Scattered Threads - A Game of Wills in Hindi Drama by manoj books and stories PDF | बिखरे धागे - वसीयत का खेल

The Author
Featured Books
Categories
Share

बिखरे धागे - वसीयत का खेल

बाहर बारिश हो रही है, लेकिन घर के अंदर 'मिस्टर खन्ना' की 25वीं सालगिरह का जश्न चरम पर है। शैंपेन की बोतलें खुल रही हैं, हीरों की चमक है और शहर के सबसे रईस लोग वहाँ मौजूद हैं।मिस्टर विक्रम खन्ना: अपनी सफलता के नशे में चूर।
​शालिनी खन्ना (पत्नी): अपनी साड़ियों और ज्वेलरी के दिखावे में व्यस्त।
​आर्यन (बेटा): जो ड्रिंक्स के साथ अपने दोस्तों के बीच घिरा है, पर उसकी आँखों में ऊब है।
​रिद्धि (बेटी): जो फोन पर व्यस्त है और इस भीड़ से कटी हुई है।पार्टी के बीच में ही खन्ना परिवार के पुराने वकील, मिस्टर कपूर, एक गंभीर चेहरा लेकर पहुँचते हैं। वे घोषणा करते हैं कि उन्हें एक 'जरूरी वसीयत' (या ट्रस्ट डीड) तुरंत पढ़नी है, जो मिस्टर खन्ना के स्वर्गीय पिता ने इस खास दिन के लिए छोड़ी थी।मिस्टर कपूर चश्मा ठीक करते हैं और गला साफ़ करते हुए पढ़ना शुरू करते हैं:
​"मेरे वारिसों... आज तुम अपनी सफलता का जश्न मना रहे हो, लेकिन याद रखना कि यह साम्राज्य सिर्फ पैसे से नहीं, उस मिट्टी से बना है जहाँ से मैं आया था। आज से, खन्ना विला और आपके सभी बैंक अकाउंट्स पर मेरा ट्रस्ट 'Legacy Shield' कब्ज़ा करता है।"शर्त यह है कि आपको अगले 24 घंटों के भीतर यह घर छोड़ना होगा। आपकी गाड़ियां, आपके क्रेडिट कार्ड्स और आपकी महंगी घड़ियाँ... सब यहीं रहेंगी। आपको अगले एक साल के लिए हमारे पुश्तैनी गाँव 'रामनगर' के उस पुराने छोटे घर में रहना होगा, जिसे मैंने कभी नहीं बेचा। यदि एक भी सदस्य वहां से भागता है, तो पूरी जायदाद चैरिटी में चली जाएगी।"वकील की यह घोषणा किसी बम धमाके से कम नहीं थी। पार्टी का संगीत बंद हो चुका था और मेहमानों की कानाफूसी हॉल में गूंजने लगी थी। यह खन्ना परिवार के लिए सबसे बड़ा 'इम्तिहान' शुरू होने वाला था। ⚖️जैसे ही वकील अपनी बात खत्म करते हैं, शालिनी खन्ना के हाथ से उनका डायमंड क्लच नीचे गिर जाता है। 💎
​शालिनी (चीखते हुए): "यह मजाक बंद कीजिए मिस्टर कपूर! रामनगर? उस टूटे-फूटे गाँव में हम एक दिन नहीं रहे, एक साल कैसे रहेंगे? और यह घर... यह मेरी पहचान है!"
​मिस्टर कपूर (शांति से): "मैडम, वसीयत के कागज गवाह हैं। कल रात 12 बजे इस घर के ताले बदल दिए जाएंगे। आपके पास सिर्फ वही कपड़े ले जाने की इजाजत है जो एक सूटकेस में आ सकें।"
​आर्यन (गुस्से में पिता की ओर मुड़ते हुए): "डैड! आप कुछ बोलते क्यों नहीं? आपने हमें इस बुड्ढे के रहमों-करम पर छोड़ दिया? मैं अपनी स्पोर्ट्स कार और अपनी लाइफस्टाइल नहीं छोड़ सकता!" 🏎️🚫
​विक्रम खन्ना कुछ नहीं बोलते। वे बस अपने पिता की उस पुरानी तस्वीर को देख रहे थे जो दीवार पर टंगी थी। उनकी आँखों में डर था या पछतावा, यह समझना मुश्किल था।​हॉल में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिक-टिक भी शोर लग रही थी। आर्यन का गुस्सा जब जवाब नहीं पा सका, तो वह झनझनाकर वहां रखे एक महंगे फूलदान (Vase) को ठोकर मार देता है। काँच के टुकड़े बिखर जाते हैं—ठीक वैसे ही जैसे खन्ना परिवार का गुरूर। 🏺💥कांपती आवाज में): "विक्रम..कुछ तोकहिए! क्या हम वाकई... उस जगह जा रहे हैं जहाँ से निकलने के लिए आपने अपनी पूरी जवानी लगा दी? लोग क्या कहेंगे? मेरी किटी पार्टी की सहेलियां, मेरा सोशल सर्कल... सब खत्म हो जाएगा!" 😭