मम्मीमम्मी - मम्मी -मम्मी कहाँ हो आप ' अभिनव अवाज देता हुआ घर में आता है। बेटा मैं यहां स्टोर मे हूं। दीवाली की सफाई कर रही हूँ। अभिनव ये क्या है ? बक्शे मे क्या टटॉल रही हो। मम्मी ये बक्शा कुछ खास यादो से भरा हुआ है। देख बेटा ये साड़ी मेरी गोद भराई की है , जब तुम्हारे पापा से रिश्ता हुआ था। ये साड़ी तेरे नाना ने मुझे शादी पर पसन्द का कपड़ा दिलाया था। 'ये लहंगा इसे मैं देखती हूँ , तो लगता है। मैं दुल्हन बन गयी हूँ । जैसे - तेरे पापा और मैं नवयुवक बन गये है।
पर मम्मी इन सामान को देख कर आपकी आँखे नम क्यो हो जाती है। मम्मी- इन फोटो में जो लोग है । इन में से कुछ लोग हमारे जीवन मे नहीं है। इन लोगो को देखती हूं। तो ऐसा लगता है। जैसे मैं अभी तेरे नाना के आंगन मे खेल रही हूं। सब से ज्यादा जख्म तेरे पापा ने दिये जो हमारे बीच नही है। अभिनव - हर साल इसी सामान को निकालती- सम्भालती हो। फिर रख देती हो। मम्मी -बेटा इस सामान को मैं हर साल हवा धूप लगा कर रखती हूं । कितना कुछ बदल गया है , जीवन मे इस बक्शे को खोलती हूं। तो ऐसा लगता है। अभी की ही बात है। अभिनव -ये कागज कैसे है। पीले भी पड़ गये है। इन के शब्द भी धुंधला गये है। मम्मी -बेटा पर मे अभी भी इन्हे पढ़ सकती हूँ । उस समय मे चिट्टी का जमाना था। एक साल तक तेरे पापा और मेरा रिश्ता रुका था। पत्रो से ही दिल की बात करी जाती थी। मम्मी आप भी पापा की चिट्टी का जबाब भेजा करती थी। मम्मी हंसते हुए। हा हां क्यू नही पत्र का जबाब भेजती थी । जितनी बार पत्र को पढ़ती थी। उतना ही अच्छा लगता था। मन ही नही भरता था। छः - : महीने का गोना हुआ था। ये क्या होता है? पट्ट्रा फेर शादी के बाद पहली वार पीहर जाना और ससुराल से लेने आते थे। परिवार वाले ये भी एक रस्म ही की तरह होता है। अभिनव - चलो न मम्मी बहुत जोरो से भूख लगी है। हां हां चलती हूं । तेरी पसन्द का खाना बनाया है। छोले-भटूरे आलू जीरा ,रायता ' सलाद अभी कढाई गर्म करती है अभिनव मम्मी आप ये हर साल बक्शा मत खोला करो मुझे आपकी ये नम आँखे नही देखी जाती है। ये शादी क्यू? होती है। बचपन कितना हंसता खेलता होता है। मम्मी - बेटे को गले लगाकर बेटा ये हमारे समाज की रीत है। देवी - देवता राजा महाराजा ने भी निभायी है। हम तो फिर भी मामूली इंसान है। शादी के पन्द्रह साल बाद तेरा जन्म हुआ था। काफी मन्नतो के बाद ।मुझे खुद से ज़्यादा तेरे बचपन का अफसोस है। पिता का साया उठ गया था। अभिनव - मम्मी को सदभावना देते हुए अब तो सब सही हो गया। ्ना ' मुझे याद है। आप चार बजे से उठती थी घर का सारा काम कर स्कूल पढ़ाने जाती थी। फिर टयूशन करती थी । अब फ्रिक क्यो करती हो। आप की मेहनत भरोसे ने मुझे भी कामयाब व्यक्ति बना दिया - आई -आई टी का इंजीनियर बन कर । मम्मी -अब बस ईश्वर से एक ही प्रार्थना है। तेरा घर बसा दे।
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(Continued)