अधूरी डायरी: हमेशा का वादाभाग 1: पहली मुलाकातदिल्ली की उस पुरानी लाइब्रेरी में, जहाँ हवा में किताबों की सड़ांध भरी महक तैरती रहती थी, आरव पहली बार नेहा से मिला। आरव एक साधारण सा लड़का था—25 साल का, आईटी कंपनी में जूनियर डेवलपर। रोज़ शाम को वो लाइब्रेरी आता, कोने की उस शेल्फ पर बैठता, जहाँ पुरानी डायरियाँ और जर्नल्स रखे थे। उसे पुरानी चीजों का शौक था—जैसे कोई खोई हुई कहानी को जीवंत करना।उस शाम बारिश हो रही थी। आरव अपनी कॉफी का घूँट ले रहा था कि नेहा अंदर घुसी। लंबे काले बाल, नीली सलवार कमीज, और हाथ में एक पुरानी डायरी। वो भी वही शेल्फ की तरफ बढ़ी। "ये जगह हमेशा खाली रहती है," आरव ने हिचकिचाते हुए कहा। नेहा मुस्कुराई। "शायद किसी की कहानी का इंतजार कर रही हो।" उसकी आवाज़ में एक मधुरता थी, जैसे कोई पुराना गीत।वे बातें करने लगे। नेहा 23 साल की थी, एक छोटे से कॉलेज में साहित्य पढ़ाती। "मैं डायरी लिखती हूँ," उसने बताया। "हर पल, हर भावना। लेकिन आखिरी पन्ना... वो कभी नहीं भरता।" आरव हँसा, "क्यों? डर लगता है भविष्य लिखने से?" नेहा की आँखें गंभीर हो गईं। "भविष्य तो लिखा नहीं जाता, जीया जाता है।" वे रोज़ मिलने लगे। नेहा अपनी डायरी के पन्ने दिखाती—बचपन की मासूमियत, पहली क्रश की मिठास, माँ के खोने का दर्द। आरव सुनता, जैसे अपनी कहानी हो।भाग 2: डायरी का रहस्यदिन बीतते गए। नेहा और आरव का रिश्ता गहरा होता गया। वो कॉफी पीते, पार्क घूमते, रात को फोन पर घंटों बातें करते। नेहा कहती, "आरव, तुम मेरी डायरी के लायक हो। शायद तुम ही आखिरी पन्ना भरो।" आरव शरमाता, लेकिन दिल में एक उम्मीद जगती। एक दिन नेहा ने डायरी दी पढ़ने को। "ये मेरी जिंदगी है। पढ़ो, लेकिन आखिरी पन्ना मत छूना।"आरव ने पढ़ा। पहला पन्ना: "1 जनवरी 2000: आज मैं पैदा हुई। माँ ने कहा, तू मेरी परी है।" फिर स्कूल के दिन, पहली दोस्ती, पापा का एक्सीडेंट। एक पन्ना: "आज पहला प्यार हुआ। लेकिन वो चला गया। दिल टूटा।" आरव का दिल बैठ गया। कौन था वो? नेहा ने बताया, "पुरानी बात। अब तुम हो।"लेकिन एक शाम नेहा गायब हो गई। फोन बंद, मैसेज का जवाब नहीं। लाइब्रेरी में उसकी डायरी मिली—शेल्फ पर भूली। आरव ने खोली। आखिरी पन्ना खाली। सिर्फ एक अधूरी लकीर: "मैं जा रही हूँ... कहीं जहाँ..." नीचे कुछ धब्बे—आँसुओं के?भाग 3: रोज़ की कोशिशेंआरव टूट गया। वो रोज़ लाइब्रेरी जाता। डायरी खोलता, नेहा की लाइनों को पढ़ता। "नेहा, तुम कहाँ हो?" रातें कटतीं। वो कलम उठाता। "आज नेहा लौट आई। हम शादी करेंगे।" लेकिन शब्द काले लगते। मिटाता। नेहा की आवाज़ गूँजती: "जीया जाता है।"दिन बीतते गए—एक हफ्ता, दो, महीना। आरव का दोस्त विक्रम कहता, "भूल जा यार। वो चली गई।" लेकिन आरव नहीं माना। वो नेहा के कॉलेज गया, पता लगाया—नेहा ने नौकरी छोड़ी, घरवालों के साथ चली गई। कहीं पहाड़ों पर। बीमारी? कोई नहीं बताता। आरव ने डायरी में लिखना शुरू किया। "दिन 10: आज बारिश हुई। तुम्हें याद किया। क्या तुम ठीक हो?" पन्ना भर गया, लेकिन नेहा का नहीं। वो खुद की डायरी बना रहा था डायरी में।रोज़ की रस्म: सुबह पढ़ना, शाम लिखने की कोशिश। एक रात सपना आया—नेहा कह रही, "आरव, आखिरी पन्ना मेरे लिए रखो।" जागा तो आँसू भरे। अगले दिन वो पहाड़ों की यात्रा पर निकला। नेहा का पता ढूँढा—शिमला। लेकिन खाली हाथ लौटा। डायरी अब उसके जीवन का हिस्सा थी।भाग 4: लौटनाछह महीने बीत चुके थे। आरव की आँखों में उदासी घुल गई। लाइब्रेरी अब सुनसान लगती। एक शाम भारी बारिश। दरवाजा खटका। नेहा खड़ी थी—पतली, चेहरा पीला, लेकिन आँखों में वही चमक। "आरव..." आवाज़ काँप रही। आरव भागा, गले लगा लिया। "नेहा! तुम... कहाँ थी?"नेहा अंदर आई। गीले कपड़े, हाथ में वही डायरी नहीं—आरव की जेब वाली। "तुम रोज़ पढ़ते थे ना? मैं जानती थी। मेरी डायरी ने मुझे बुलाया।" आरव ने डायरी निकाली। "ये... मैंने लिखा। लेकिन आखिरी पन्ना खाली है। तुम्हारा।"नेहा बैठी। आखिरी पन्ना खोला। खाली। "मैं कैंसर से लड़ रही थी। डॉक्टरों ने कहा, ज्यादा दिन नहीं। घरवालों ने छुपाया। मैं नहीं चाहती थी तुम दुखी हो। लेकिन तुम्हारी कोशिश... मैंने फेसबुक पर देखा। तुम्हारी पोस्ट्स। लौट आई।"आरव रो पड़ा। "मैंने भरा होता... तुम्हारे लिए।" नेहा मुस्कुराई। "अभी भरो।" उसने कलम थमा दी। आरव ने लिखा: "आखिरी पन्ना हम भरेंगे। साथ। हर दर्द, हर खुशी। नेहा और आरव—हमेशा।" नेहा ने पढ़ा, आँसू पोछे। "अब पूरी है।"बारिश थम गई। वे बाहर निकले। नेहा बोली, "अब नई डायरी शुरू करेंगे। हमारी।" आरव ने हाँ कहा। डायरी सीने से लगाए। अधूरी नहीं रही—प्यार ने भर दिया।एपिलॉग: हमेशा का वादादो साल बाद। शिमला के अस्पताल में नेहा ठीक हो गई—चमत्कार। आरव ने नौकरी छोड़ी, साथ में एक छोटा सा कैफे खोला लाइब्रेरी के पास। डायरी अब शेल्फ पर—दोनों के बच्चों के लिए। आखिरी पन्ना? अब नया अध्याय: "हमारी बेटी पैदा हुई। डायरी जारी रहेगी।"