अपनी नजर से दुनिया सभी लोग देखते है। मगर में आप को जहा तक संभव हो वहा तक सबकी नजरों से दुनियां दिखाना चाहता हूं। सभी अपने भले के अनुसार सोचते है, की ये सही रहेगा। इसी को लेकर में सब को बताना चाहता हूं की बच्चे मां पापा से क्या उम्मीद रखते है कैसे सोचते है। और मां पापा बच्चो के लिए कैसे सोचते है। इस कहानी का सीधा-सीधा उद्देश्य यही है। मां पापा बच्चों की नजरों से दुनियां को देखने की कोशिश करें और बच्चे मां पापा की तरह। इससे आप को छोटी मोटी बातो को समझने में मदत मिलेगी और थोडी आजादी भी।
अगर आप ठीक से। ध्यान दे तो आप इन बातों का ध्यान रख कर छोटे मोटे ग्रह कलेश तो यूंही खतम कर लोगे।
इसकी भाषा शैली बिल्कुल सामान्य रखी गईं है। और अगर मुझसे लिखने में कहीं गलती होती है तो में माफी चहता हूं पहले ही। आप सब भी मेरी सहायता करें। और मुझे बताए की में आप के लिए इसको और अच्छा किस प्रकार करू। आप आपकी समीक्षा से मुझे इसके बारे में सब बताएं।
कोशिश करुंगा में और अच्छे से अच्छा आप के लिए लेके आऊ।
और आप इसको पढ़े उसके लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद.
बात मध्यम वर्गीय परिवार के बारे में हो रही है तो सबको पता ही होगा। की आज आप मध्यम वर्गीय परिवार से हो और अकेले हो मतलब एकल परिवार में रहते हो। तो इस के लिए आप के पापा ने कितनी मेहनत की होगी जो आज आप ये दिन देख पा रहे हो ।
मां पापा के समय में किसी को खुल कर जीने तक की आजादी नहीं थी। माना समय अच्छा था मगर जगह जगह रोका जाता था। अगर वो किसी पद पर है ना तो वो खुद के दम पर है।
या मां पापा ने कैसे ना कैसे करके उनको पढ़ाया। की बेटा हम तो ना पढ़ पाए कम से कम तुम ही पढ़ कर कुछ बन जाओ।
तो तब उनका लक्ष्य बस एक था । की कैसे ना कैसे करके मां पापा के लिए कुछ करना है। या जिन को मां पापा का सहारा नहीं मिला उन्होंने खुद मेहनत करके पैसा कमाया। और इस काबिल बने की आज कुछ कर पा रहे है। वर्ना घर का सहारा जिन को था ना उनका आज कारोबार अच्छा सब अच्छा है।
तब के समय में दादा दादी लोग भी ध्यान नहीं देते है। अरे जहा थोड़े पढ़े लिखे लोग थे वहा तो फिर भी ठीक था। मगर गांव में एक तरफ बच्चे की बहू पेट से है। दुसरी तरफ बच्चे की मां। इतने में वो अकेले बाप किस किस किस को देखता। बस छोड़ देता है बच्चों को भी जैसे की इसके है ही नहीं।
शादी हो गई तो कर दिया बंटवारा। कुछ चंद पैसे दिए और निकाल दिया घर से । की जाओ अब तुम से हमारा कोई रिश्ता नाता नहीं। वो बेचारे क्या करें। लड़की के मां बाप भी पहले ऐसे ही किया करते। कन्या दान किया अब भाई सब आप की जिम्मेदारी। अरे का तो फिर भी ठीक है। पहले बचपन में शादी कर दी जाती। बच्चे तेरह से चौदह बरस के हुए नहीं की रचा दो ब्याह।
अब महोल फिर भी थोडा ठीक हुआ है। मगर उस वक्त का असर आज कल के बच्चों पर देखने को मिलता है। जो आपने मां बाप पूरे नहीं कर पाए। वो पढ़ा लिखा कर बच्चो से पुरा करवाना चाहते है। की हमारा बेटा ये बने वो बने। सब कुछ उसको देते है उसको पुरी आजादी से रखते है। की जो सुख हम न देख पाए वो अब हमारे बच्चे देखेंगे।
मगर गुजारिश बस इतनी सी है। की प्लीज कोई जो भी कुछ भी कर रहा है। उसे आजादी के साथ ही करने दे। हां आप ये ध्यान देते रहे की ये कोई गलत तो ना कर रहा क्यूंकि आज कल कुसंगति बहुत हो गईं है। सबसे पहले मासूम लोगों को फसाया जाता हैं।
इस समय बच्चों को उस किसी भी चीज या हालात से खतरा नहीं हैं। जिस से उनके मां पापा गुजर कर आए है। मगर इस समय में घर का पुरा साथ और एक दुसरे का समझना ज़रूरी हैं। अगर आप के घर में कुछ निर्णय लिया जा रहा है। तो उस पर सब की सलाह ले। ये नहीं की मां पापा है। तो हर बार सही ही होंगे।
होता बस यही है। की मां पापा का निर्णय सही होता है। मगर बहुत ही कम जगह ये सही साबित हो पाता है। क्योंकि आज की दुनिया ही ऐसी है कही ना कहीं कुछ ऐसा होता ही है। जिससे आप अपने बच्चे को समझने में गलती कर सकते हो। और फ़िर जब जाना ही नहीं तो पता कैसे चलेगा की जो फैसला लिया हैं। वो सही है या नहीं।
चलो ऊपर ऊपर समझने से कुछ ना होगा। कुछ कहानियों की मदत से हम धीरे-धीरे जहां तक होता है। समझने की कोशिश करते है।
मगर हां एक बात ध्यान रखना ये पूर्णत काल्पनिक है। कहीं भी जोड़ने की कोशिश ना करें।
अगर आप को कुछ भी अच्छा या समीक्षा करने लायक लगे तो आप के विचार हमें जरूर दे। तो चलो चलते हैं। समझने की कोशिश करते है।
इसमें हम सभी के भाव और विचार देखेंगे की मां पापा बच्चो के लिए कैसे सोचते है और बच्चे सब। के बारे में
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To be continue ----