Meeting with oneself in Hindi Motivational Stories by Muvi Ki Kalam books and stories PDF | खुद से मुलाक़ात

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खुद से मुलाक़ात

यह कहानी एक लड़की की है, जो हर किसी से मिली, हर किसी को समझा… पर कभी खुद से मिलने का वक्त नहीं निकाल पाई। अब वो अपने ही दिल के पास लौट रही है—यह समझने के लिए कि असल में वो कौन है, क्या चाहती है, और किस बात ने उसे अंदर से चुप कर रखा है। यह सिर्फ़ उसकी कहानी नहीं, हर उस दिल की दास्तां है जो अक्सर सबके लिए जीते-जीते खुद को भूल जाता है

 

✨"Khud Se Mulaqat"

आज दिल बड़ा उलझा हुआ है। कुछ साफ़-साफ़ समझ नहीं आ रहा कि ज़िंदगी में चल क्या रहा है। न कुछ अच्छा लग रहा है, न कुछ बुरा… न कोई टेंशन है, न ही सुकून मिल रहा है। पूरा दिन ऐसे ही निकल जाता है सोचते-सोचते, लेकिन आख़िर में समझ ही नहीं आता कि हो क्या रहा है। क्या मैं खुद से मिल रही हूँ या फिर अपने आप से दूर हो रही हूँ।

जहाँ मुझे हर छोटी-बड़ी बात से फर्क पड़ता था, आज कुछ भी हो जाए… कोई फर्क नहीं पड़ता। पढ़ाई मेरे लिए बहुत मायने रखती थी, लेकिन आज वो भी नहीं कर पा रही हूँ। मन में आता है कि अगर पढ़ाई छोड़ दी तो मेरा खुद का कोई वजूद नहीं होगा। लेकिन फिर भी मन में वो लगन, वो हौसला आता ही नहीं कि करना है कुछ।

दोस्तों में मेरी जान बसती है। मम्मी के प्यार और पापा के जाने के बाद पता है कि उन्हीं के लिए मुझे कुछ करना है। लेकिन उन्हें देखकर भी अब पढ़ाई नहीं हो रही। पता नहीं कहाँ खो गई हूँ। ऐसा लगता है जैसे कुछ है जो मुझे खुद से दूर ले जा रहा है या शायद अपने पास ला रहा है। खुद को भगवान को सौंप दिया, फिर भी मन में कुछ तो रह ही गया है।

अपने दोस्तों को मैंने कभी नहीं छोड़ा। चाहे वो गुस्से में हों, रूठे हों या टूटे हुए—मैंने हमेशा साथ दिया। क्योंकि मुझे पता है कि दोस्ती में कभी भी "ego" की जगह नहीं होती। यही तो दोस्ती है मेरी। दिल में सब दोस्तों के लिए इज़्ज़त और प्यार है। उनकी खुशी हमेशा मेरी खुशी से ज़्यादा मायने रखती है।

आज मेरा एक दोस्त, जिसे मेरी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, वो एक बीमारी से लड़ रहा है। लेकिन मैं उसका साथ नहीं दे पा रही। दिल से दुआएं हर पल निकलती हैं, लेकिन मन में कुछ ऐसा है जो अब देख नहीं पा रही। पहले तो उसकी हर बात पर मैं तुरंत रिस्पॉन्ड करती थी, उसकी "ओके" तक पर हज़ार बातें सोच लेती थी। लेकिन आज अगर वो कुछ कह भी दे या कुछ बोले भी, तो मैं कोई ख़ास रिस्पॉन्स नहीं कर पा रही।

उसकी खामोशी भी मैं समझ लेती थी और उसकी हर बात को महसूस कर पाती थी। आज भी समझ रही हूँ, शायद उससे ज्यादा जितना वो खुद समझता है। उसके बिना कुछ कहे मुझे सब पता चल जाता है। मेरा दिल हर वक्त उसके लिए दुआ करता है। उसकी छोटी-सी तकलीफ या चुप्पी भी मुझे परेशान कर देती है।

लेकिन इन सबके बावजूद भी क्यों खोती जा रही हूँ? क्यों मेरा दिल कहता है कि शायद तुझे सबको अकेला छोड़ देना चाहिए, ताकि कोई तेरी वजह से ज़्यादा परेशान न हो। दिल में ऐसे ख्याल आते हैं, लेकिन दूर जाने की हिम्मत नहीं है। और अभी तो उसे मेरी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। मैं खुद को समझ ही नहीं पा रही कि क्या हो रहा है। कहाँ गुम होने लगी हूँ।

वो लड़की, जिसके चेहरे पर हमेशा हँसी और बेफ़िक्री रहती थी… दोस्तों और परिवार की तकलीफ में खुद टूट जाती थी, लेकिन उन्हें कभी पता भी नहीं लगने देती थी। हँसते-मज़ाक करते सब छुपा लेती थी। उसकी आँखों से कभी किसी ने उसका छुपा हुआ ग़म नहीं पढ़ा।

हर प्रॉब्लम का सामना कर लेती थी, चाहे कितनी बड़ी तकलीफ क्यों न हो। कभी हारती नहीं थी। अंदर से टूटी रहती थी लेकिन बाहर से किसी को महसूस नहीं होने देती थी। सबको हमेशा यही लगता था कि वो बहुत स्ट्रॉन्ग है, बेफ़िक्री वाली है। लेकिन कोई उसे असल में जान ही नहीं पाया।

उसने अपनी बॉडी की भी कभी नहीं सुनी, जो बार-बार उसे सिग्नल देती रही—“अब तू मुझे संभाल ले, मैं थक गई हूँ।” बार-बार दर्द, बार-बार थकान उसे ये अहसास दिलाती रही कि उसे भी केयर चाहिए। लेकिन उसने कभी ध्यान नहीं दिया। ऐसे करते-करते वक्त निकल गया।

पता नहीं क्यों आज ऐसे मोड़ पर खड़ी हूँ जहाँ कुछ समझ नहीं आ रहा। दिल में चल रहे सवालों के जवाब नहीं मिल रहे। खुद को ही समझ नहीं पा रही। जैसे कहीं खो सी गई हूँ। आज अकेले रहने का मन करता है, लेकिन फिर भी किसी से दूर नहीं जाया जाता। न ही किसी को समझा पा रही हूँ। शायद मुझे अकेलेपन की ज़रूरत है। लेकिन फिर भी मन में यही सोचती हूँ कि नहीं, उन्हें मेरी मुझसे ज़्यादा ज़रूरत है। मैं ऐसी हूँ… खुद से ही नहीं मिल पा रही।

 

muvi writer 🤍

ये कहानी सिर्फ़ एक लड़की की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो कभी खुद से मिलने की तलाश में भटक जाता है। हम सबकी ज़िन्दगी में ऐसे पल आते हैं जब हम खुद को ही समझ नहीं पाते, और सबसे बड़ी लड़ाई खुद से ही होती है।
अगर ये कहानी आपके दिल को छू गई, तो याद रखिए — कभी भी खुद को खोने मत देना। खुद से मिलना, खुद को समझना ही असली सुकून है

आप सबसे एक छोटी-सी गुज़ारिश 🙏
"अगर ये कहानी आपके दिल तक पहुँची, तो कृपया मुझे अपनी ratings और reviews देकर बताइए। आपकी छोटी-सी प्रतिक्रिया मेरे लिए हौसला बनेगी और मुझे समझ आएगा कि क्या मेरी ये कोशिश आपके दिल को छू पाई