अगले कुछ हफ्तों में, बिकाश और माया की दोस्ती अब स्कूल की हर गतिविधि में दिखने लगी। क्लास में साथ बैठना, होमवर्क शेयर करना, और खेल के मैदान में एक-दूसरे की मदद करना – ये सब अब उनकी रोज़मर्रा की आदत बन गई थी।
एक दिन, गणित की क्लास में, शिक्षक ने छात्रों को जोड़ी में प्रोजेक्ट करने के लिए कहा। बिकाश और माया एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुरा दिए।
“हम दोनों साथ करेंगे?” माया ने पूछा।
बिकाश ने सिर हिलाया। “हाँ, क्यों नहीं। तुम्हारे साथ काम करना अच्छा लगता है।”
प्रोजेक्ट करते समय, बिकाश ने देखा कि माया कितनी ध्यान से नोट्स ले रही है। उसकी आँखों में चमक और मुस्कान ने बिकाश का दिल फिर से जोर से धड़काया।
पहली छोटी लड़ाई
कुछ दिनों बाद, माया और बिकाश पार्क में मिले। मौसम खुशनुमा था, और पेड़ों के नीचे दोनों बैठकर बातें कर रहे थे।
माया ने अचानक कहा,
“तुम हमेशा अपनी बातें खुद में रखते हो, बिकाश। कभी-कभी मुझे लगता है कि तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो।”
बिकाश ने हंसते हुए कहा,
“छुपाना नहीं, बस मुझे सोचने का समय चाहिए। हर बात तुरंत कहना मेरे बस की बात नहीं।”
माया थोड़ी नाराज़ हो गई। “तुम हमेशा ऐसे ही रहोगे न?”
बिकाश ने शांत स्वर में कहा, “माया, मैं तुम्हारे बिना ऐसा नहीं रह सकता।”
इस छोटी सी लड़ाई के बाद, दोनों चुपचाप बैठ गए, लेकिन उनके दिलों में एक-दूसरे के लिए प्यार और बढ़ गया।
पहली रोमांटिक घटना
एक दिन स्कूल के छुट्टी के बाद, बिकाश और माया स्कूटर पर घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक बारिश शुरू हो गई। माया ने डरते हुए कहा,
“हम भीग जाएंगे!”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“कोई बात नहीं, मैं तुम्हें सुरक्षित रखूँगा।”
वह छाता लेकर माया के पास गया और दोनों एक ही छाते के नीचे खड़े हो गए। बारिश की बूँदें उनके चारों ओर गिर रही थीं, और उनके चेहरे पर हल्की हँसी थी।
माया ने धीरे से बिकाश की ओर देखा और कहा,
“तुम मेरे लिए हमेशा ऐसे रहोगे न?”
बिकाश ने उसकी आंखों में देखा और मुस्कुराया,
“हमेशा माया, हमेशा।”
उस पल, दोनों के बीच की नज़दीकियाँ और गहरी हो गईं।
पहली डेट की योजना
कुछ दिन बाद, माया ने हिम्मत करके कहा,
“बिकाश, शनिवार को पार्क चलें? सिर्फ हम दोनों।”
बिकाश का चेहरा खुशी से चमक उठा।
“हाँ, बिल्कुल! मैं तुम्हारे लिए वहाँ समय निकाल लूंगा।”
शनिवार को पार्क में, दोनों खेल रहे थे, हँस रहे थे और छोटे-छोटे झगड़े भी कर रहे थे। माया ने बिकाश की टी-शर्ट खिंचते हुए कहा,
“तुम हमेशा इतने शर्मीले क्यों रहते हो?”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम्हारे सामने तो मैं शर्म महसूस ही नहीं करता।”
पार्क की घास पर बैठकर, माया ने बिकाश का हाथ थाम लिया। दोनों के दिल धड़क रहे थे, और शब्दों की जरूरत नहीं थी – उनकी आँखें ही सब कुछ कह रही थीं।
Episode 2 का अंत
दिन खत्म होने के बाद, दोनों घर लौटे। माया ने धीरे से कहा,
“आज का दिन बहुत अच्छा था।”
बिकाश ने मुस्कुरा कर कहा,
“तुम्हारे साथ हर दिन अच्छा लगता है।”
और इसी तरह, उनकी दोस्ती अब प्यार में बदल चुकी थी।
दोनों ने सोचा कि अगली बार, वे स्कूल की छुट्टियों में एक साथ और भी मज़ेदार पल बिताएँगे।
Episode 3 पहला प्यार और इजहार