" अगर शिला यहीं है तो फिर कुंम्भन बाहर कैसे निकल सकता है। तभी एकांश कहता है---->" आलोक क्यों ना हम सब तुम्हारे गांव तरफ जा कर देखे। वहाँ पर भी ऐसे ही शिला है ना। एकांश की बात सुनकर">

श्रापित एक प्रेम कहानी - 34 CHIRANJIT TEWARY द्वारा Spiritual Stories में हिंदी पीडीएफ

Shrapit ek Prem Kahaani by CHIRANJIT TEWARY in Hindi Novels
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थ...