The Project in Hindi Science-Fiction by Ravi Bhanushali books and stories PDF | The Project

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The Project

अध्याय 1: ब्लैक ज़ोन
साल 2026 में शहर के बाहर फैला जंगल अब भी वैसा ही था, लेकिन उसके बीच खड़ा पुराना रिसर्च सेंटर लोगों की नींद उड़ाने लगा था। उसे ब्लैक ज़ोन कहा जाता था। वहाँ रात के समय अजीब रोशनी दिखती थी और जानवर डर के मारे पास नहीं आते थे।
अर्जुन, नेहा, कबीर और सोनाली कॉलेज के दोस्त थे। अर्जुन को हाल ही में कुछ लीक हुए सरकारी डॉक्यूमेंट मिले थे, जिनमें लिखा था कि ब्लैक ज़ोन में अब भी “कुछ” सक्रिय है। जिज्ञासा ने चारों को वहाँ खींच लिया।
जैसे ही वे सेंटर के अंदर घुसे, मोबाइल नेटवर्क खत्म हो गया। दीवारों पर अजीब निशान थे—आधे वैज्ञानिक समीकरण, आधे प्राचीन राक्षसी चिन्ह। तभी नीचे से एक भारी सांस लेने की आवाज़ आई।
अध्याय 2: राक्षस का जागना
वे नीचे की प्रयोगशाला तक पहुँचे। बीच में एक विशाल कक्ष था, जिसके अंदर टूटी मशीनें और एक खुला हुआ टैंक था। अचानक बिजली चमकी और अंधेरे से एक भयानक आकृति उभरी।
वह राक्षस था—ऊँचा, विकराल, शरीर का कुछ हिस्सा मांस का और कुछ हिस्सा धातु का। उसकी आँखें लाल थीं और हर सांस के साथ ज़मीन काँप रही थी।
कबीर डर से चिल्लाया, लेकिन राक्षस ने हमला नहीं किया। वह बस इधर-उधर देख रहा था, जैसे किसी चीज़ को पहचानने की कोशिश कर रहा हो।
अध्याय 3: आयाम-17 का सच
कंप्यूटर अपने आप चालू हो गया। फाइलों में लिखा था कि आयाम-17 एक दूसरा संसार है, जहाँ ऊर्जा और चेतना अलग रूप में मौजूद है। वैज्ञानिकों ने उस ऊर्जा को इंसान में डालकर सुपर-सोल्जर बनाना चाहा।
लेकिन प्रयोग विफल हुआ। जिस इंसान पर यह प्रयोग हुआ, वह मरना चाहिए था, पर मरा नहीं। वह बदल गया—राक्षस में।
नेहा ने महसूस किया कि राक्षस बार-बार अर्जुन की ओर देख रहा है। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, उलझन थी।
अध्याय 4: शहर पर खतरा
राक्षस सेंटर से बाहर निकला। पूरे शहर में बिजली गुल हो गई। लोग डर के मारे घरों में छुप गए। सरकार ने सेना भेजी, लेकिन गोलियाँ राक्षस को नुकसान नहीं पहुँचा सकीं।
फाइलों में आखिरी उपाय लिखा था—आयाम-17 को बंद करने के लिए उसी व्यक्ति की चेतना चाहिए, जो प्रयोग से जुड़ा हो।
तभी सोनाली को एक और फाइल मिली। उसने चुपचाप पढ़ी और उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया।
अध्याय 5: सच का खुलासा (Plot Twist)
सोनाली ने काँपती आवाज़ में कहा कि प्रयोग जिस इंसान पर हुआ था, उसका नाम… अर्जुन था।
अर्जुन सन्न रह गया। फाइलों में लिखा था कि बचपन में एक दुर्घटना के बाद अर्जुन को इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया गया था। उसकी चेतना को दो हिस्सों में बाँट दिया गया—एक इंसानी शरीर में और दूसरी आयाम-17 की ऊर्जा में।
राक्षस दरअसल अर्जुन का ही दूसरा रूप था—उसका गुस्सा, उसका दर्द, उसकी दबाई गई यादें।
राक्षस धीरे-धीरे अर्जुन के पास आया। पहली बार उसने बोलने की कोशिश की। उसकी आवाज़ भारी थी, लेकिन शब्द साफ़ थे। वह घर जाना चाहता था।
अध्याय 6: अंत या शुरुआत
अर्जुन समझ गया कि राक्षस को मारना मतलब खुद को मारना होगा। उसने फैसला किया कि वह आयाम-17 में वापस जाएगा, लेकिन इस बार पूरे रूप में।
उसने मशीन चालू की। तेज़ रोशनी फैली। राक्षस और अर्जुन एक-दूसरे में मिलने लगे। शहर में शांति लौट आई।
जब रोशनी खत्म हुई, वहाँ न राक्षस था, न अर्जुन।
कुछ दिन बाद शहर सामान्य हो गया। लेकिन नेहा को कभी-कभी अपने फोन पर एक अजीब संदेश मिलता है—
“मैं ठीक हूँ। दोनों दुनियाओं के बीच।”
ब्लैक ज़ोन आज भी बंद है।
और लोग कहते हैं कि कभी-कभी वहाँ से इंसान और राक्षस—दोनों की आवाज़ एक साथ सुनाई देती है।