एपिसोड 3: मौत का स्पर्श और रहस्यमयी बॉक्स
काली आँखों वाले सैनिकों ने सिया और उसके साथियों को चारों तरफ से घेर लिया था। उनकी पकड़ लोहे जैसी मजबूत थी। वे उन्हें खींचते हुए उस भूमिगत शहर की जेल की ओर ले गए और एक अंधेरे कालकोठरी में धकेल दिया।
सिया का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसे अपनी चिंता नहीं थी, उसे चिंता थी अपने भाई की, जो अभी भी उनकी कैद में कहीं और था।
तभी, कोठरी के बाहर एक अजीब घटना घटी। जिन सैनिकों ने सिया के पास से वह 'प्राचीन डिवाइस' छीना था, वे अचानक तड़पने लगे। देखते ही देखते उनका शरीर सूखने लगा, जैसे किसी ने उनकी सारी जान खींच ली हो। और पलक झपकते ही—फूफ्फ्!—वे राख के ढेर में बदल गए।
यह देखकर वहां हड़कंप मच गया। तुरंत ही 'काली आँखों वालों' के सुप्रीम लीडर (Supreme Leader) को बुलाया गया।
सुप्रीम ने राख के ढेर को देखा और फिर उस डिवाइस की ओर, जो जमीन पर पड़ा चमक रहा था। उसने कांपती हुई आवाज में पूछा, "इस वस्तु को किस कैदी ने छुआ था?"
एक सिपाही ने डरते हुए सिया की ओर इशारा किया, "उसने... उस लड़के ने।"
सुप्रीम की आँखों में भय दौड़ गया। उसने चिल्लाकर आदेश दिया, "खबरदार! कोई भी इस वस्तु को न छुए। इसे वापस उस लड़के को दे दो।"
जैसे ही सिया ने उस डिवाइस को वापस हाथ में लिया, वह नीले रंग से गहरा लाल हो गया। उसमें से एक तेज रोशनी निकली और एक होलोग्राम हवा में तैरने लगा। उस होलोग्राम में पृथ्वी अंतरिक्ष से दिखाई दे रही थी—बेहद सुंदर और शांत।
तभी डिवाइस से एक यांत्रिक आवाज आई:
"चेतावनी! यह वस्तु पृथ्वी के लिए नहीं है। यह ग्रह K-452b की तकनीक है। पृथ्वी की सतह पर रहने वाले 'मनुष्य' और पाताल में रहने वाले 'गुरूस' (Gurus) इसे छूते ही राख बन जाएंगे। इसे केवल वही धारण कर सकता है जो इस ग्रह का न हो, या जिसका डीएनए ब्रह्मांड के रक्षक से मिलता हो।"
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। इसका मतलब था कि सिया कोई साधारण इंसान नहीं था। अगर वह इसे छूकर भी जिंदा है, तो वह पृथ्वी का होकर भी पृथ्वी का नहीं है।
सुप्रीम लीडर तुरंत घुटनों पर बैठ गया। उसका व्यवहार पूरी तरह बदल चुका था।
"हमें क्षमा करें," उसने हाथ जोड़कर कहा। "हमें लगा आप घुसपैठिए हैं। लेकिन आप... आप तो भविष्यवाणी का हिस्सा हैं।"
सुप्रीम ने बताया, "हमें कुछ दिनों से अंतरिक्ष से एक अजीब सिग्नल मिल रहा है। चलिए, मैं आपको अपनी प्रयोगशाला में ले चलता हूँ।"
प्रयोगशाला में पहुंचकर उन्होंने सिया को एक पुराना, धूल जमा हुआ संदूक (Box) दिखाया। सुप्रीम ने कहा, "हमारे पूर्वजों के पास तीन उंगलियां थीं, लेकिन आपके पास पांच हैं। यह बॉक्स सदियों से बंद है। भविष्यवाणी थी कि जब ब्रह्मांड का अंत निकट होगा, तब कोई 'पाँच उंगलियों वाला रक्षक' इसे खोलेगा।"
सिया ने डरते हुए अपना हाथ उस बॉक्स पर रखा।
क्लिक... एक आवाज हुई और सदियों पुराना बॉक्स खुल गया।
एपिसोड 4: पिता का संदेश और आसमान से हमला
बॉक्स खुलते ही उसमें से रोशनी का एक पुंज निकला। वह किसी तितली जैसा दिख रहा था, लेकिन वह जीव नहीं, बल्कि शुद्ध ऊर्जा थी। वह ऊर्जा का टुकड़ा हवा में तैरा और सीधा सिया के हाथ में मौजूद उस लाल डिवाइस पर जाकर बैठ गया।
जैसे ही दोनों मिले—एक धमाका हुआ। वह डिवाइस पिघलकर सिया की छाती की ओर बढ़ा और उसकी त्वचा के अंदर समा गया।
"आह्ह्ह!" सिया दर्द से चिल्लाया। उसे लगा जैसे उसके शरीर में बिजली दौड़ रही हो। उसे अजीब सी ताकत महसूस हो रही थी। गुस्से और दर्द में उसने पास के एक मोटे खंभे पर मुक्का मारा।
धड़ाम!
पत्थर का वह मजबूत खंभा चकनाचूर होकर गिर पड़ा। सिया अपनी ही ताकत देखकर दंग रह गया।
तभी उसकी छाती से एक और होलोग्राम निकला। सिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह चेहरा... वह उसके पिता थे।
होलोग्राम बोला, "मुझे पता था बेटा, एक दिन तुम यहाँ तक पहुँच जाओगे। तुम साधारण नहीं हो सिया। तुम्हारी खोज अब शुरू होती है..."
बात पूरी भी नहीं हुई थी कि होलोग्राम बंद हो गया। सिया ने उसे दोबारा चालू करने की कोशिश की, लेकिन तभी प्रयोगशाला में लाल बत्तियां जलने लगीं।
सायरन बजने लगे— टूँ... टूँ... टूँ...
"हम पर हमला हो रहा है!" सुप्रीम चिल्लाया। "सिग्नल बहुत करीब आ चुके हैं!"
सिया, उसके साथी और गुरूस (काली आँखों वाले) भागते हुए गुफा से बाहर, पृथ्वी की सतह पर आए।
बाहर का नजारा देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए।
रात का आसमान तारों से नहीं, बल्कि विशालकाय अंतरिक्ष यानों (Spaceships) से भरा पड़ा था। कुछ जहाज इतने बड़े थे कि वे नंगी आँखों से भी पहाड़ों जितने विशाल लग रहे थे।
उन बड़े जहाजों में से छोटे-छोटे पॉड्स (Pods) पृथ्वी की तरफ गिरने लगे। एक पॉड सिया के ठीक सामने आकर गिरा। धुआं छटा और उसमें से कुछ आकृतियां बाहर निकलीं।
वे दिखने में बिल्कुल इंसानों जैसे थे, लेकिन कुछ अलग था। उनकी आँखें समुद्र जैसी नीली थीं और उनकी कलाइयां कोयले जैसी काली थीं।
क्या वे एलियंस दोस्त हैं या दुश्मन? क्या पृथ्वी का अंत निकट है, या यह पूरे ब्रह्मांड के विनाश की शुरुआत है? और सबसे बड़ा सवाल—सिया, जो पृथ्वी का इंसान होकर भी उस विदेशी वस्तु को छू पाया, क्या वही वह असली रक्षक है?
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