह एक घर के सामने रुक गई। मुझे लगा कि शायद वह लौटकर मेरे पास आएगी, लेकिन ...Read More